पेंशनभोगियों की 12 सूत्रीय मांगों को लेकर 29-30 सितंबर को 24 घंटे का हुआ धरना-प्रदर्शन, छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेंशनर कल्याण संघ के तत्वावधान में प्रधानमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ प्रगतिशील पेंशनर कल्याण संघ जांजगीर-चांपा ने राज्य सरकारों के पेंशनभोगियों, पारिवारिक पेंशनभोगियों और वरिष्ठ नागरिकों की विभिन्न मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन 30 सितंबर 2026 को सौंपा है। ज्ञापन में देशभर के जिला मुख्यालयों पर 29 और 30 सितंबर 2026 को 24 घंटे का धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाने की जानकारी देते हुए केंद्र सरकार से पेंशनभोगियों की 12 सूत्रीय मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।
ज्ञापन ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट पेंशनर्स फेडरेशन के बैनर तले चलाए जा रहे आंदोलन के तहत दिया गया है। संगठन के अनुसार यह आंदोलन का पहला चरण है, जिसे 6-7 जुलाई 2026 को हैदराबाद (तेलंगाना) में हुई एनईसी बैठक में तय किया गया था। ज्ञापन के अनुसार आंदोलन के अगले चरण में 12 दिसंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल रैली तथा 13 दिसंबर 2026 को नई दिल्ली में राज्य और केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों का संयुक्त सम्मेलन प्रस्तावित है। ज्ञापन में पेंशनभोगियों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। संगठन ने मार्च 2025 में संसद द्वारा पारित पेंशन नियम (सत्यापन अधिनियम-2025) को वापस लेने की मांग की है। साथ ही हर वेतन आयोग में पेंशन संशोधन सुनिश्चित करने के लिए डी.एस. नकारा फैसले को बरकरार रखने की मांग की गई है। संगठन ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के टर्म आॅफ रेफरेंस में संशोधन कर 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों की पेंशन में संशोधन का प्रावधान शामिल करने की मांग भी रखी है।
अंतरिम राहत और डीए-डीआर में बढ़ोतरी की मांग
ज्ञापन में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने में होने वाली संभावित देरी को देखते हुए पेंशनभोगियों को अंतरिम राहत देने की मांग की गई है। इसके अलावा डीए-डीआर में 50 प्रतिशत की वृद्धि कर उसे पेंशन में मर्ज करने की मांग भी रखी गई है। संगठन ने 10 वर्ष 8 महीने के बाद कम्यूटेशन की बहाली की मांग की है। ज्ञापन में पेंशन में समानता सुनिश्चित करने, पारिवारिक पेंशन की दरों में सुधार करने तथा भेदभावपूर्ण प्रावधानों को समाप्त करने की मांग भी शामिल है।
पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग
ज्ञापन की प्रमुख मांगों में एनपीएस और यूपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करना भी शामिल है। संगठन ने मांग की है कि सभी राज्य, केंद्र, सार्वजनिक उपक्रम और स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी और कम्यूटेशन सहित पूर्ण पेंशन लाभों के साथ ओपीएस बहाल की जाए तथा पीएफआरडीए विधेयक को रद्द किया जाए।
कोरोनाकाल के डीए-डीआर भुगतान की मांग
पेंशनभोगियों ने कोरोना काल में रोके गए 18 माह के डीए-डीआर का तत्काल भुगतान करने की मांग की है। ज्ञापन में वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेलवे और हवाई टिकटों में 50 प्रतिशत छूट फिर से शुरू करने की मांग भी की गई है। संगठन ने यह भी कहा है कि राज्य सरकार के पेंशनभोगियों को केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों के समान डीए-डीआर का लाभ मिलना चाहिए।
स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर
ज्ञापन में सार्वजनिक एवं सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और पेंशनभोगियों तथा बुजुर्ग नागरिकों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। साथ ही निश्चित मेडिकल भत्ते को उचित रूप से बढ़ाने की मांग रखी गई है। इसके साथ ही पेंशनभोगियों ने उम्र के साथ पेंशन में अतिरिक्त वृद्धि की मांग भी की है। ज्ञापन के अनुसार 65 से 75 वर्ष की आयु तक प्रत्येक पांच वर्ष में पेंशन में 10 प्रतिशत की वृद्धि तथा 80 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक पांच वर्ष में 20 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने की मांग की गई है। इसके अलावा पेंशनभोगियों की शिकायतों के समाधान के लिए वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक वैधानिक राष्ट्रीय आयोग गठित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
ज्ञापन में पेंशन को संवैधानिक अधिकार बताते हुए पेंशनभोगियों के हितों की रक्षा की मांग की गई है। संगठन ने कहा है कि पेंशनभोगियों की मांगों को लेकर सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए और ज्ञापन में उल्लिखित सभी मांगों का समाधान किया जाना चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो प्रस्तावित आंदोलन के अगले चरणों में पेंशनभोगियों का संघर्ष और तेज किया जाएगा। ज्ञापन में कहा गया है कि आंदोलन के अगले चरण के रूप में 12 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली और 13 दिसंबर को संयुक्त सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
ज्ञापन में उठाई गई 12 प्रमुख मांगें
1. पेंशन नियम (सत्यापन अधिनियम-2025) को वापस लेना।
2. डी.एस. नकारा फैसले को बरकरार रखते हुए प्रत्येक वेतन आयोग में पेंशन संशोधन सुनिश्चित करना।
3. 8वें वेतन आयोग के टर्म आॅफ रेफेरेंस में संशोधन कर 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन संशोधन को शामिल करना।
4. 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में देरी को देखते हुए अंतरिम राहत देना।
5. डीए/डीआर में 50 प्रतिशत वृद्धि कर उसे पेंशन में मर्ज करना।
6. 10 साल 8 महीने बाद कम्यूटेशन की बहाली करना और पेंशन व पारिवारिक पेंशन में समानता सुनिश्चित करना।
7. एनपीएस/यूपीएस समाप्त कर ओपीएस बहाल करना तथा पीएफआरडीए विधेयक रद्द करना।
8. कोरोना काल के रुके हुए 18 माह के डीए/डीआर का तत्काल भुगतान करना।
9. वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेलवे और हवाई यात्रा में 50 प्रतिशत छूट फिर शुरू करना तथा राज्य पेंशनभोगियों को केंद्र के समान डीए/डीआर देना।
10. पेंशनभोगियों और बुजुर्गों के लिए बेहतर एवं कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना।
11. 65 से 75 वर्ष तक प्रत्येक पांच वर्ष में 10 प्रतिशत तथा 80 वर्ष के बाद प्रत्येक पांच वर्ष में 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन वृद्धि करना।
12. पेंशनभोगियों की शिकायतों के समाधान के लिए वरिष्ठ नागरिकों का वैधानिक राष्ट्रीय आयोग गठित करना।



