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महिलाओं को अधिकारों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता – ममता…

जांजगीर-चांपा। महिलाएं सभी क्षेत्रों में पुरुषों से मुकाबला तो कर रही है ,लेकिन अब तक महिलाओं को बराबरी का हक नही मिल सका है। महिलाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही है बावजूद महिलाएं अपनी क्षमता के अनुसार अधिकार प्राप्त नही कर पाई है। ये कहना है शासकीय प्राथमिक शाला सोंठी की शिक्षिका ममता जायसवाल का। उनका मानना है कि लड़कियों व महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग होकर मानसिक रूप से भी सशक्त होना होगा ताकि वह अपने लक्ष्य तक पहुँच सके। मानसिक रूप से सशक्त नारी ही अपने अधिकारों को समुचित उपयोग कर देश व समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पूरी तरह से निर्वहन कर सकती है। नारी सशक्तिकरण को पूरी तरह से बढ़ावा देने के लिए महिलाओं के लिए बनाए गए कानूनों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। सरकार ने महिलाओं को सशक्त व सुरक्षित बनाने के लिए कानून तो कई बना दिये लेकिन उन्हें सख्ती से लागू नही किया जा रहा है। इससे उनका दुरुपयोग बढ़ रहा है। नारी सशक्तिकरण के कानूनों को सख्ती से लागू करना होगा तभी महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके। समाज मे महिलाओं के विधिक अधिकार, नारी सशक्तिकरण एवं महिला सुरक्षा के लिए हम सभी को आगे आना होगा। महिलाओं की सामाजिक आर्थिक स्थिति के आधार पर महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना होगा ताकि वह अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग होकर निडरता के साथ अपनी प्रगति कर सके। सामूहिक प्रयासों से ही महिलाओं को सम्माननीय दर्जा व उनके अधिकारों की प्राप्ति हो सकेगी।



