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एबीईओ को जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी की जिम्मेदारी देने पर उठे सवाल

संलग्नीकरण पर रोक के बावजूद शिक्षा विभाग की अधिकारी को खेल विभाग का सौंपा प्रभार

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षा विभाग में लंबे समय से चली आ रही संलग्नीकरण की व्यवस्था को समाप्त करने के निर्देश के बाद भी जांजगीर-चांपा जिले में इसके विपरीत प्रशासनिक व्यवस्था किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बलौदा में पदस्थ सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (एबीईओ) पुष्पा कोरी को जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी का दायित्व सौंप दिया गया है। इस प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर शासन के संलग्नीकरण समाप्त करने के निर्देशों और संबंधित पद की कार्यप्रकृति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण को लेकर सरकार पहले ही सख्त निर्देश जारी कर चुकी है। वर्ष 2026 में लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा भी मूल पदस्थापना से अलग कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों एवं कर्मचारियों को उनके मूल संस्था अथवा कार्यालय में वापस भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं। जानकारी के अनुसार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बलौदा में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत पुष्पा कोरी को कलेक्टर के आदेश से जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। यदि यह आदेश एबीईओ की मूल पदस्थापना बरकरार रखते हुए उन्हें दूसरे विभाग के जिला स्तरीय पद का अतिरिक्त दायित्व देता है, तो यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि इस व्यवस्था का प्रशासनिक एवं वैधानिक आधार क्या है। क्योंकि मामला केवल अतिरिक्त प्रभार का नहीं, बल्कि एक विभाग के अधिकारी-कर्मचारी को दूसरे विभाग के जिला स्तरीय पद पर बैठाने से जुड़ा है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या इसके लिए संबंधित विभाग की अनुमति, सक्षम प्राधिकारी का आदेश और सेवा नियमों के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई है।
 
शासन ने क्यों खत्म किया था संलग्नीकरण?
शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण की व्यवस्था को समाप्त करने के पीछे मूल उद्देश्य शिक्षकों एवं कर्मचारियों को उनकी स्वीकृत पदस्थापना पर वापस भेजना और स्कूलों में मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना बताया गया है। 2026 में लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों के बाद कई जिलों में संलग्न शिक्षकों एवं कर्मचारियों को मूल संस्था में कार्यमुक्त करने की कार्रवाई भी की गई। जांजगीर-चांपा जिला भी इससे अछूता नहीं रहा। जिले में एक शिक्षक को विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बम्हनीडीह में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी जैसे राजपत्रित पद का प्रभार दिए जाने को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी से जवाब मांगा गया था। ऐसे में अब एबीईओ स्तर के अधिकारी को खेल एवं युवा कल्याण विभाग के जिला अधिकारी का दायित्व दिए जाने का मामला सामने आने से यह प्रश्न और महत्वपूर्ण हो जाता है कि शासन के संलग्नीकरण समाप्त करने के निर्देशों की स्थानीय स्तर पर व्याख्या किस आधार पर की जा रही है।
 
खेल विभाग के पद की विशेषज्ञता पर भी सवाल
एबीईओ पुष्पा कोरी मरकाम को जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी की जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर दूसरा बड़ा सवाल उनकी शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता से संबंधित बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, उनके पास बीपीएड अथवा एमपीएड जैसी खेल शिक्षा से संबंधित कोई डिग्री नहीं है और न ही खेल गतिविधियों के संचालन का कोई उल्लेखनीय अनुभव है। चूंकि, खेल एवं युवा कल्याण विभाग जिला स्तर पर खेल गतिविधियों, प्रतियोगिताओं, खिलाड़ियों के प्रोत्साहन और विभिन्न खेल योजनाओं के संचालन से जुड़ा विभाग है। ऐसे में विभाग के जिला स्तरीय दायित्व के लिए संबंधित अधिकारी की सेवा-पदस्थापना, योग्यता, विभागीय अनुभव और प्रभार देने के आदेश की वैधानिक स्थिति सार्वजनिक होना जरूरी है।
 
पहले डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी संभालते रहे हैं जिम्मेदारी
बताया जा रहा है कि जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी का पद रिक्त रहने अथवा नियमित अधिकारी की अनुपस्थिति में पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा डिप्टी कलेक्टर या उससे ऊपर के प्रशासनिक अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया जाता रहा है। अब शिक्षा विभाग के एबीईओ को यह जिम्मेदारी दिए जाने से प्रशासनिक हलकों में इसकी आवश्यकता और औचित्य पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि इस दावे की पुष्टि के लिए पूर्व में जारी प्रभार आदेशों और वर्तमान आदेश की तुलनात्मक जांच आवश्यक होगी। यही दस्तावेज यह स्पष्ट कर सकते हैं कि जिले में इस पद पर प्रभार देने की पूर्ववर्ती प्रशासनिक परंपरा क्या रही है और वर्तमान आदेश उससे किस प्रकार अलग है।
 
शासन के आदेश और जिला स्तर के आदेश में सामंजस्य कितना?
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि यदि शासन ने शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के संलग्नीकरण को समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, तो किसी शिक्षा अधिकारी को दूसरे विभाग के जिला कार्यालय में जिम्मेदारी देने के लिए किस प्रावधान का इस्तेमाल किया गया। क्या यह संलग्नीकरण है, अतिरिक्त प्रभार है, प्रतिनियुक्ति है अथवा केवल प्रशासनिक व्यवस्था के तहत अस्थायी दायित्व, यह अंतर महत्वपूर्ण है। संबंधित आदेश में इस्तेमाल की गई भाषा और उसमें उल्लिखित नियमों से ही इसकी वास्तविक प्रकृति स्पष्ट होगी। इसलिए जिला प्रशासन को यदि इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी है तो संबंधित आदेश सार्वजनिक कर यह बताना होगा कि एबीईओ पुष्पा कोरी मरकाम को किस आदेश क्रमांक एवं दिनांक से खेल एवं युवा कल्याण विभाग का दायित्व दिया गया। उनका मूल पद और मूल पदस्थापना क्या है। उन्हें यह दायित्व किस सेवा नियम अथवा प्रशासनिक प्रावधान के तहत दिया गया। क्या संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से इसके लिए अनुमति ली गई है। यह व्यवस्था संलग्नीकरण, प्रतिनियुक्ति या अतिरिक्त प्रभार में से किस श्रेणी में आती है। संबंधित पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता क्या है तथा उनके पास खेल संबंधी कौन-सी शैक्षणिक योग्यता एवं विभागीय अनुभव है। बहरहाल, ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि शासन के संलग्नीकरण समाप्त करने के आदेश के बीच जांजगीर-चांपा में की गई इस प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उच्च शिक्षा एवं खेल विभाग क्या रुख अपनाता है और क्या संबंधित आदेश की समीक्षा की जाती है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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