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Viksit Bharat Scheme: तमिलनाडु के सीएम थलापति विजय ने केंद्र की योजना पर उठाए सवाल, नियमों में बदलाव के लिए पीएम मोदी को लिखा पत्र

चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नई योजना ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ के मौजूदा नियमों और वित्तीय ढांचे पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक आधिकारिक पत्र लिखकर इस योजना के मौजूदा स्वरूप को राज्य में लागू करने में असमर्थता जताई है। उनका साफ कहना है कि यदि केंद्र सरकार ने इसके नियमों और फंडिंग के तरीकों में बदलाव नहीं किया, तो तमिलनाडु सरकार पर हर साल करीब 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त और भारी-भरकम वित्तीय बोझ पड़ेगा।

60:40 के अनुपात से राज्य के खजाने पर बढ़ेगा दबाव

मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में योजना के खर्च शेयरिंग पैटर्न (फंडिंग रेशियो) को लेकर मुख्य आपत्ति उठाई है। नई व्यवस्था के तहत केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 60:40 तय किया गया है। सीएम विजय का मानना है कि इस व्यवस्था से राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों पर अत्यधिक दबाव बढ़ेगा। इसका सीधा असर ग्रामीण रोजगार के दिनों की संख्या के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है।

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सीएम विजय ने केंद्र के सामने रखे ये बड़े सुझाव

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में केवल विरोध ही दर्ज नहीं कराया, बल्कि योजना को व्यावहारिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें भी रखी हैं:

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  • प्रशासनिक खर्च: मजदूरी और प्रशासनिक मोर्चे पर होने वाले खर्च का शत-प्रतिशत (100%) भार केंद्र सरकार खुद उठाए।
  • सामग्री खर्च: परियोजनाओं में लगने वाली सामग्री (मैटेरियल) पर होने वाले खर्च को 75:25 के अनुपात में बांटा जाए, जिसमें 75% हिस्सा केंद्र और 25% राज्य वहन करे।
  • स्थानीय स्वतंत्रता: गांवों में धन आवंटन के लिए तय किए गए ‘एक समान राष्ट्रीय फॉर्मूले’ को बदला जाए। हर राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए राज्यों को अपनी स्थानीय जरूरतों के हिसाब से फंड डिस्ट्रीब्यूशन की आजादी मिले।
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राज्य की आवास योजनाओं को जोड़ने की वकालत

इसके अतिरिक्त, सीएम थलापति विजय ने कृषि क्षेत्र की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए नियमों में लचीलेपन की मांग की है, ताकि व्यस्त मौसम में मौसम के मिजाज में बदलाव होने पर किसानों और खेतिहर मजदूरों को किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राज्य सरकार की अपनी चालू आवास योजनाओं को भी इस मिशन से लिंक किया जाना चाहिए और परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए राज्य सरकारों को अधिक विकेंद्रीकृत अधिकार मिलने चाहिए। बहरहाल, तमिलनाडु सरकार के इस कड़े रुख के बाद अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इन नियमों में संशोधन करती है या नहीं।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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