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क्यों इतना खतरनाक है इम्पर्सोनेशन स्कैम, दोस्त बनकर खाली कर रहा बैंक अकाउंट!

आजकल इम्पर्सोनेशन स्कैम का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और लोग इसी विश्वास जाल में फंसकर अपना पैसा गंवा रहे हैं. साइबर ठग पहले आपकी पहचान चुराते हैं और फिर खुद को आपका दोस्त या रिश्तेदार बनाकर बात करते हैं. उनका मकसद आपको भरोसे में लेकर आपसे पैसे, OTP, पासवर्ड या संवेदनशील जानकारी निकलवाना होता है. चलिए जानते हैं यह स्कैम कैसे फैल रहा है और इससे कैसे सुरक्षित रह सकते हैं.

क्या है यह नया इम्पर्सोनेशन स्कैम?
इस ठगी में अपराधी किसी परिचित का नाम, प्रोफाइल फोटो, मोबाइल नंबर या सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान चुराता है. फिर वह खुद को वही दोस्त या रिश्तेदार बताकर आपसे संपर्क करता है. भरोसा बनाने के बाद वह आपसे किसी जरूरी मदद के बहाने पैसे, बैंक की जानकारी या OTP मांगता है. यही साइबर क्राइम अब सबसे तेज फैल रहा है क्योंकि लोग अपने परिचितों पर तुरंत यकीन कर लेते हैं.

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ठगी कैसे की जाती है?
ठग पहले सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म से आपके परिचित की जानकारियां इकट्ठा करता है. वह फोटो, नाम, मोबाइल नंबर और चैट स्टाइल तक कॉपी करता है. फिर आपको कॉल या मैसेज भेजकर कहता है कि वह मुसीबत में है और तुरंत मदद चाहिए. ऐसी स्थिति में लोग भावनाओं में बहकर पैसे ट्रांसफर कर देते हैं. कई मामलों में ठग OTP, बैंक डिटेल, UPI PIN पूछकर अकाउंट खाली कर देते हैं.

बचाव के लिए क्या करें?
सावधानी और वेरिफिकेशन ही सबसे बड़ा हथियार है. अगर कोई परिचित की पहचान लेकर आपसे बात करे, तो पहले उनकी असली पहचान की पुष्टि करें. उनकी आवाज में बात करके वेरिफाई करना बेहतर है. OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी को भी न दें, चाहे वह कितना ही जानकार क्यों न लगे. सोशल मीडिया प्राइवेसी सेटिंग्स हमेशा सुरक्षित रखें और अनजान मैसेज या लिंक पर क्लिक करने से बचें.

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साइब
यदि आप इस तरह के स्कैम का शिकार हुए हैं या किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलती है, तो तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन को सूचित करें. ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए cybercrime.gov.in पोर्टल उपलब्ध है, जहां पीड़ित सीधे रिपोर्ट कर सकता है. इसके अलावा 1930 पर भी कॉल करके शिकायत की जा सकती है. शुरुआती रिपोर्टिंग से रकम ट्रेस होने की संभावना बढ़ जाती है और आगे की ठगी रोकी जा सकती है.

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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