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खोखरा में शासकीय जमीन और तालाबों पर कब्जे का खेल : मकान-दुकान बनाने की होड़, प्रशासन मौन!
डोंगिया, बुटरी, बीरसागर, हंससागर तालाब की निस्तारी व्यवस्था भी प्रभावित, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से कार्रवाई की उठाई मांग

जांजगीर-चांपा। एक ओर शासन गांवों के जलस्रोतों को संरक्षित करने और तालाबों के जीर्णोद्धार पर लाखों रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय से लगे ग्राम खोखरा में शासकीय जमीन और तालाबों पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत और प्रशासन की कथित निष्क्रियता के चलते गांव में बेजा कब्जे का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। सड़क किनारे से लेकर तालाब पार तक जमीन पर कब्जा कर मकान और दुकानें बनाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
मंडी चौक से धाराशिव मोड़ तक कब्जे का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार मंडी चौक से धाराशिव मोड़ तक सड़क किनारे और तालाब क्षेत्र से लगी शासकीय जमीन पर जगह-जगह कब्जे किए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग पहले सरकारी जमीन पर कब्जा करते हैं और बाद में उसे कथित रूप से बिचौलियों के माध्यम से औने-पौने दाम में बेच देते हैं। इससे भविष्य में सरकारी भवन और सार्वजनिक उपयोग की सुविधाओं के लिए जमीन उपलब्ध होने में परेशानी खड़ी हो सकती है।
तालाब पाटने से निस्तारी पर संकट
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के डोंगिया,बुटरी,हंससागर बिरसागर,खईया सहित कई तालाबों के आसपास लगातार कब्जा होने और कुछ हिस्सों को पाटे जाने से जलस्रोतों का क्षेत्रफल सिकुड़ रहा है। इसका सीधा असर ग्रामीणों की निस्तारी व्यवस्था पर पड़ रहा है। जिस तालाब का उपयोग वर्षों से ग्रामीण दैनिक जरूरतों के लिए करते आ रहे हैं, उसी के किनारे कब्जे बढ़ने से आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
डोंगिया तालाब को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
गांव के मुख्य जलस्रोत डोंगिया और बुटरी तालाब को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों ने तालाब क्षेत्र को पाटकर वहां मकान और दुकान बना रहे हैं तथा डोंगिया तालाब के पुराने सार्वजनिक रास्ते पर भी कथित रूप से कब्जा कर मकान और शौचालय बना दिया गया है। शौचालय से निकलने वाला अपशिष्ट तालाब में जाने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे तालाब का पानी प्रदूषित होने और निस्तारी प्रभावित होने की आशंका है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कब्जे का विरोध करने पर उन्हें कथित तौर पर गाली-गलौज और थाने में शिकायत करने की धमकी दी जाती है। इससे लोग खुलकर विरोध करने से बच रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि तालाब पार की शासकीय भूमि पर कब्जा कर उसे आगे बेचने का प्रयास किया जा रहा है।
सवाल यह कि कार्रवाई कब?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जिला प्रशासन द्वारा सीमांकन और जांच कर शासकीय भूमि एवं तालाब क्षेत्र को कब्जामुक्त नहीं कराया गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत से शासकीय भूमि का सीमांकन कराने, तालाब की वास्तविक सीमा चिन्हित करने, कथित अतिक्रमण की जांच करने और सार्वजनिक रास्ते को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि जलस्रोतों के संरक्षण पर जोर देने वाला प्रशासन खोखरा के तालाबों और शासकीय जमीन को कथित अतिक्रमण से बचाने के लिए कब ठोस कदम उठाता है।



