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युवा पीढ़ी में बढ़ रहा है अपेंडिक्स कैंसर का खतर स्टडी में खुलासा

अब तक अपेंडिक्स कैंसर को बहुत ही दुर्लभ बीमारी माना जाता था. यह बीमारी पहले मुख्य रूप से बुजुर्गों में पाई जाती थी. लेकिन हाल ही में हुए एक अध्ययन ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं. अब यह कैंसर तेजी से युवाओं में भी बढ़ रहा है और विशेषज्ञ इस बदलाव से हैरान हैं. अपेंडिक्स हमारे शरीर के पाचन तंत्र का एक छोटा-सा हिस्सा है. यह बड़ी आंत से जुड़ी हुई एक उंगली के आकार की थैली जैसी संरचना होती है. हालांकि, इसके कार्य को लेकर वैज्ञानिकों में अब भी पूरी सहमति नहीं है, लेकिन आमतौर पर यह अपेंडिसाइटिस यानी सूजन के लिए ज्यादा जाना जाता है. अब यही अपेंडिक्स कैंसर का रूप ले रहा है, जो चिंता का विषय बन चुका है. हैरानी की बात है ये है कि यह कैंसर युवा पीढ़ी में तेजी से फैल रहा है.

एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, 1970 के बाद पैदा हुए लोगों में अपेंडिक्स कैंसर के मामलों में तीन से चार गुना तक वृद्धि देखी गई है. पहले जहां यह कैंसर मुख्यतः 50 साल से ऊपर के लोगों को होता था, अब इसके मरीजों में बड़ी संख्या में 30 और 40 साल के लोग भी शामिल हो रहे हैं. हालांकि, अभी भी यह बीमारी बहुत ही कम लोगों को होती है. हर साल प्रति दस लाख लोगों में गिनती के ही मामले सामने आते हैं, लेकिन इसके बढ़ते मामले विशेषज्ञों को सतर्क कर रहे हैं. अभी तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है कि आखिर अपेंडिक्स कैंसर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ कुछ संभावित कारणों की ओर इशारा करते हैं.

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क्यों बढ़ रहे अपेंडिक्स कैंसर के मामले
रिसर्च में बताया गया है किपिछले कुछ दशकों में लोगों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है. 1970 के दशक के बाद मोटापे के मामले तेजी से बढ़े हैं. मोटापा कई तरह के कैंसर का बड़ा कारण बन चुका है. अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन, मीठे पेय, रेड मीट और प्रोसेस्ड मांस का सेवन बढ़ा है. ये सभी चीजें पाचन तंत्र के कैंसर के खतरे को बढ़ाती हैं. लोग अब कम चलते-फिरते हैं और घंटों स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं. इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म गड़बड़ाता है और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. खाद्य उत्पादन में रसायनों का उपयोग, प्लास्टिक का अत्यधिक प्रयोग, पानी की गुणवत्ता में गिरावट और प्रदूषण जैसे नए पर्यावरणीय कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं.

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अपेंडिक्स कैंसर का पता लगाना मुश्किल क्यों?
कैंसर सर्जन डॉ. अंशुमान कुमार बताते हैं किअपेंडिक्स कैंसर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके लक्षण बहुत अस्पष्ट होते हैं. शुरुआती लक्षणों में हल्का पेट दर्द, सूजन या मल त्याग की आदतों में बदलाव हो सकते हैं. ये लक्षण आमतौर पर अन्य छोटी-मोटी बीमारियों में भी होते हैं, इसलिए इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता. अक्सर इस कैंसर का पता तब चलता है जब किसी मरीज का अपेंडिसाइटिस के शक में ऑपरेशन किया जाता है और सर्जरी के दौरान कैंसर का पता लगता है. तब तक बीमारी कई बार काफी आगे बढ़ चुकी होती है.

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स्क्रीनिंग की कमी भी बड़ी वजह
फिलहाल अपेंडिक्स कैंसर के लिए कोई नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट मौजूद नहीं है. यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि इसके लिए बड़े पैमाने पर जांच की व्यवस्था भी संभव नहीं हो पाई है. कोलोनोस्कोपी जैसी सामान्य जांच भी अपेंडिक्स के भीतर झांक नहीं पाती. इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और डॉक्टर से समय पर परामर्श लेना ही सबसे कारगर उपाय है.

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मरीजों और डॉक्टरों को सतर्क रहना जरूरी
अध्ययन के अनुसार, बदलती जीवनशैली और वातावरण के बीच अब यह बेहद जरूरी हो गया है कि मरीज अपने शरीर में हो रहे किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें. पेट में बार-बार हल्का दर्द, सूजन या पाचन से जुड़ी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. वहीं डॉक्टरों को भी अब युवा मरीजों में इस कैंसर की संभावना को ध्यान में रखते हुए जांच करनी चाहिए, ताकि इसे शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सके.

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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