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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

का-कहिबे: पुलिस के छवि सुधारे बर ईमानदारी जरूरी है!

का-कहिबे: पुलिस के छवि सुधारे बर ईमानदारी जरूरी है!

कहिथें न ‘एकठिन नानकीन दिया ह कुलुप अंधियार म अंजोर बगरा देथे।’नइते, भरस्टाचार, धोखाधड़ी, लूट अउ बेईमानी के दौर म कोनो ह 45 लाख रुपिया
ल लहुटाय के नइ सोचतीस। चरित्रवान अउ नैतिकवान मनखेच ह समाज बर `दिया` बनथे। समाज ल सच्चाई के रद्दा देखाथे। सत, ईमान ल अपनाय के प्रेरना देथे।

एक कोती पुलिस के काम करे के रंग-ढंग ल लेके सुवाल उठत रहिथे त दूसर कोती पुलिस बल म अनुसासनहीनता घलो दिखाई देथे। हद तो ए हावय के दूसरमन ल अनुसासन म रहे के पाठ पढ़इया पुलिस ह खुदे अनुसासनहीनता बरतथे। कानून के रखवारेचमन कानून तोड़त नजर आथें।

मितान! ‘सच्चाई छुप नहीं सकती, बनावट के उसूलो से, की खुशबू आ नहीं सकती, कभी कागज के फूलों से।’ ईमानदारी एक सामाजिक करतव्य हे। वोकर बुनियाद सद्चरित हे। ईमानदारी, सच्चाई अउ करतव्य ल निभई ह आज के लालच, सुवारथ, बेईमानी अउ चरितहीनता के समे म एकदमेच जरूरी हे।

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सिरतोन! एक पतई रायपुर म टरेफीक पुलिस के एकझन सिपाही ह लावारिस मिले 45 लाख रुपिया ल थाना म जमा करा दे रहिस हे। ऐहा ईमानदारी अउ करव्यपरायनता के मिसाल आय। अइसन ईमानदार अउ अपन करतव्य निभइया पुलिसकरमी के जतके बढ़ई करे जाए कम हे। ए सिपाही के अइसन काम बर सबो ईमानदार मनखे इही कइही-साबास! जवान, पुलिस के छवि ल साफ करे बर, लोगनमन ईमानदारी बर जगाय बर।

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मितान! कहिथें न ‘एकठिन नानकीन दिया ह कुलुप अंधियार म अंजोर बगरा देथे।’ नइते, भरस्टाचार, धोखाधड़ी, लूट अउ बेईमानी के दौर म कोनो ह 45 लाख रुपिया ल लहूटाय के नइ सोचतीस। चरित्रवान अउ नैतिकता मनखेच ह समाज बर ‘दिया’ बनथे। समाज ल सच्चाई के रद्दा देखाते। सत, ईमान ल अपनाय के प्रेरना देथे।

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सिरतोन! ‘हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्ता क्या होगा।’ पुलिस परसासन म व्याप्त भरस्टाचार, बेईमानी अउ करतव्यहीनता के चलत पुलिसवालेमन के छवि कुछ आइसनेच बन गे हे। पुलिस के काम करे ढंग ल लेके अंगरी उठत रहिथे। पुलिस बिभाग ऊपर भरस्टाचार, वसूली, दुरव्यवहार अउ मारपीट करे के आरोप लगई ह तो सधारन बात होगे हे। जनता पूछथे- का पुलिस आइसने होथे?

मितान! एक कोती पुलिस के काम करे के रंग-ढंग ल लेके सुवाल उठत रहिथे त दूसर कोती पुलिस बल म अनुसासनहीनता घलो दिखई देथे। हद तो ए हावय के दूसरमन ल अनुसासन म रहे के पाठ पढ़इया पुलिस ह खुदे अनुसासनहीनता बरतथे।

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अजी! कानून के रखवारेचमन कानून तोड़त नजर आथे। कतकोन पइत तो गुंडा-बदमास अउ पुलिसवालेमन के बेवहार म कुछु फरक तको नजर नइ आवय। कुछ पुलिसवालेमन के करतव्यहीनता बरते के भुगतना आखिरकार समाज अउ देस ल भुगते बर परथे। अइसन म टरेफिक सिपाही के ईमानदारी ह भरस्ट, बेईमान, लालची, सुवारथी पुलिसवाले बर ‘मिसाल’ आय। पुलिस के काम सिरिफ कानून बेवस्था बनाए रखेभर के नोहय, बल्किन वोकर काम के ढंग अउ ड्यूटी म पारदरसिता, सतरकता अउ ईमानदारी घलो होय बर चाही। तभे, पुलिस के ‘साधुनाम परित्रानाय’ के छवि रइही अउ अपराध ह घलो कमतियाही, फेर अइसन होवत नइ दिखत हे, त अउ का-कहिबे।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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