जानकारी के मुताबिक धान खरीदी के दौरान रिकॉर्ड में हेराफेरी कर बड़े पैमाने पर धान गायब किया गया। विभागीय जांच में तीनों केंद्रों से कुल 4714.3 क्विंटल धान गायब पाया गया है। सहकारिता विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पूरे मामले में 1 करोड़ 46 लाख 14 हजार 330 रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आई है।
जांच के दौरान फर्जी एंट्री, स्टॉक में भारी गड़बड़ी और रिकॉर्ड में अंतर मिलने के बाद विभाग ने दस्तावेजों का मिलान कराया, जिसमें करोड़ों रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ। इसके बाद जिम्मेदार कर्मचारियों और प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नवागढ़, बिर्रा और बाराद्वार थाने में FIR दर्ज कराई गई।
मामले में बिर्रा केंद्र, कड़ारी केंद्र और किरीत केंद्र से जुड़े प्रभारी, प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर और हमालों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और गड़बड़ी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
खास बात यह है कि किरीत धान खरीदी केंद्र का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है। पूर्व में भी यहां के प्रबंधक और खरीदी प्रभारी पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया। अब इस बड़े खुलासे के बाद जिले में धान खरीदी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।