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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

डिप्टी रेंजर पिता और अर्ध कुशल श्रमिक पुत्र की भर्रासाही जुगलबंदी जांच का विषय ?? बीते दस वर्ष पूर्व से वन मंडल मनेंद्रगढ़ में चल रही पिता पुत्र की सांठ गांठ संदेहास्पद…

डिप्टी रेंजर पिता और अर्ध कुशल श्रमिक पुत्र की भर्रासाही जुगलबंदी जांच का विषय ??

बीते दस वर्ष पूर्व से वन मंडल मनेंद्रगढ़ में चल रही पिता पुत्र की सांठ गांठ संदेहास्पद…

कोरिया-एमसीबी। मनेंद्रगढ़ वन मंडल इन दिनों लूटपाट का खुला बाजार जैसा प्रतीत होने लगा है। वनों में निर्माण कार्य के नाम आबंटित बड़े-बड़े आबंटनों में कार्य से पहले कमीशन और हिस्सेदारी का बटवारा जो परदे की आड़ में चलता था। अब वो सारे आम हो चुका है। हम आरोप नही लगाते पर सूत्रों की मानें और विभाग में पदस्थ अन्य अफसर सहित पीड़ित लोगों की कहें तो वन मंडल मनेंद्रगढ़ में बह रही भ्रष्टाचार की गंगा से समूचे वन मंडल में बदहाली और बर्बादी का आलम ब्याप्त हो चुका है। अगर बात करें मनेंद्रगढ़ वन मंडल की कार्यशैली की तो विभाग और राजधानी में बैठे उच्च अफसरों पर छींटा कसी का दौर भी शुरू हो चुका है। अवगत करा दें की जो जानकारी सूत्रों से लगातार प्राप्त हो रही है उसके मद्देनजर कह सकते हैं की प्रतिस्पर्धा सी चल रही है की ज्यादा कमीशन लाओ और कुर्सी पर बने रहो, मतलब जो ज्यादा भारी कमीशन लाकर देगा वही अफसर का लाडला और दुलरुआ रहेगा और जिस तर्ज पर मनेंद्रगढ़ वन मंडल के करतूत बाज डिप्टी रेंजर दौड़- दौड़कर अपने अफसर की जी हुजूरी और आवभगत में जुटे रहते हैं और प्रतिस्पर्धा को फॉलो करते हैं।

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कैसे लोग हैं डीएफओ जैसे अफसर के खास,,

इस बात की पुष्टि हम नही करते लेकिन जो सूत्र कहते हैं उस पर नजर डालें तो कह सकते हैं की मनेंद्रगढ़ वन मंडल में बैठे डीएफओ साहब जिनको अपना खास और नजदीकी मानते हैं उनमे से एक डिप्टी रेंजर राम सागर गुप्ता भी हैं। जिनके विषय में सूत्र बताते हैं की गुप्ता साहब कई वर्षों से मनेंद्रगढ़ वन मंडल में बेरोक टोक जमे हुए हैं। इतना ही नहीं जबसे सिंगल स्टार फॉरेस्टर हुए हैं लगातार सर्किल इंचार्ज भी रहे हैं।जिसके बाद ये बात तो क्लियर हो जाती है की अपने अधिकार क्षेत्र अंतर्गत कार्य सम्पादन में भी जोरदार तजुर्बा रखते होंगे। तो अब इनके तजुर्बे की कुछ कड़ियों से आपको अवगत कराते हैं। गुप्ता साहब सिंगल स्टार में अपनी जोरदार पारी की शुरुआत अपने पुत्र के साथ मिलकर शुरू किए थे। जहां भी सर्किल इंचार्ज रहे जमकर बिल बाउचर बनाए सूत्रों से पता चला की गुप्ता साहब के बिल बाउचर के साझेदार इनके पुत्र भी रहे। कई वर्ष पिता पुत्र की जोड़ी ने करामाती खेल खेला। तत्पश्चात साहब को वन विभाग से वरदान प्राप्त हुआ और साझेदार पुत्र को मनेंद्रगढ़ वन मंडल में बतौर श्रमिक काम मिल गया। जिसके बाद गुप्ता साहब भी डबल स्टार डिप्टी रेंजर हो गए और विभाग के अंदर लेखाजोखा सहित कई दायित्यों का पुत्र भी राजदार बन गया। जिसके बाद फिर शुरू हुआ डिप्टी रेंजर गुप्ता और रेंज प्रभार का दौर। कई रेंज के प्रभारी रेंजर रहते इन्होंने बड़े बड़े निर्माण कार्य भी कराए। जिसके बाद अगर अब तक की इस पूरी विभागीय गतिविधियों में गुप्ता साहब और इनके सुपुत्र की जो भी भूमिका रही निश्चित ही जांच का विषय है।और पूरी पारदर्शिता पूर्वक इस सभी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए। पर ऐसा आभास हो रहा है की जनाब डीएफओ साहब गुप्ता के कार्यानुभव का जोरदार लाभ लेने पर जुटे हैं और खास भी तो जांच क्या खाक होगी।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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