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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

झोलाछाप डॉक्टरों के हौंसले बुलंद मरीजों की जान से कर रहे खिलवाड़… सक्ती विकास खण्ड के देवरमाल का मामला…

झोलाछाप डॉक्टरों के हौंसले बुलंद मरीजों की जान से कर रहे खिलवाड़

सक्ती विकास खण्ड के देवरमाल का मामला

सीएमएचओ बोले टीम गठित कर करेंगे कार्रवाई

सक्ती। जिले के देवरमाल में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। चाय की गुमटियों जैसी दुकानाें में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार इस गांव में एक डॉक्टर और एक नर्स घूम-घूम कर ईलाज करने का मामला प्रकाश में आया है। यह भी जानकारी मिली है कि कुछ दिनों तक चाँपा के निजी अस्पताल में प्रेक्टिस किया गया और गांव में डॉक्टर बनकर घर-घर जाकर इलाज किया जा रहा है। मरीज चाहे उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार से पीड़ित हो या फिर अन्य कोई बीमारी से। सभी बीमारियों का इलाज यह झोलाछाप डॉक्टर करने को तैयार हो जाते हैं। खास बात यह है कि अधिकतर झोलाछाप डॉक्टरों की उम्र 40 से 45 साल के बीच है। मरीज की हालत बिगड़ती है तो उसे आनन फानन में जिला अस्पताल सक्ती भेज दिया जाता है। जबकि यह लापरवाही स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की जानकारी में भी है।
सक्ती अनुभाग के ग्रामीण क्षेत्र के देवरमाल देवरी सहित दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होते हुए भी नहीं हैं। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुविधाएं हैं। उसके बाद भी इसका फायदा सीधे तौर पर झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं। देवरमाल गांव के ग्रामीणों अनुसार गांव में सरकारी इलाज की सुविधा है। फिर भी बीमार होने पर झोलाछाप डॉक्टरों से ही इलाज कराना पड़ता है।

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बिना लाइसेंस के दवाओं का भंडारण भी करते हैं डॉक्टर

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झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा बिना पंजीयन के एलोपैथी चिकित्सा व्यवसाय ही नहीं किया जा रहा है। बल्कि बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं का भंडारण व विक्रय भी अवैध रूप से किया जा रहा है। घर के भीतर कार्टून में दवाओं का अवैध तरीके से भंडारण रहता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई सालों से अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय कर रहे लोगों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। इन दिनों मौसमी बीमारियों का कहर है। झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें मरीजों से भरी पड़ी हैं। गर्मी व तपन बढ़ने के कारण इन दिनो उल्टी, दस्त, बुखार जैसी बीमारियां ज्यादा पनप रही हैं। झोलाछाप इन मरीजों का इलाज ग्लूकोज की बोतलें लगाने से शुरू करते हैं। एक बोतल चढ़ाने के लिए इनकी फीस 200 से 400 रुपए तक होती है।

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स्वास्थ्य विभाग नहीं करता कार्रवाई

झोलाछाप डॉक्टरों की वजह से अब तक कई लोगों की असमय जान चली गई है देवरमाल स्थित प्राइवेट घर पर क्लीनिकों पर ईलाज किया जाता है यही नही घर- घर पहुंच कर इलाज किया जाता है लेकिन अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने स्थाई तौर पर झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं की। ग्रामीण क्षेत्र में एक बार भी प्रशासन की कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और प्रशासन दूर से ही इन्हें देख रहा है।

केस बिगड़ने पर अस्पताल रिफर कर देते हैं मरीज

बीते कुछ वर्षों से फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों की वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में कोई मात्र फर्स्ट एड के डिग्रीधारी हैं तो कोई अपने आप को बवासीर या दंत चिकित्सक बता रहा है लेकिन इनके निजी क्लीनिकों में या घर में घूम- घूम कर लगभग सभी गंभीर बीमारियों का इलाज धड़ल्ले से किया जा रहा है।

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वर्जन

टीम बनाकर होगी कार्रवाई
जल्द ही एक टीम बनाई जाएगी। यह टीम पूरे जिले में जहां झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें चल रही हैं वहां कार्रवाई करेगी।
सीएमएचओ
सक्ती

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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