Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-03).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-02).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-01).jpg
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

SIR को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा…

नई दिल्ली,02 दिसंबर। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है।

इस हलफनामे में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण बड़े पैमाने पर मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने के आरोप बेहद बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं। आयोग ने कहा है कि निहित राजनीतिक हितों को साधने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

सांसद डोला सेन ने 24 जून और 27 अक्टूबर 2025 को जारी एसआईआर आदेशों की वैधता को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की है।

See also  ‘‘बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा का पुण्य दे रही है सरकार, रामलला का दर्शन सौभाग्य की बात‘‘...

इसके जवाब में आयोग की तरफ से दायर एक जवाबी हलफनामे में आयोग ने जोर देकर कहा कि यह प्रक्रिया संवैधानिक रूप से अनिवार्य, सुस्थापित और नियमित रूप से संचालित की जाती है

चुनाव आयोग का तर्क

Advertisment

चुनाव आयोग का तर्क है कि मतदाता सूचियों की शुद्धता और अखंडता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक है, जिसे टीएन शेषन, सीईसी बनाम भारत सरकार (1995) मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान्यता प्राप्त है।

आयोग ने जोर देकर कहा कि एसआईआर संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 15, 21 और 23 पर आधारित है, जो चुनाव आयोग को आवश्यकता पड़ने पर मतदाता सूचियों में विशेष संशोधन करने का अधिकार देता है।

See also  इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता! बातचीत कई मुद्दों पर अटकी, भरोसे का संकट बरकरार

क्यों जरूरी है SIR?

हलफनामे में कहा गया है कि 1950 के दशक से इसी तरह के संशोधन समय-समय पर किए जाते रहे हैं, जिनमें 1962-66, 1983-87, 1992, 1993, 2002 और 2004 जैसे वर्षों में देशव्यापी संशोधन शामिल हैं।

पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और मतदाताओं की बढ़ती गतिशीलता का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में नाम जोड़ना और हटाना एक नियमित चलन बन गया है, जिससे दोहराई गई और गलत प्रविष्टियों का जोखिम बढ़ रहा है।

आयोग ने कहा है कि इन चिंताओं और देश भर के राजनीतिक दलों की लगातार शिकायतों के कारण, अखिल भारतीय स्तर पर विशेष गहन पुनरीक्षण का निर्णय लिया गया।

See also  बाबा की बारात का आमंत्रण कार्ड राज्यपाल को देने राजभवन रायपुर पहुंचे दया सिंह...

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!