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बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग की सख्ती, फरार NDPS आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायालयीन वारंटों की तामीली पर दिए कड़े निर्देश, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के एसपी की समीक्षा बैठक, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शिकायतों के समयबद्ध निराकरण पर भी जोर

जांजगीर-चांपा। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने मंगलवार को रेंज के सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों एवं पुलिस अधीक्षकों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक लेकर कानून-व्यवस्था, लंबित एनडीपीएस प्रकरण, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, न्यायालयीन समन-वारंट की तामीली तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से प्राप्त शिकायतों के निराकरण की विस्तृत समीक्षा की। बैठक का आयोजन पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय, बिलासपुर में किया गया।
आईजी रामगोपाल गर्ग ने स्पष्ट कहा कि रेंज में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक जिले के पुलिस अधीक्षक स्वयं गंभीर मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करें तथा सभी निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें।
फरार NDPS आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश
बैठक में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत लंबित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा की गई। विशेष रूप से उन मामलों पर चर्चा हुई, जिनमें धारा 173(8) सीआरपीसी/193(9) बीएनएसएस अथवा धारा 299 सीआरपीसी/335 बीएनएसएस के तहत चालान प्रस्तुत किए जा चुके हैं, लेकिन आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं हो सके हैं।
आईजी ने सभी जिलों को निर्देश दिए कि प्रत्येक फरार आरोपी के संबंध में अलग-अलग कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। जिन मामलों में आरोपी फरारी के दौरान ही चालान पेश किया जा चुका है, उनमें न्यायालय से वारंट जारी कराकर उसकी प्रभावी तामीली कराई जाए।
जारी की विस्तृत गाइडलाइन
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आईजी ने सभी पुलिस अधीक्षकों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। इनमें अन्य राज्यों एवं जिलों की पुलिस से लगातार समन्वय स्थापित करना, आरोपियों की जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को भेजना, आरोपियों के बैंक खाते, पैन कार्ड, आधार कार्ड एवं वित्तीय लेन-देन की जांच करना तथा मोबाइल और वाहनों से संबंधित तकनीकी जानकारी जुटाना शामिल है।
इसके अलावा NATGRID से प्राप्त सूचनाओं का उपयोग करते हुए विभिन्न स्थानों पर पुलिस टीमों को सक्रिय रखने तथा पहले से गिरफ्तार सह-आरोपियों से पूछताछ कर फरार आरोपियों के ठिकानों का पता लगाने के निर्देश भी दिए गए।
आईजी ने कहा कि इन मामलों की विवेचना लगातार जारी रखी जाए और प्रत्येक पुलिस अधीक्षक स्वयं इनकी निगरानी करें।
न्यायालयीन समन-वारंट की तामीली में लापरवाही पर जताई नाराजगी
बैठक में न्यायालयों द्वारा जारी समन एवं वारंट की तामीली की भी समीक्षा की गई। आईजी ने पाया कि कई गंभीर मामलों में डॉक्टरों और पुलिस अधिकारियों को जारी जमानती एवं गिरफ्तारी वारंटों की समय पर तामीली नहीं हो रही है। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी पुलिस अधीक्षकों को स्वयं पर्यवेक्षण में वारंटों की तामीली कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में गवाही की व्यवस्था को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि भविष्य में रेंज कार्यालय के माध्यम से न्यायालयीन समन या वारंट भेजे गए और उनमें लापरवाही पाई गई तो संबंधित थाना प्रभारी एवं नोडल राजपत्रित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शिकायतों के समयबद्ध निराकरण पर जोर
बैठक में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए आईजी रामगोपाल गर्ग ने निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का निर्धारित समय सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी थाना स्तर पर शिकायत समय पर नहीं सुलझाई जाती और मामला उच्च अधिकारियों के स्तर तक पहुंचता है, तो संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाए।
सराफा बाजार और पिकेट पॉइंट की नियमित जांच के निर्देश
आईजी ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सराफा बाजारों की नियमित जांच, पिकेट पॉइंट की सतत चेकिंग तथा संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगले महीने पुनः एनडीपीएस मामलों की समीक्षा की जाएगी और प्रगति का आकलन किया जाएगा।

ये अधिकारी रहे शामिल
समीक्षा बैठक में रजनेश सिंह, शशि मोहन सिंह, भोजराम पटेल, सिद्धार्थ तिवारी, विजय कुमार पाण्डेय, प्रफुल्ल ठाकुर, अविनाश मिश्रा, निमीषा पाण्डेय सहित रेंज के सभी जिलों के एएनटीएफ प्रभारी, समन-वारंट शाखा एवं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शाखा के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।



