केरा रोड स्थित मारुति किराना दुकान में पीडीएस चावल की खुलेआम कालाबाजारी…

जांजगीर-चांपा। सरकारी वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीबों के लिए सस्ते चावल की योजना पर कालाबाजारी का साया गहराता जा रहा है। जिला मुख्यालय जांजगीर के अधिकांश उपभोक्ता सरकारी राशन दुकानों से सस्ता चावल लेकर उसे दलाल और किराना दुकानों में बेच रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह गोरखधंधा कोतवाली थाना से कुछ ही दूरी पर स्थित किराना दुकानों में खुलेआम चल रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय जांजगीर के केरा रोड स्थित मारुति किराना दुकान में राशन कार्डधारक पीडीएस चावल को 27-28 रुपये प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं। वहीं उक्त दुकानदार बिना डर-भय के सरकारी चावल खरीद रहा है। इसके बाद चावल को बोरियों में भरकर ऑटो से सीधे राइस मिल पहुंचाया जा रहा है। दरअसल,
सरकार हर साल गरीब जनता के लिए मुफ्त और कम कीमत पर चावल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करती है और इसके लिए कर्ज भी लेती है, ताकि कोई भी जरूरतमंद भूखा न सोए। हालांकि, इस योजना का लाभ जरूरतमंदों के बजाय आर्थिक रूप से सक्षम लोग उठा रहे हैं, जिन्होंने गलत जानकारी देकर राशन कार्ड बनवा रखे हैं। ये लोग सरकार से सस्ते या मुफ्त में मिलने वाले चावल को खुद खाने के बजाय बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। इस काले कारोबार में आर्थिक रूप से सक्षम उपभोक्ताओं के साथ चावल दलाल और कुछ राइस मिल मालिक भी शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इस गोरखधंधे पर खाद्य विभाग के अफसर खामोश हैं, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
राशन दुकानों पर दलाल सक्रिय

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले में लगभग 3 लाख 18 हजार 268 राशन कार्डधारक हैं। इनमें से हजारों उपभोक्ता चावल बेचकर दलालों को बढ़ावा दे रहे हैं। अधिकतर राशन दुकानों के बाहर दलाल सक्रिय रहते हैं। यह चावल बाद में मिलरों को ऊंचे दामों पर बेचा जाता है और रीसाइक्लिंग के जरिए बाजार में वापस पहुंचता है।
थाने के पास खुलेआम खरीदारी

कोतवाली थाना से चंद कदमों की दूरी पर स्थित मारुति किराना दुकान में यही नजारा देखने को मिलता है। जिम्मेदार विभाग और पुलिस की लापरवाही से यहां काला कारोबार बेखौफ चल रहा है। स्थिति यह है कि पूरे जिले में ऐसे मामले बड़े स्तर पर हो सकते हैं।
जिम्मेदार अधिकारी बेपरवाह
खाद्य विभाग सहित जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता इस समस्या को और बढ़ा रही है। दलाल और राशन दुकानदार हर महीने लाखों रुपये की अवैध कमाई कर रहे हैं, जिससे शासन को हर महीना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। फिर भी जिम्मेदारअफसर चुप्पी साधे हुए हैं।
सख्त नियमों का प्रावधान
सरकारी चावल की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश 2016 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। दोषियों को अधिकतम सात साल की सजा का नियम है।



