CG News: बाल संप्रेक्षण गृहों से किशोरों के भागने पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्रीय गृह मंत्रालय से मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की बाल देखभाल संस्थाओं से किशोरों के भागने की घटनाओं को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। महासमुंद और बिलासपुर की संस्थाओं से किशोरों के फरार होने के मामलों के बाद अब संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। छत्तीसगढ़ बाल देखभाल संस्थाएं मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया है और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता को लेकर जवाब मांगा है।
छत्तीसगढ़ बाल देखभाल संस्थाएं मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि महासमुंद के सरकारी आब्जर्वेशन होम से आठ किशोर भाग गए थे। इसके अलावा बिलासपुर की एक संस्था से भी चार किशोरों के फरार होने का मामला सामने आया था।इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने बाल देखभाल संस्थाओं की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई है। सरकार की ओर से संस्थानों में अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड तैनात करने का प्रस्ताव रखा गया है।
26 संस्थाओं में चाहिए 156 सुरक्षा गार्ड
छत्तीसगढ़ बाल देखभाल संस्थाएं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 26 बाल देखभाल संस्थाओं में कुल 156 सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग की है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था से संस्थानों की निगरानी बेहतर हो सकेगी और किशोरों के फरार होने की घटनाओं को रोका जा सकेगा।इस व्यवस्था के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से आर्थिक मदद मांगी है। प्रस्तावित सुरक्षा व्यवस्था पर अब केंद्र सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
सालाना 4.68 करोड़ रुपये की जरूरत
छत्तीसगढ़ बाल देखभाल संस्थाएं में 156 सुरक्षा गार्ड की तैनाती के लिए राज्य सरकार ने सालाना करीब 4.68 करोड़ रुपये के बजट की मांग की है। इसके लिए राज्य सरकार ने 8 अगस्त को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र भेजा था।अब हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि क्या मौजूदा केंद्रीय योजनाओं या दिशा-निर्देशों के तहत इस सुरक्षा व्यवस्था के लिए राज्य को वित्तीय सहायता दी जा सकती है।
हाईकोर्ट ने केंद्र को बनाया पक्षकार
छत्तीसगढ़ बाल देखभाल संस्थाएं मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।कोर्ट ने रजिस्ट्री को केंद्र सरकार को मामले में पक्षकार बनाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। इसके बाद केंद्र की ओर से इस मुद्दे पर औपचारिक जवाब सामने आएगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय से मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ बाल देखभाल संस्थाएं की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव से जवाब मांगा है। कोर्ट ने शपथपत्र के माध्यम से यह बताने को कहा है कि 156 सुरक्षा गार्ड की तैनाती के लिए राज्य को किस तरह वित्तीय सहायता दी जा सकती है।अब केंद्र सरकार को अपनी योजनाओं और दिशा-निर्देशों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
सुरक्षा व्यवस्था क्यों बनी बड़ा मुद्दा?
छत्तीसगढ़ बाल देखभाल संस्थाएं में किशोरों की सुरक्षा और निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है। महासमुंद और बिलासपुर में सामने आई फरारी की घटनाओं के बाद संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है।राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड की मांग इसी चिंता को दूर करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो 26 संस्थाओं में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।
अगली सुनवाई 25 अगस्त को
छत्तीसगढ़ बाल देखभाल संस्थाएं मामले में अब अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी। तब तक केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से शपथपत्र दाखिल किए जाने की उम्मीद है।अगली सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि 156 सुरक्षा गार्ड की तैनाती के लिए केंद्र सरकार किस योजना के तहत सहायता दे सकती है और राज्य सरकार के प्रस्ताव पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
अब केंद्र के जवाब पर टिकी नजर
छत्तीसगढ़ बाल देखभाल संस्थाएं मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब केंद्र और राज्य सरकार दोनों की भूमिका अहम हो गई है। एक तरफ राज्य सरकार सुरक्षा के लिए 156 गार्ड की मांग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट यह जानना चाहता है कि इसके लिए केंद्र से वित्तीय सहायता किस तरह मिल सकती है।अब 25 अगस्त की सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी, जहां केंद्र के जवाब के बाद मामले की आगे की दिशा तय हो सकती है।



