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क्या सच में बंद हो जाएगा Vodafone-Idea, सरकार की सारी कोशिशें हो जाएंगी नाकाम

नई दिल्ली : देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शुमार वोडाफोन आइडिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. कंपनी लगातार डूबती जा रही है. वैसे सरकार और कंपनी के अधिकारी दोनों टेलीकॉम जाएंट को बचाने की कोशिश में जुटे हैं. लेकिन सभी कोशिश नाकाम होती नजर आ रही हैं. ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार वोडाफोन आइडिया (Vi) के लिए एक राहत पैकेज तैयार कर रही है, लेकिन जब तक इसके लंबित स्पेक्ट्रम यूजेस चार्ज माफ नहीं किए जाते, तब तक कंपनी के बने रहने की संभावना ना के बराबर दिखाई दे रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बकाया राशि को इक्विटी में बदलने की कोई योजना नहीं है, क्योंकि इससे वो​डाफोन आइडिया में सरकार की हिस्सेदारी मौजूदा 49 फीसदी हो जाएगी. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सरकार की ओर से किस तरह के राहत पैकेज का प्लान कर रही है.

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सरकार का नया फॉर्मूला
एक विचार यह है कि वोडाफोन आइडिया को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तय की गई छह साल की अवधि के बजाय 20 साल में अपने एजीआर बकाया को चुकाने दिया जाए. रिपोर्ट के हवाले से एक अधिकारी ने कहा कि AGR भुगतान की अवधि को 18,064 करोड़ रुपए की निर्धारित छह सालाना किस्तों से बढ़ाकर 20 साल से अधिक किया जाना चाहिए. उसके बाद भी कंपनी की लॉन्गटर्म स्टेबिलिटी पर शंका बनी हुई है. टेलीकॉम डिपार्टमेंट के मॉडल से पता चलता है कि अगर Vi को वित्त वर्ष 26 के अंत तक पूरे 18,064 करोड़ का भुगतान करना पड़ता है, तो वित्त वर्ष 27 का बिल आने से पहले ही उसके पास कैश खत्म हो जाएगा.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर 20 साल की टाइमलाइन से प्रत्येक वार्षिक किस्त को 6,000 करोड़-8,500 करोड़ तक घटा दिया जाए, तो भी अधिकारियों को डर है कि वित्त वर्ष 29 से आगे यह संख्या नहीं बढ़ेगी. सबसे खराब स्थिति में, भुगतान अवधि 50-100 साल तक हो सकती है. मार्च के अंत तक कंपनी के पास कैश और बैंक बैलेंस 9,930 करोड़ रुपए देखने को मिला था. वीआई के अनुरोध के बाद, सरकार ने मार्च में स्पेक्ट्रम बकाया के 36,950 करोड़ रुपए को इक्विटी में बदल दिया, जिससे वह 48.99 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक बन गई. ये बकाया 2021 से पहले की स्पेक्ट्रम नीलामी से संबंधित था.

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क्या कहते हैं जानकार?
रिपोर्ट में एक तीसरे अधिकारी ने कहा​ कि कंपनी ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट के साथ विभिन्न बैठकों के दौरान स्पेक्ट्रम और एजीआर भुगतान के बाद के शेड्यूल्ड पेमेंट प्रोग्राम को पूरा करने में अपनी असमर्थता दिखाई थी. सरकार द्वारा बकाया राशि के हिस्से को इक्विटी में बदलने से पहले वीआई का वित्त वर्ष 2026 के लिए अनुमानित भुगतान 30,500 करोड़ रुपए से अधिक था. टेलीकॉम सेक्टर पर नजर रखने वाले एक विश्लेषक ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि कंपनी चालू वित्त वर्ष में देनदारियों को पूरा कर सकती है, लेकिन वित्त वर्ष 27 से यह तब तक संभव नहीं होगा, जब तक कि वह बैंकों और वित्तीय संस्थानों से 25,000 करोड़ रुपए से अधिक के लोन का प्रबंधन नहीं कर लेती. ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने मीडिया रिपोर्ट में आगाह किया है कि एजीआर बकाया पर राहत न मिलने और कर्ज के जरिए फंड जुटाने के कंपनी के प्रयासों में कोई सफलता न मिलने के कारण वीआई को सालाना 20,000 करोड़ रुपए की नकदी की कमी का सामना करना पड़ सकता है.

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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