गहरी निद्रा में मनेंद्रगढ़ वन मंडल ,,कट रहे सागौन के परिपक्व वृक्ष और बीहड़ में बन रहे ईंट के मकान…

मनेंद्रगढ़। मनेंद्रगढ़ वन मंडल का मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र सागौन के वनों के लिए बड़े रकबों के लिए जाना जाता है यहां पर बड़े पैमाने पर सागौन के तैयार वृक्षों का जंगल है। परंतु जिस तरह से वन विभाग की लापरवाही से सागौन जैसे कीमती प्रजाति की अवैध कटाई रुकने की बजाय आज भी उसी गति से जारी है उससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है की वन विभाग अपने मूल कर्तव्यों से पूरी तरह भटक चुका है और जंगलों के प्रति उदासीन हो चुका है। वही अगर जंगलों के जमीन की बात करें तो मनेंद्रगढ़ वन मंडल कार्यालय से महज कुछ ही दूरी पर बीच जंगल में ईंट से मकान बना दिया जाता है और वन विभाग को हवा तक नहीं लगती जिससे यह भी कहा सवाल उठता है की वन विभाग अपने दायित्व का निर्वहन करता तो डीएफओ के नाक के नीचे बीच जंगल में वन भूमि पर ईंट का मकान नही बनता। परंतु जंगलों की देखरेख में लापरवाह वन अमला सिर्फ और सिर्फ बीहड़ों में भारी भरकम राशि के निर्माण कार्यों में व्यस्त रहने का आदि हो चुका है। जिसके सीधे परिणाम के रूप में जंगलों की तबाही साफ नजर आ रही है। गौर तलब हो की मनेंद्रगढ़ वन परिक्षेत्र का खैरबना सर्किल जहां पर विगत 15 वर्षों से भी अधिक पहले से सागौन का प्लांटेसन बड़े रकबे में रहा है जिसकी दुर्दशा विगत कुछ वर्षों से इस तरह हो रही है कि चारों ओर सागौन के जंगलों का मंजर ठूठ में बदलता जा रहा है और वनों के परिपक्व सागौन वृक्ष समय से पहले ही काट दिए जा रहे हैं। मंजर तो ऐसा भी देखा जा सकता है खैरबना सर्किल अंतर्गत की बीहड़ में वन भूमि पर ईंट के मकान बना लिए जा रहे हैं। और वन विभाग छोटी मोटी कार्रवाई पर अपनी पीठ थपथपा कर खुद को सर्वश्रेष्ठ जता रहा है। समाचार का सीधा सरोकार मनेंद्रगढ़ के तेज तर्रार डीएफओ को कराने का यही उद्देश्य है की लापरवाह वन अमले पर नकेल कसे ताकि वनों में अतिक्रमण रुके साथ ही सागौन के युवा वृक्ष संरक्षित हो सकें।



