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Jaat Movie Review : जाट’ में लौटा सनी देओल का एक्शन अवतार, साउथ स्टाइल ने बढ़ाया तड़का…जानिए कैसी है फिल्म…

नई दिल्ली। जाट में सनी देओल की देसी एक्शन के साथ सिनेमा के लिए एक जबरदस्त वापसी है. फिल्म में सनी देओल अपने गुस्से वाले दमदार अवतार में नजर आते हैं और हर सीन में उनका स्वैग अलग ही लेवल का है. फिल्म में जबरदस्त डायलॉग्स, शानदार एक्शन सीक्वेंस और दमदार परफॉर्मेंस का फुल ऑन तड़का है. सनी देओल की फिल्म ‘जाट’ आखिरकार बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म के साथ सनी देओल अपने एक्शन अवतार में धमाकेदार वापसी कर रहे हैं। उनकी दमदार डायलॉगबाजी और ढाई किलो के हाथ का थप्पड़ दर्शकों को 90 के दशक की उनकी फिल्मों की याद दिला रहा है। फिल्म में कई जगह ‘घायल’, ‘घातक’ और ‘गदर’ की झलक देखने को मिलती है। तो आइए, आपको बताते हैं कि सनी देओल की फिल्म ‘जाट’ कैसी है।

जाट की कहानी
फिल्म की कहानी आंध्र प्रदेश की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहां राणा तुंगा (रणदीप हुड्डा) का आतंक फैला हुआ है। वह 40 गांवों पर अपना राज चलाता है। उसे एक ऐसा ऑफर मिलता है, जिसके चलते वह सभी गांवों को खाली करवाना चाहता है। जमीनों को अपने नाम करने के लिए वह किसी की भी जान लेने से नहीं हिचकता। सिर काटना, गोलियों से भून देना उसके लिए रोज का काम है। लेकिन एक दिन एक सिरफिरा जाट वहां पहुंचता है और राणा को उसके घर में घुसकर सबक सिखाता है। यह सब सिर्फ एक ‘सॉरी’ बुलवाने के लिए होता है।

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दरअसल, सनी देओल फिल्म में जाट के किरदार में हैं। कहानी में वह आंध्र प्रदेश के एक गांव में इडली खा रहे होते हैं। तभी एक गुंडे की वजह से उनकी इडली गिर जाती है। सनी उससे माफी मांगने को कहते हैं, लेकिन वह माफी मांगने की बजाय अपने से ऊपरवाले का नाम लेता है। इसके बाद सनी एक-एक कर सबसे ऊपर तक पहुंचते हैं और अंत में राणा तुंगा के सामने खड़े होते हैं। इस सफर में सनी का जबरदस्त एक्शन देखने को मिलता है। उनकी पुरानी फिल्मों के डायलॉग जैसे ‘उतार कर फेंक दो ये वर्दी’ से लेकर ‘ढाई किलो का हाथ’ जैसे डायलॉग्स सुनने को मिलते हैं। वहीं हैंडपंप की जगह इस बार सनी को पंखा उखाड़ते हुए भी देखा जा सकता है। राणा तुंगा गांव क्यों खाली करवाना चाहता है, जाट कौन है और कहां से आया है- ये सारे सस्पेंस फिल्म में धीरे-धीरे खुलते हैं।

कैसी है जाट?
फिल्म की कहानी सिंपल और साधारण सी है, मगर उसे जिस कंविक्शन के साथ सनी देओल पेश करते हैं आपको यकीन हो जाएगा कि ये वन मैन आर्मी है। वैसे भी आजकल एक्शन फिल्मों का दौर है, लेकिन एक्शन के नाम पर हिंसा परोसने की होड़ कब शुरू हो गई, यह हमें समझ भी नहीं आया। अजय देवगन की ‘भोला’, रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ और यश की ‘केजीएफ’ अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा’ सीरीज के बाद अब ‘जाट’ भी इस लिस्ट में शामिल हो गई है। फिल्म में हिंसा का स्तर इतना ज्यादा है कि यह आपको बेचैन कर सकता है। कहीं सिर कट रहा है, कहीं उंगलियां कट रही हैं, और हम इसे आराम से देख रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी इसे देख रहे हैं। पहले फिल्मों में हिंसा को सांकेतिक रूप से दिखाया जाता था, लेकिन अब सब कुछ साफ-साफ सामने लाया जा रहा है। कुछ सीन ब्लर किए गए हैं, लेकिन कई बिना ब्लर के इतने हिंसक हैं कि कमजोर दिल वाले दर्शक डर सकते हैं।

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सेंसरशिप और थियेटर्स का हाल
फिल्म को UA16+ रेटिंग मिली है, लेकिन थिएटर में कई छोटे बच्चे अपने माता-पिता के साथ नजर आए। उन्हें इस फिल्म की एंट्री कैसे मिली और इतनी हिंसा देखकर उन पर क्या असर पड़ा होगा, यह सोचकर ही चिंता होती है। अगर फिल्म सच्ची घटना पर आधारित होती, तो शायद इसे जायज ठहराया जा सकता था, लेकिन काल्पनिक कहानी में इतना खून-खराबा और मार-धाड़ क्यों?

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एक्टर्स की परफॉर्मेंस
बाल भी बांका ना होना ये कहावत तो आपने सुनी होगी जाट फिल्म देखकर उसका मीनिंग भी समझ आता है, फिल्म में सनी देओल खूब एक्शन करते हैं, गुंडों को मार गिराते हैं, लेकिन उनके बाल हमेशा सेट रहते हैं, एक बाल भी इधर से उधर नहीं होता है। उनकी डायलॉगबाजी पुरानी फिल्मों की तरह है, जो थोड़ी बनावटी सी लगती है। एक्टिंग की बात करें तो सनी देओल तो सनी देओल हैं अपने अंदाज से वो दर्शकों को एंटरटेन करते हैं, जब-जब वो पर्दे पर दिखते हैं लोगों को चुम्बक की तरह चिपकाए रहते हैं। उनका एक्शन देखने में आपको मजा आएगा,और इडली वाली बैक स्टोरी वो जितनी बार सुनाएंगे आपको हंसी आएगी। रणदीप हुड्डा का किरदार प्रभावशाली है, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रजेंस कम रखी गई है। उनके पास करने को ज्यादा कुछ था ही नहीं। विनीत कुमार सिंह का टैलेंट भी बर्बाद हुआ है; उनकी जगह कोई साइड एक्टर भी यह रोल कर सकता था। सैयामी खेर पुलिस के किरदार में ठीक लगी हैं। रेजिना कैसेंद्रा अपने काम से हैरान करती हैं। राम्या कृष्णन फिल्म में प्रेसीडेंट के रोल में नजर आती हैं।

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जाट का निर्देशन
यह एक मास एक्शन एंटरटेनर मूवी है, जिसमें एक्शन, कॉमेडी और दमदार डायलॉगबाजी है। फिल्म का निर्देशन तेलुगु डायरेक्टर गोपीचंद मलिनेनी ने किया है। यह उनकी पहली हिंदी फिल्म है, लेकिन इसमें साउथ का मसाला भरपूर है। सस्पेंस भरा क्लाइमेक्स और एक्शन वही है, जैसा हम साउथ की फिल्मों से उम्मीद करते हैं। हालांकि, क्लाइमेक्स में खुलने वाले सस्पेंस ज्यादा प्रभावित नहीं करते।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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