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पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो की वापसी, टीकाकरण अभियान ठप होने से बढ़ा खतरा…

पोलियो उन्मूलन के वैश्विक प्रयासों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो के मामलों में फिर से वृद्धि हो रही है। 2023 में जहां केवल छह मामलों के साथ इस बीमारी के उन्मूलन के करीब पहुंचने की उम्मीद थी, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 73 मामलों तक पहुंच गया।

यह स्थिति स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। अफगानिस्तान के हालात बने संक्रमण का कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, अफगानिस्तान में पिछले छह महीनों में निमोनिया, डेंगू और खसरे जैसी बीमारियों में भी बढ़ोतरी हुई है। इस बीच, प्रसिद्ध बाल टीकाकरण विशेषज्ञ ज़ुल्फिकार भुट्टा का कहना है कि पाकिस्तान में फैल रहे पोलियो वायरस के सभी आनुवंशिक स्ट्रेन अफगानिस्तान से आए हैं।

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भुट्टा ने कहा, “यह वायरस खत्म होना नहीं चाहता। इसे एक मौका दें, और यह इसका दायरा और बढ़ा लेता है।” उनका मानना है कि अफगानिस्तान में चल रहे संघर्ष, तालिबान के महिला स्वास्थ्यकर्मियों पर प्रतिबंध, और खराब स्वच्छता परिस्थितियां इस समस्या के प्रमुख कारण हैं।

पाकिस्तान में टीकाकरण की स्थिति

पाकिस्तान ने 2011 से अब तक पोलियो उन्मूलन कार्यक्रमों पर लगभग 10 अरब डॉलर खर्च किए हैं। हालांकि, देश में टीकाकरण दरों में भारी असमानता है। पंजाब में 85% बच्चों को टीका लगाया गया है।

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बलूचिस्तान में यह दर केवल 30% है। जब तक सभी प्रांतों में टीकाकरण दर 85-90% तक नहीं पहुंचती, तब तक वायरस का उन्मूलन संभव नहीं होगा।

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पोलियो उन्मूलन में आ रहीं बाधाएं

तालिबान के नियंत्रण वाले अफगानिस्तान में महिला स्वास्थ्यकर्मियों को काम करने की अनुमति नहीं है, जिससे टीकाकरण कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है। भुट्टा ने बताया कि अफगानिस्तान में पोलियो मामलों का सटीक आंकड़ा भी उपलब्ध नहीं है, जिससे बीमारी को रोकने में दिक्कतें बढ़ रही हैं।

पोलियो की वापसी: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

1955 में पोलियो वैक्सीन के विकास से पहले हर साल यह बीमारी पांच लाख से अधिक लोगों को प्रभावित करती थी। 2000 तक, व्यापक टीकाकरण अभियानों के चलते पोलियो का लगभग उन्मूलन हो गया था, लेकिन अफगानिस्तान और पाकिस्तान में यह अभी भी बना हुआ है।

भविष्य के लिए रणनीतियां

भुट्टा ने जोर दिया कि पोलियो के साथ-साथ अन्य बीमारियों के लिए भी नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों को मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत ने इसी रणनीति से पोलियो को खत्म किया। पाकिस्तान में भी यह संभव है, बस यह तय करने की बात है कि संसाधन कहां लगाए जाएं।”

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वैश्विक सहयोग की आवश्यकता

पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो के मामलों की पुनरावृत्ति इस बात की याद दिलाती है कि संक्रामक बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में निरंतर प्रयास और सहयोग आवश्यक हैं। पोलियो के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकरणों को एकजुट होकर काम करना होगा।

टीकाकरण दर बढ़ाने, तालिबान के साथ बेहतर सहयोग स्थापित करने, और स्वच्छता में सुधार करने जैसे कदम इस क्षेत्र से पोलियो को हमेशा के लिए मिटाने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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