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छत्तीसगढ़ की औद्योगिक प्रगति और निरंतर समृद्धि का प्रतीक वेदांता

वेदांता यानी एक वृहद औद्योगिक यात्रा। यह एक ऐसा नाम है जिसने देश की औद्योगिक प्रगति को नए मायने दिए हैं। वेदांता समूह के चेयरमैन श्री अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में इस समूह ने एल्यूमिनियम, ज़िक, लेड, सिल्वर, ऑयल एंड गैस, निकल, कॉपर, स्टील, फेरो क्रोम, ग्लास सब्सट्रेट, ऊर्जा उत्पादन आदि विभिन्न क्षेत्रों में पूरी दुनिया में कीर्तिमान बनाए हैं। वेदांता की कहानी दरअसल विकसित भारत का आइना है जहां उद्यम सर्वोपरि है। श्री अग्रवाल कहते हैं कि ‘‘ ठान लो तो सब कुछ पाना संभव है। वेदांता समूह के लिए समुदाय का स्थान व्यवसाय से ऊपर है। मेरी दृष्टि में हमारी समस्त उपलब्धियां सामान्य ही हैं। मैं अपने स्तर पर वही श्रेष्ठ कार्य करने के लिए प्रयत्नशील हूं जैसा कि दूसरे व्यक्ति अपने स्तरों पर कर रहे हैं। समाज को समृद्ध बनाना हमारा नैतिक दायित्व है। उद्योगों के जरिए हम जो कुछ अर्जित कर रहे हैं उसका अंश समाज की भलाई में उपयोग होना चाहिए। हमने जो विशाल उद्योग खड़ा किया है उसके हम संरक्षक मात्र हैं। सही मायने में उद्योगों पर अधिकार उसमें काम कर रहे कर्मचारियों का है। ’’ श्री अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में दुनियाभर में लगभग एक लाख से अधिक कर्मचारी प्रगति के नित नए कीर्तिमान बना रहे हैं।

वेदांता समूह ने देश के जिन राज्यों के औद्योगिक विकास में निवेश किए हैं उनमें छत्तीसगढ़ का विशिष्ट स्थान है। छत्तीसगढ़ में भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ऐसा पहला उद्योग है जहां वेदांता समूह ने वृहद पैमाने पर निवेश किए। वेदांता लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ में सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई में 1200 मेगावॉट के विद्युत संयंत्र का अधिग्रहण किया है। अधिग्रहण से पूर्व यह संयंत्र एथेना छत्तीसगढ़ पावर लिमिटेड के नाम से जाना जाता था जिसे अब वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ पावर प्लांट (व्हीएलसीटीपीपी) के नाम से जाना जाता है। वेदांता का एक और महत्वपूर्ण निवेश है बालको मेडिकल सेंटर। यह मध्यभारत का सबसे बड़ा कैंसर उपचार केंद्र हैं। इन निवेशों के माध्यम से वेदांता ने यह दिखाया है कि एक उद्योग के जरिए देश का उज्ज्वल भविष्य कैसे तैयार होता है। छत्तीसगढ़ में वेदांता के निवेश पर एक नजर:

देश की शान वेदांता प्रचालित बालको

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तत्कालीन मध्यप्रदेश में 27 नवंबर, 1965 को स्थापित बालको वर्तमान छत्तीसगढ़ प्रदेश की एकमात्र एल्यूमिनियम उत्पादक इकाई है। वर्ष 2001 से बालको का संचालन वेदांता समूह द्वारा किया जा रहा है। देश का लगभग 15 प्रतिशत एल्यूमिनियम बालको में ही तैयार होता है। वर्ष 2001 के बाद 1,00,000 टन क्षमता के स्मेल्टर को साढ़े तीन गुना अधिक करने और बिजली उत्पादन क्षमता को 270 मेगावॉट से 810 मेगाावॉट करने की शुरूआत हुई। रिकॉर्ड समय में 2.50 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता का नया स्मेल्टर और 540 मेगावॉट का विद्युत संयंत्र अस्तित्व में आया। बाद के वर्षों में 3.25 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता के नए स्मेल्टर और 1200 मेगावॉट के विद्युत संयंत्र ने भी मुकम्मल रूप ले लिया। बालको द्वारा क्षमता विस्तार के तहत वर्तमान संयंत्र परिसर में एल्यूमिनियम स्मेल्टर क्षमता 5.75 एलटीपीए से 10.10 एलटीपीए करने हेतु परियोजना कार्य सफलतापूर्वक जारी है। इन परियोजनाओं की शुरूआत से लेकर इसके प्रचालन में आने तक हजारों हाथों ने रोजगार पाए। कोरबा और बालको के व्यवसायियों की आमदनी कई गुना बढ़ गई। बालको ने पिछले एक दशक में ही छत्तीसगढ़ राज्य और केंद्र के राजस्व में लगभग 29000 करोड़ रुपए का योगदान दिया। बालको, अपने उत्पादन का 90 प्रतिशत एल्यूमिनियम घरेलू बाजार में ही विक्रय करता है।

अपनी औद्योगिक यात्रा के दौरान बालको ने देश की सामान्य जरूरतों के लिए धातु की आपूर्ति तो सुनिश्चित की ही, वैज्ञानिक एवं रणनीतिक महत्व की परियोजनाओं में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थित दर्ज कराई। देश में निर्मित लंबी दूरी की अनेक मिसाइलों में बालको के एल्यूमिनियम का प्रयोग हुआ तो अंतरिक्ष संबंधी उपकरणों में बालको की कारीगरी मिसाल बनी।

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बालको और चहुंमुखी विकास

बालको की तरक्की और प्रचालन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की समृद्धि एक-दूसरे का पर्याय बन चुके हैं। सामुदायिक विकास के दायरे में 4 गांव से 123 गांव शामिल हो गए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, आधारभूत संरचना विकास आदि पर निवेश लगभग 470 करोड़ रुपए के आंकड़े तक पहुंच गया है। सामुदायिक विकास परियोजनाओं से लाभान्वित होने वाले नागरिकों की संख्या 2 लाख के आसपास पहुंच गई है। पिछले कई बरसों में बालको एक ऐसी कंपनी बन कर उभरी है जो न सिर्फ तकनीकी प्रगति और संबद्ध नागरिकों के विकास का ख्याल रखती है बल्कि पौधारोपण और नई-नई तकनीकों की स्थापना के जरिए पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान कर रही है।

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बालको ने शिक्षा के उन्नयन को सदैव ही सर्वोपरि रखा। बालको टाउनशिप लगभग 15 स्कूल हैं जिनके संचालन में बालको प्रबंधन मदद करता है। केंद्रीय और राज्य हायर सेकेंडरी बोर्ड के स्कूलों में बालको अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेका कामगारों, आसपास स्थित क्षेत्रों के नागरिकों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा दी जाती है। सकारात्मक सामाजिक बदलाव में स्कूलों का बड़ा योगदान है। 5000 से अधिक छात्र-छात्राएं बालको की मदद से संचालित स्कूलों से लाभान्वित हो रहे हैं। बालकोनगर स्थित स्कूलों में शिक्षित बच्चे आज न सिर्फ देश में बल्कि दुनियाभर के महत्वपूर्ण संगठनों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

वेदांता के निवेश से छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्षेत्र समृद्ध

वेदांता लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ में सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई में 1200 मेगावॉट के विद्युत संयंत्र का अधिग्रहण किया है। अधिग्रहण से पूर्व यह संयंत्र एथेना छत्तीसगढ़ पावर लिमिटेड के नाम से जाना जाता था जिसे अब वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ पावर प्लांट (व्हीएलसीटीपीपी) के नाम से जाना जाता है। वेदांता द्वारा अधिग्रहण से पूर्व इस विद्युत संयंत्र का निर्माण वर्ष 2016 से ही बंद था। वर्ष 2022 में अधिग्रहण के बाद वेदांता लिमिटेड ने विद्युत संयंत्र के निर्माण कार्य को पुनर्जीवित करने का काम शुरू किया। 1200 मेगावॉट के विद्युत संयंत्र में 600 मेगावॉट की दो इकाइयां हैं। इस परियोजना से जहां बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ की स्थानीय प्रतिभाओं को हुनर दिखाने का अवसर मिला है वहीं अप्रत्यक्ष रोजगार के जरिए लोगों की आर्थिक स्थित मजबूत हो रही है।

प्रगति की ओर सिंघीतराई

व्हीएलसीटीपीपी प्रबंधन स्थानीय नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। ग्राम पंचायत सिंघीतराई, ओड़ेकेरा और निमोही के नागरिकों के लिए सामुदायिक विकास के कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं जिसे स्थानीय जरूरतों के मुताबिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, आधारभूत संरचना विकास संबंधी अनेक योजनाएं स्थानीय जन प्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में तैयार कर उन्हें निरंतर प्रक्रिया के तहत ग्रामीण विकास हेतु लागू किया जा रहा है। ‘परियोजना आरोग्य’ के अंतर्गत कंपनी द्वारा ग्राम सिंघीतराई, निमोही एवं ओड़ेकेरा में प्रतिदिन हेल्थ वैन के जरिए कैंप आयोजित किए जाते हैं जिनसे अब तक लगभग 2000 नागरिक लाभान्वित हुए हैं। समय-समय पर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीणों को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया जा रहा है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रीष्मकाल के दौरान भूजल स्तर कम होने पर उन्हें वाटर टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जाती है। ग्राम पंचायतों में स्कूलों की आधारभूत संरचना को अधिक सुविधापूर्ण बनाए जाने की दिशा में ग्राम के जन प्रतिनिधियों के साथ मिलकर योजना तैयार की गई है। युवाओं के स्वावलंबन हेतु समय-समय पर कौशल विकास जागरूकता शिविर आयोजित किए जाते हैं। शिविरों के माध्यम से अनेक युवाओं को कोरबा स्थित बालको के स्किल स्कूल के माध्यम से प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबी बनाए जाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। स्कूल के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें बैग एवं स्टेशनरी किट प्रदान किए जाते हैं। महिलाओं की प्रगति के लिए स्व सहायता समूहों के गठन को प्रोत्साहित किया गया है। इनके माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं की आजीविका के लिए विभिन्न प्रशिक्षण देने का प्रावधान है।

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वेदांता के बालको मेडिकल सेंटर के जरिए कैंसर की अत्याधुनिक चिकित्सा

छत्तीसगढ़ में वेदांता का सबसे महत्वपूर्ण निवेश बालको मेडिकल सेंटर के तौर पर देखा जाता है। बालको मेडिकल सेंटर, नया रायपुर, छत्तीसगढ़ में स्थित 170-बेड का तृतीयक कैंसर अस्पताल है और वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन (व्हीएमआरएफ) की प्रमुख पहल है। वेदांता रिसोर्सेज और भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) द्वारा एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में स्थापित, बीएमसी मेडिकल, सर्जिकल, रेडिएशन, हीमैटोलॉजी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और पेलिएटिव केयर सहित व्यापक कैंसर उपचार सेवाएं प्रदान करता है। अब तक बीएमसी 66,000 से अधिक मरीजों का इलाज कर चुका है और 4.20 लाख से अधिक ओपीडी विजिट दर्ज कर चुका है, जो छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के मरीजों की सेवा कर रहा है।

यह मध्य भारत का पहला निजी अस्पताल है जहां दा विंची एक्सआई रोबोटिक सर्जरी सिस्टम स्थापित है। यह रोबोटिक-सहायता प्राप्त सर्जिकल सिस्टम है, जो सर्जनों को

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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