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प्रदेश में अगले 2 दिन में और बढ़ेगी ठंड, कई हिस्सों में शीतलहर का अलर्ट अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री

रायपुर,25 दिसंबर। प्रदेश के कई हिस्सों में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक दुर्ग संभाग के कुछ इलाकों में पिछले 24 घंटों के दौरान शीतलहर चली है। विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले 3 दिनों तक उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में एक-दो पॉकेट में शीतलहर चलने की संभावना है।

वहीं अगले तीन दिनों तक प्रदेश के न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट आ सकती है। पिछले 24 घंटे की बात करें तो सरगुजा संभाग का अंबिकापुर प्रदेश में सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं ​सबसे गर्म दुर्ग रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.2°C डिग्री रहा।

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कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।

बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा होता है। नवजातों की मांसपेशियां कम विकसित होती हैं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। वहीं, सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा और बढ़ जाता है।

NICU और SNCU तक पहुंच रहे मामले

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डॉक्टरों के अनुसार, पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने पर बच्चों को एनआईसीयू (NICU) और एसएनसीयू (SNCU) में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। नवजात का शरीर अचानक ठंडा पड़ जाना या तापमान सामान्य से कम हो जाना हाइपोथर्मिया का प्रमुख लक्षण है।

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ठंड के चलते अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अंबेडकर अस्पताल में मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में 600 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। रोजाना 2000 से अधिक मरीजों का इलाज ओपीडी में किया जा रहा है।

हाइपोथर्मिया एक लाइफ थ्रेटनिंग इमरजेंसी स्थिति है। इसमें शरीर का सामान्य तापमान 98.6 फॉरेनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) से नीचे चला जाता है। तापमान गिरने पर शरीर सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता और धीरे-धीरे उसके अहम अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।

पीडियाट्रिशियन डॉ. आकाश लालवानी के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर हवा या पानी के संपर्क में आकर तेजी से अपनी गर्मी खो देता है। शरीर की लगभग 90 फीसदी गर्मी त्वचा और सांस के जरिए बाहर निकलती है। ठंडी हवा या नमी के संपर्क में आने पर यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है।

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अगर कोई व्यक्ति ठंडे पानी में है, तो उसका शरीर हवा की तुलना में 25 गुना तेजी से अपनी गर्मी खोता है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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