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रेयर अर्थ मेटल पर एपल की बड़ी डील, 500 मिलियन डॉलर खर्च करेगी कंपनी

ग्लोबल मार्केट में रेयर अर्थ मेटल एक बड़ा मुद्दा बन गया है. दुनिया कह तमाम बड़ी ऑटो और इलेक्ट्रोनिक्स कंपनियों के लिए एक बड़ी मुसीबत सामने खड़ी है. इसी वजह से दुनिया की तमाम बड़ी इकोनॉमी अब अपने इलाकों में ही रेयर अर्थ मेगनेट के प्रोडक्शन पर काम शुरू कर रही हैं. हाल ही में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक एपल ने एमपी मटेरियल्स के साथ रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए 500 मिलिसन डॉलर का समझौता किया है. इस समझौते से चीन द्वारा इस साल निर्यात पर अंकुश लगाने के बाद सप्लाई रिस्क कम हुआ है और यह एमपी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे उसके शेयरों में तेजी देखने को मिली है.

दोगुनी हुई शेयर की कीमत
एपल से यह समर्थन तब मिला है जब एमपी, जो अमेरिका की एकमात्र रेयर अर्थ माइन को ऑपरेट करती है, ने पिछले हफ्ते अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट के साथ अरबों डॉलर के एक समझौते पर सहमति जताई थी, जिसके तहत पेंटागन इसका सबसे बड़ा शेयर होल्डर बन जाएगा. लास वेगास बेस्ड इस कंपनी के शेयर की कीमत सरकारी डील की घोषणा के बाद से लगभग दोगुनी हो गई है. पिछले साल जब कंपनी ने एक ऑस्ट्रेलियाई प्रतिद्वंद्वी के साथ विलय पर विचार किया था, तब से कंपनी में काफी बदलाव देखने को मिला है. उससे सीईओ जिम लिटिंस्की ने रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए “बेहद निराशाजनक” मूल्य निर्धारण माहौल को देखते हुए मुनाफे में भारी गिरावट की जानकारी दी थी.

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क्या कह रहे हैं जानकार
इस डील की घोषणा मंगलवार को हुई है और इससे से एपल को दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट की निरंतर सप्लाई मिलती रहेगी. विश्लेषकों ने कहा कि एपल के लिए, अमेरिकी मेग्नेट उत्पादन को समर्थन देने की लागत, उस लॉन्गटर्म रिस्क की तुलना में ना के बराबर है, जिसके कारण वह महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स तक पूरी तरह से पहुंच खो सकता है. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ में महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा कार्यक्रम की निदेशक ग्रेसलिन बसकरन ने कहा कि हम एक ऐसे दौर में हैं जहां अधिकारी एक विश्वसनीय सप्लाई चेन के लिए अच्छी-खासी कीमत चुकाने को तैयार हैं. वे रुकावट नहीं चाहते.

अमेरिका और चीन ने सुलझाया था विवाद
चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के जवाब में अप्रैल में रेयर अर्थ मेटल्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिए थे. हालांकि अमेरिका और चीन जून में एक समझौते पर पहुंचे थे जिससे रेयर अर्थ मेटल्स से जुड़े विवाद काफ़ी हद तक सुलझ गया है, लेकिन व्यापक व्यापार तनाव नॉन-चीनी सप्लाई की मांग की ओर इशारा कर रहा है. इस समझौते के तहत, Apple 2027 में शुरू होने वाले मेग्नेट्स की सप्लाई के लिए MP को 200 मिलियन डॉलर का एडवांस पेमेंट करेगा. दोनों कंपनियों ने न तो इस डील की अवधि और न ही प्रदान किए जाने वाले मेग्नेट्स के वॉल्यूम का खुलासा किया है.

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क्यों जरूरी है एयर अर्थ मेटल्स
इस समझौते में रीसाइकिल्ड मटीरियल्स से उत्पादित मेग्नेट्स का प्रावधान है, जो Apple के माइनिंग इंडस्ट्री पर अपनी निर्भरता समाप्त करने के लॉन्गटर्म टारगेट के अनुरूप है. इनका उत्पादन एमपी के फोर्ट वर्थ, टेक्सास स्थित प्लांट में किया जाएगा, जिसमें एमपी के माउंटेन पास, कैलिफोर्निया स्थित माइनिंग कैंपस में रीसाइकिल्ड मटीरियल्स का उपयोग किया जाएगा. एपल के सीईओ टिम कुक ने एक बयान में कहा कि एडवांस तकनीक बनाने के लिए एयर अर्थ मेटल्स आवश्यक हैं, और यह साझेदारी संयुक्त राज्य अमेरिका में इन महत्वपूर्ण पदार्थों की आपूर्ति को मजबूत करने में मदद करेगी.

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एपल ने क्या कहा
मार्केट रिसर्च फर्म टेकनालिसिस रिसर्च के अध्यक्ष बॉब ओ’डॉनेल ने कहा कि एपल का यह कदम “पूरी तरह से उचित” है, क्योंकि कंपनी को अपने कंपोनेंट्स के लिए बड़ी मात्रा में रेयर अर्थ मेग्नेंट्स की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा, एक अमेरिकी सप्लायर्स पर ध्यान केंद्रित करने से वाशिंगटन में एपल की स्थिति और भी बेहतर होगी. एपल ने कहा कि यह डील अमेरिका में उसके 500 मिलियन डॉलर के चार-साल निवेश प्रतिबद्धता का हिस्सा है.

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ट्रंप से मिली थी एपल को धमकी
हाल ही में एपल को अमेरिका में आईफोन ना बनाने को लेकर ट्रंप की धमकियों का सामना करना पड़ा है. लेकिन कई विश्लेषकों का कहना है कि लेबर कॉस्ट और मौजूदा स्मार्टफोन सप्लाई को देखते हुए, अमेरिका में आईफ़ोन बनाना संभव नहीं है. एपल ने यह खुलासा नहीं किया कि वह किन उपकरणों में मेग्नेट्स का उपयोग करेगा. एमपी ने कहा कि इस डील से करोड़ों डिवाइसों के लिए मेग्नेट्स की सप्लाई होगी, जो एपल के किसी भी उत्पाद लाइन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा.

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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