नहर निर्माण में निभाई जा रही औपचारिकता… 4 करोड़ 67 लाख 34 हजार रुपए की लागत से नहर क्षतिग्रस्त निर्माण गुणवत्ताविहीन…

नहर निर्माण में निभाई जा रही औपचारिकता
4 करोड़ 67 लाख 34 हजार रुपए की लागत से नहर क्षतिग्रस्त निर्माण गुणवत्ताविहीन
नहर निर्माण में स्तरहीन गिट्टी, सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है साथ ही बिना वाइब्रेटर चलाए निर्माण किया जा रहा है
सक्ती। इन दिनों जैजैपुर ब्लाक के सक्ती शाखा नहर के अंतर्गत मुरलीडीह वितरक नहर,मलनी वितरक नहर,सिरली सब माईनर, तांदुलडीह माईनर एवं भोथिया माईनर नहर के क्षतिग्रस्त सी सी लाइनिंग बैंक,सूदढीकरण, टो वाल का निर्माण एवं मिट्टी का कार्य मेसर्स सिद्धिविनायक कंस्ट्रक्शन कंपनी खरसिया के ठेकेदार रमेश अग्रवाल के द्वारा भ्रष्टाचार करते हुए 4 करोड़ 67 लाख 34 हजार रुपए की लागत से नहर निर्माण की औपचारिकता भर निभाई जा रही है। नहर निर्माण में स्तरहीन गिट्टी, सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही बिना वाइब्रेटर चलाए निर्माण किया जा रहा है। जिससे आने वाले पहली बरसात में ही नहर में दरारें आने की संभावना है और जल्द ही टूटकर पानी में बह जाएगी। किसानों की खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा माइनर नहरों का विस्तार करते हुए नए नहर निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। मगर इसमें गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है। इसके चलते इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाएगा और अंतिम छोर के खेतों तक नहर का पानी नहीं पहुंच पाएगा। ऐसे में करोड़ों रूपए खर्च का भी कोई फायदा किसानों को नहीं मिलेगा। संबंधित अधिकारी व इंजीनियर के द्वारा निर्माण कार्य का निरीक्षण ही नहीं किया जाता हैं। जिससे नहर निर्माण भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ रहा हैं वहीं सिंचाई विभाग के एसडीओ सिदार मौके पर जाकर कार्य करवाने की दावा करते है लेकिन एक भी अधिकारी निर्माण कार्य स्थल पर नही मिलते है।
कमजोर बेस के कारण निर्माणाधीन नहर में गुणवत्ताविहीन
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य का जायजा लेकर बताया कि जितना का बेस होना चाहिए। लेकिन ठेकेदार द्वारा नाम मात्र का 4 से 5 इंच का बेस डाला जा रहा है। निर्माण सामग्री का उपयोग भी पर्याप्त मात्रा में न कर अनियमितता की जा रही है। इससे नहर में दरारें आएगी और पानी रिसाव होने से नहर टूटने की संभावना रहेगी। नहर टूटने से शासन की राशि बर्बाद होगी साथ ही किसानों की फसल भी चौपट हो सकती है। भ्रष्टाचार का नजारा उक्त सभी माईनर के कार्य को देखने से मिला हल्की बारिश से ही सीमेंट व गिट्टी से निर्माण उखाड़ने लगा लग जायेगा।
निर्माण स्थल से समरी बोर्ड गायब
राज्य सरकार का नियम है कि किसी भी प्रकार के शासकीय निर्माण कार्य में मानक सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है। जिससे आम नागरिकों को उक्त निर्माण कार्य की लागत, मापदंड, संबंधित ठेकेदार के फर्म व संबंधित अधिकारियों का नाम नंबर और संबंधित इंजीनियर, एसडीओ का नाम नंबर पता चले। लेकिन ठेकेदार द्वारा भ्रष्टाचार करते हुए नहर निर्माण कार्य तो तीव्र गति से चलाया जा रहा है लेकिन ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य के दौरान मानक बोर्ड नही लगाया गया है जिस पे स्थानीय लोगो और जनप्रतिनिधियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगाया है।
बिना वाइब्रेटर चलाए नहर क्षतिग्रस्त निर्माण का कार्य
पूरे नहर निर्माण कार्य में कही भी ठेकेदार द्वारा वाइब्रेटर का उपयोग नहीं किया जा रहा है। जिससे गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है। वाइब्रेटर चलाने से सीमेंट, गिट्टी मटेरियल की खपत ज्यादा होती है। जिसको बचाने के लिए ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में नहर टूट जाएगी और जिन किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए यह नहर निर्माण किया जा रहा है इस घटिया निर्माण से उन्ही किसानों की पानी नहीं मिल पाएगी।
ग्रामीण करेंगे मंत्रालय रायपुर में शिकायत
क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया की निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन कराया जा रहा हैं नहर से किसानों को पानी नहीं मिल सकता इससे किसानों को इसका लाभ भी नहीं मिल पायेगा इसकी शिकायत मंत्रालय रायपुर में किया जाएगा।
वर्जन
लगातार नहर में चल रहे निर्माण कार्यो की निरीक्षण किया जा रहा है ऐसे कोई शिकायत नही मिली है
सिदार जी
एसडीओ
सिचाई एवं जल संसाधन विभाग सक्ती



