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6000 करोड़ महादेव सट्टा कांड की परछाईं फिर लौटी, नए ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट को उभरने से पहले झटका, कांकेर का हेड कॉन्स्टेबल सस्पेंड

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कुख्यात महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले की परछाईं एक बार फिर सतह पर आ गई है। शनिवार को पुलिस मुख्यालय ने असाधारण तेजी दिखाते हुए राजनांदगांव जिले में कथित तौर पर उभर रहे एक नए संगठित ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट को शुरुआती चरण में ही रोक दिया। इस कार्रवाई के केंद्र में रहे कांकेर जिले में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल विजय कुमार पांडे, जिन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

करीब 6,000 करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टा कांड से जुड़ा यह नाम पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहा है। ताज़ा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राज्य में सट्टा नेटवर्क दोबारा सिर उठाने की कोशिश कर रहा था, और क्या इसके पीछे वही पुराने चेहरे सक्रिय थे।

शीर्ष पुलिस नेतृत्व की सीधी दखल

सूत्रों के अनुसार, कांकेर और राजनांदगांव से मिले विश्वसनीय इनपुट के बाद मामला सीधे पुलिस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा। पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) अमित कुमार को यह जानकारी मिली कि हेड कॉन्स्टेबल विजय पांडे हाल के दिनों में कुछ ऐसे राज्य पुलिस सेवा (SPS) अधिकारियों के संपर्क में थे, जिनका तबादला हाल ही में रायपुर से राजनांदगांव हुआ है।

इन इनपुट्स में आरोप था कि पांडे कथित तौर पर सट्टा संचालकों और पुलिस तंत्र के बीच “लायज़ॉन लिंक” की भूमिका निभा रहे थे और बदले में मासिक ‘प्रोटेक्शन मनी’ के ज़रिए कार्रवाई से राहत दिलाने की कोशिश की जा रही थी।

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इसके बाद कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने तत्काल आदेश जारी करते हुए विजय पांडे को निलंबित कर दिया।

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निलंबन के बाद रहस्यमय ग़ायब

निलंबन आदेश के तुरंत बाद ही हेड कॉन्स्टेबल विजय पांडे का अचानक संपर्क से बाहर हो जाना पुलिस मुख्यालय के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया। इस घटनाक्रम को हल्के में नहीं लिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय स्तर पर कांकेर और राजनांदगांव जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। कांकेर एसपी को पांडे की अनुपस्थिति और मूवमेंट को लेकर तत्काल स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि राजनांदगांव एसपी अंकिता शर्मा को ज़मीनी स्तर पर निगरानी और सतर्कता बढ़ाने की सलाह दी गई है।

साथ ही यह भी निर्देश है कि यदि विजय पांडे के खिलाफ कोई औपचारिक शिकायत या पुष्ट सामग्री सामने आती है, तो उसके आधार पर तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।

महादेव कांड से पुराना रिश्ता

इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बनाने वाला पहलू यह है कि विजय कुमार पांडे का नाम पहले ही महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप कांड की जांच में उभर चुका है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SEOIACB) की समानांतर जांचों के दौरान पांडे का नाम 2021 की एक विवादित विदेशी यात्रा को लेकर सामने आया था।

यह यात्रा दुबई की थी, जहां कथित तौर पर पांडे ने महादेव ऐप के प्रमोटर्स रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर से मुलाकात की थी। विवाद इस बात को लेकर है कि यह यात्रा सरकारी अनुमति के बिना की गई और बाद में इसके लिए ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ यानी यात्रा के बाद मंजूरी दी गई।

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मौखिक आदेश और संदिग्ध भूमिका

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, उस समय विजय पांडे कांकेर जिले के डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (DCRB) में पदस्थ थे और उन्हें एक प्रभावशाली वरिष्ठ अधिकारी के साथ ‘मौखिक आदेश’ यानी बिना लिखित आदेश के अटैच किया गया था।

सूत्रों का दावा है कि यही वरिष्ठ अधिकारी उस छोटे लेकिन प्रभावशाली समूह का हिस्सा थे, जिन पर ईडी ने महादेव सट्टा सिंडिकेट से ‘प्रोटेक्शन मनी’ लेने के आरोप लगाए हैं।

फर्जी आवेदन और PHQ की भूमिका

मामले में नया मोड़ तब आया जब यह सामने आया कि दुबई यात्रा के लिए ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ मंजूरी का आवेदन कथित तौर पर चंद्रभूषण वर्मा द्वारा तैयार किया गया था। वर्मा, जो उस समय सहायक उप निरीक्षक (ASI) थे, फिलहाल निलंबित हैं और रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह आवेदन न केवल संदिग्ध था बल्कि इसके बावजूद पुलिस मुख्यालय के प्रशासनिक शाखा ने इसकी अनुशंसा की और अंततः इसे स्वीकृति भी मिल गई। यह प्रक्रिया आज भी जांच एजेंसियों के लिए रहस्य बनी हुई है।

ईडी के सेक्शन 50 बयान में पांडे का नाम

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प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 22 अगस्त 2023 को दर्ज किए गए बयान में चंद्रभूषण वर्मा ने स्पष्ट रूप से विजय कुमार पांडे को उस करीबी समूह का सदस्य बताया था, जो 2021 में दुबई गया था।

वर्मा के अनुसार, पांडे के साथ भीम यादव, अर्जुन यादव और सहदेव सिंह यादव भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे। बयान में यह भी कहा गया कि ये लोग नागपुर के हवाला ऑपरेटरों से बड़ी नकदी एकत्र कर उसे कथित तौर पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाते थे।

यह बयान ईडी की पहली प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट में RUD-39 के रूप में विशेष पीएमएलए कोर्ट में दाखिल है।

सीबीआई और ईडी भी सतर्क

ताज़ा घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हेड कॉन्स्टेबल विजय पांडे के निलंबन और उसके बाद ग़ायब होने की जानकारी अब केंद्रीय एजेंसियों तक भी पहुंच चुकी है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में राज्य पुलिस के साथ समन्वय में हैं ताकि पांडे को जल्द ट्रेस कर पूछताछ की जा सके।

सूत्रों का यह भी कहना है कि पहले की जांच में कुछ अहम कड़ियां छूट गई थीं, खासकर पुलिस मुख्यालय में बैठे उन वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ नहीं हो पाई थी, जिन्होंने ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ विदेशी यात्रा को मंजूरी दी थी। यही वजह है कि ताज़ा घटनाक्रम को महादेव सट्टा कांड की अधूरी जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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