Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-03).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-02).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-01).jpg
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

टाटा से अंबानी तक! बंगाल से क्यों भागीं बड़ी कंपनियां? निवेश संकट ने बिगाड़ी राज्य की अर्थव्यवस्था

कोलकाता : पश्चिम बंगाल कभी देश के सबसे मजबूत औद्योगिक राज्यों में गिना जाता था। जूट इंडस्ट्री, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में राज्य की अलग पहचान थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में निवेश की कमी और उद्योगों के पलायन ने राज्य की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य की आर्थिक मजबूती निवेश और रोजगार पर निर्भर करती है। जब नई कंपनियां आना बंद हो जाएं और पुरानी कंपनियां भी दूसरे राज्यों में शिफ्ट होने लगें, तो आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ना तय माना जाता है।

टाटा से रिलायंस तक, कई कंपनियों ने बदली दिशा

पश्चिम बंगाल से कई बड़ी कंपनियों ने धीरे-धीरे अपना फोकस दूसरे राज्यों की ओर बढ़ाया। सबसे चर्चित उदाहरण टाटा मोटर्स का नैनो प्रोजेक्ट रहा, जिसे सिंगुर में शुरू किया जाना था। हालांकि बाद में यह प्रोजेक्ट गुजरात के सानंद में शिफ्ट हो गया। आज सानंद देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल हब्स में शामिल है।

See also  नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक विजय पाण्डेय ने चांपा थाने का किया औचक निरीक्षण, दिए आवश्यक दिशा-निर्देश

इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईटीसी और बिड़ला समूह जैसी कंपनियों ने भी अपने निवेश का विस्तार गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में किया। विशेषज्ञों के मुताबिक, कारोबार के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, नीतिगत स्थिरता और औद्योगिक माहौल ने कंपनियों को दूसरे राज्यों की ओर आकर्षित किया।

Advertisment

जूट इंडस्ट्री की गिरावट ने बढ़ाई मुश्किलें

जूट उद्योग कभी बंगाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता था। लेकिन समय के साथ कई बड़ी जूट मिलें बंद होती चली गईं। नेशनल जूट मैन्युफैक्चर कॉरपोरेशन समेत कई प्रतिष्ठित मिलों में उत्पादन ठप हो गया।

विश्लेषकों का कहना है कि तकनीकी आधुनिकीकरण की कमी, बढ़ती लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण यह सेक्टर कमजोर होता गया। इसका सीधा असर रोजगार और स्थानीय व्यापार पर पड़ा।

See also  एक किलोमीटर के दायरे में हर घर स्वस्थ विभाग करेगा सर्वे, 10 किलोमीटर रेडियस में निगरानी, घबराएं नहीं सतर्क रहें, पढ़िए पूरी खबर...

वित्तीय घोटालों ने भी पहुंचाया नुकसान

बंगाल के वित्तीय क्षेत्र को भी कई बड़े घोटालों से झटका लगा। शारदा और रोज वैली जैसे मामलों के सामने आने के बाद निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ। इससे छोटे निवेशकों और स्थानीय कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ा।

MSME सेक्टर में भी हजारों इकाइयों के बंद होने की खबरें सामने आती रही हैं। इससे रोजगार के अवसर कम हुए और आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ीं।

क्या बदल सकती है बंगाल की आर्थिक तस्वीर?

राजनीतिक बदलावों और नई नीतियों के बीच अब बंगाल में निवेश को लेकर नई उम्मीदें जताई जा रही हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य में उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल, तेज मंजूरी प्रक्रिया और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाए तो निवेश दोबारा बढ़ सकता है।

See also  कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने वृक्षारोपण के संबंध में उद्योगो एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों की ली बैठक, अतिक्रमण मुक्त शासकीय भूमि पर होगा शासन एवं उद्योगो की मदद से चरणबद्ध वृहद वृक्षारोपण, ऑक्सीजोन, ग्रीनजोन होगा तैयार...

उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के उदाहरण दिए जा रहे हैं, जहां बड़े निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं ने रोजगार और विकास को गति दी। ऐसे में आने वाले वर्षों में बंगाल के लिए निवेश आकर्षित करना सबसे बड़ी चुनौती और अवसर दोनों माना जा रहा है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!