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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

प्लांटेशन के 45 × 45 के गड्ढों की मजदूरी दर 17.49 पर मजदूरों को सिर्फ 10 रुपए, कारनामे बाज रेंजर की करतूत पर डीएफओ मनेंद्रगढ़ की चुप्पी आपसी मिलीभगत तो नही…

मनेंद्रगढ़। एक तो मंहगाई की मार जहां माध्यम वर्ग से लेकर दिहाड़ी मजदूरों का जीना मुश्किल हो चुका है और परिवार पालने के लिए रात दिन जद्दोजहद करनी पड़ रही है। जानकर आश्चर्य होगा की जहां एक तरफ केंद्र सरकार और राज्य सरकारें विभिन्न प्रकार की योजनाओं के माध्यम से दिहाड़ी मजदूरों को अच्छे मजदूरी दर पर इसलिए रोजगार उपलब्ध करा रही है ताकि दिहाड़ी मजदूर आसानी से अपनी जीविका चला सकें परंतु वहीं दूसरी तरफ वन विभाग के करतूत बाज गरीबों के अमानत पर खयानत का एक मौका नहीं छोड़ रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार मनेंद्रगढ़ वन मंडल के वन परिक्षेत्र मनेंद्रगढ़ में पदस्थ रेंजर के इशारों पर गरीबों के मजदूरी में डांका डालने का कृत्य किया जा रहा है। मामला मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र के रतौरा सर्किल अंतर्गत लोहारी का है जहां पर कक्ष क्रमांक 748 में कैंपा मद से बड़े पैमाने पर प्लांटेशन कराया जाना है जिसके लिए चिन्हित रकबे में प्लांटेशन हेतु मजदूरों से गड्ढा खोदवाया गया है जो गड्ढा 45 × 45 के आयत का है। और कैम्पा में इस गड्ढे के खोदाई का दर प्रति गड्ढा 17 रुपए से अधिक है परंतु उक्त प्लांटेशन हेतु मजदूरों द्वारा खोदे गए 45 × 45 गड्ढों का मजदूरी प्रति गड्ढा मात्र 10 रुपए ही देना निर्धारित किया गया है जिस शर्त पर मजदूरों से कार्य कराया गया है। स्थानीय मजदूरों ने यह भी बताया की मजदूर अगर इसका विरोध करेंगे तो उन्हे काम न देकर दूसरे गांव के मजदूरों से कार्य कराया जायेगा जिस डर से गरीब दिहाड़ी मजदूर वन विभाग के करतूत बाजों की तानाशाही झेलने को मजबूर हैं। सूत्रों की माने तो एक वर्ष पूर्व भी लोहारी के मजदूर निर्धारित दर से कम मजदूरी देने का विरोध किए थे तो उन्हें इस वर्ष कोई मजदूरी कार्य नहीं दिया गया बल्कि दूर दूसरे गांव के मजदूरों से कार्य कराया गया जिससे ग्रामीण मजदूरों में वन विभाग के लोगों के प्रति जमकर रोष भी व्याप्त है।

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रेंजर मनेंद्रगढ़ के निठल्लेपन और करतूत पर डीएफओ मौन,, जांच और कार्यवाई शून्य

मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र अंतर्गत जंगलों में अतिक्रमण साथ ही सागौन की बड़े पैमाने पर कटाई जैसी लापरवाही की जांच मुख्य वन संरक्षक सरगुजा वन वृत को करनी पड़ी और डीएफओ मनेंद्रगढ़ चुप्पी साधे बैठे रहे जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है की डीएफओ मनेंद्रगढ़ गंभीर मामलों में भी अपने रेंजर या दोषी अधिनस्थ लोगों पर कार्रवाई करेंगे भी या नहीं संदेह बरकरार है। बहरहाल मजदूरी की राशि में अफरा तफरी और मजदूरों के शोषण की शिकायत बड़े अफसरों तक तलब की जा चुकी है अब देखना ये है की अफसरशाही तंत्र मजदूरों के अधिकार के प्रति कितना सजग और कर्तव्य निष्ट है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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