‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’… लेकिन बैनर की जिम्मेदारी किसकी?
जांजगीर-चांपा में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रचार सामग्री पर उठे सवाल

जांजगीर-चांपा। राष्ट्रीय पोषण माह जैसे महत्वपूर्ण सरकारी अभियान के कार्यक्रम में लगाए गए बैनर की तस्वीर अब सवालों के घेरे में है। सामने आई तस्वीर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के चित्र दिखाई दे रहे हैं। इन चित्रों की वास्तविक आधिकारिक तस्वीरों से समानता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि विभाग की ओर से अभी तक इस विशेष बैनर के फोटो-स्रोत अथवा डिजाइन को लेकर कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
चूंकि, मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि यह कोई निजी आयोजन का पोस्टर नहीं, बल्कि महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का प्रचार-प्रसार सामग्री वाला कार्यक्रम है। केंद्र सरकार ने इस अभियान में स्वयं “सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही” को प्रमुख अवधारणा बनाया है और आंगनबाड़ी सेवाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही पर जोर दिया है। उल्लेखनीय है कि जांजगीर-चांपा जिले में राष्ट्रीय पोषण माह की गतिविधियां जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित हो रही हैं। 11 सितंबर को जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण माह की गतिविधियां भी जिला कार्यक्रम अधिकारी के ही मार्गदर्शन में आयोजित हुई थी। ऐसे में अब विभाग से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह बैनर किस अधिकारी अथवा कार्यालय की अनुमति से तैयार हुआ? बैनर का डिजाइन किस व्यक्ति, एजेंसी या संस्था ने तैयार किया? मुख्यमंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री के फोटो किस आधिकारिक स्रोत से लिए गए? क्या विभाग के पास इस बैनर की मूल डिजाइन फाइल उपलब्ध है? क्या बैनर को छपवाने से पहले किसी जिम्मेदार अधिकारी ने उसका परीक्षण और अनुमोदन किया था? यदि तस्वीरों में डिजिटल एडिटिंग हुई है तो उसकी अनुमति किसने दी?
आधिकारिक फोटो के बीच अंतर दिखाई देने का दावा
तस्वीर में चेहरे और आधिकारिक फोटो के बीच अंतर दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इसे लेकर एआई जनरेटेड की चर्चा है। लेकिन बिना मूल डिजाइन फाइल, इस्तेमाल किए गए फोटो के स्रोत और तकनीकी जांच के इसे निश्चित रूप से एआई से बनाया हुआ कहना उचित नहीं होगा। यही वजह है कि मामला आरोप लगाने से ज्यादा जवाबदेही तय करने का बनता है। यदि विभाग के पास अधिकृत फोटो और मूल डिजाइन फाइल है, तो उसे सार्वजनिक करने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए। इससे यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि बैनर में इस्तेमाल तस्वीरें आधिकारिक थीं अथवा उनमें किसी प्रकार का डिजिटल परिवर्तन हुआ था।
विभाग के अपने अभियान की भावना से भी जुड़ा सवाल
राष्ट्रीय पोषण माह-2026 की केंद्रीय गाइडलाइन में पारदर्शिता, सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही को महत्व दिया गया है। छत्तीसगढ़ में भी इसी अभियान को “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” थीम के साथ चलाया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि जब अभियान का संदेश ही जिम्मेदारी और जवाबदेही का है, तो सरकारी प्रचार सामग्री तैयार करने और मंजूर करने की प्रक्रिया कितनी जवाबदेह रही?
अब जिला प्रशासन की निगाह भी जरूरी
मामले में कलेक्टर और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को बैनर की मूल फाइल और फोटो स्रोत की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि सब कुछ नियमानुसार है तो विभाग आसानी से तथ्य सामने रख सकता है। और यदि प्रक्रिया में चूक हुई है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी। यह केवल दो तस्वीरों के सही या गलत होने का मामला नहीं है। सवाल सरकारी प्रचार सामग्री की विश्वसनीयता, अधिकारियों की निगरानी और सार्वजनिक धन से तैयार सामग्री की जवाबदेही का है।



