छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा
तत्कालीन पंचायत सचिव भागवत साहू पर लाखों रुपये घोटाला करने का आरोप, 14 वे वित्त राशि का दुरूपयोग पर ग्रामीण बेखबर थे सचिव हुए मालामाल, जनपद पंचायत मालखरौदा अंर्तगत ग्राम पंचायत अचरितपाली का मामला…

सक्ति-मालखरौदा। त्रिस्तरीय पंचायत और पंचायती राज अधिनियम लागू होने के बाद ग्राम पंचायत के सचिव भागवत साहू ने अपने आप को मानो वित्त मंत्री समझ लिया है और सरपंच से सांठगांठ कर 14 वें वित्त की राशि का जी भर कर दुरुपयोग किये हैं। फर्जी बिल बनवा कर बगैर काम के राशि आहरण कर सरकार को चुना लगाने से बाज नहीं आ रहे। ग्राम पंचायतों को केंद्र सरकार से प्राप्त होने वाले 14 वित्त की राशि से पंचायत के सचिव भागवत साहू और सरपंच भी मालामाल हो रहे हैं। सरपंच के साथ सांठगांठ कर पंचायत सचिव द्वारा 14 वें वित्त मद की राशि का आहरण कर ऐसे कार्यों में खर्च होना और बिल भी सबमिट कर देना बता रहे है जिसका कोई काम ही नहीं हुआ है। पूरे जिले में ऐसे अनेक पंचायत सचिव और सरपंच हैं और फर्जी बिल लगाकर राशि आहरण कर लिया है।
ग्राम पंचायत के 14 वें वित्त के बैंक खाते से राशि 180000 रुपए एजेंसी को भुगतान बता कर फर्जी रूप से राशि का आहरण कर लिया। तत्कालीन सचिव भागवत साहू को इस कृत्य के लिए जांच कर निलंबित किये जाने की जरूरत है। ग्रामीणों ने बताया कि तत्कालीन सचिव के द्वारा 14 वें वित्त आयोग की राशि का फर्जी बिल वाउचर के माध्यम से अभिलेखों में व्यय दर्शा कर राशि निकाल लिया गया है। गिट्टी रेत एवं सीमेंट का और अन्य समान क्रय 56050 हजार रुपए, गौठान में पंप हाऊस ईट क्रय 25600 हजार रुपए, पँचायत कार्यालय में बिजली फिटिंग 8 हजार 300 सौ रुपए, पँचायत कार्यालय का पोताई समान के लिए 18 हजार 200 रुपए, गौठान में पंप हाऊस की मजदूरी भुगतान 33000 हजार रुपए, पँचायत कार्यालय हेतु दरवाजा खिड़की हेतु पेंट क्रय 6 हजार तीन सौ रुपए, पँचायत कार्यालय में पंखा फिटिंग 7 हजार 200 सौ रुपए, पँचायत कार्यालय में लिखाई का भुगतान 4 हजार 500 रुपए, हेंड पंप एवं पाइप लाइन का समान क्रय 10480 हजार रुपए, कोरोना कोविड की समाग्री 10370 रुपए का कुल 1 लाख 80 हजार रुपए का देयक तैयार करा कर बिना कार्य किए राशि का भुगतान कर बैंक खाते से बिना कार्य के भुगतान बता कर 14वें वित्त योजना से राशि का आहरण कर लिया है और इसी का रोकड़ पंजी में वह दर्ज है मगर देयक ग्राम पंचायत में उपलब्ध नहीं है और ना ही सामग्री उपलब्ध है। अगर वास्तविक में कार्य हुआ है तो भौतिक सत्यापन किया जाय और तत्कालीन सचिव पर निलंबित की कार्यवाही किये जाने की जरूरत है।



