AAP में बड़ा सियासी भूचाल: 7 दिन में 7 सांसद बाहर, केजरीवाल की रणनीति पर बड़ा सवाल

नई दिल्ली : नई दिल्ली में सियासी हलचल तेज हो गई है, जहां अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी को एक ही हफ्ते में बड़ा झटका लगा। सात दिनों के भीतर राज्यसभा के 10 में से 7 सांसदों के साथ छोड़ने से पार्टी की संसदीय ताकत कमजोर हो गई है।
बताया जा रहा है कि यह कोई अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था। 22 अप्रैल को जब केजरीवाल को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने तुरंत अपने सांसदों से संपर्क साधना शुरू किया, लेकिन तब तक हालात काफी बदल चुके थे।
सबसे बड़ा झटका उस वक्त लगा जब संदीप पाठक, जो आखिरी समय तक वफादारी का भरोसा दे रहे थे, अचानक भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय पहुंचकर शामिल हो गए।
इस पूरे घटनाक्रम में राघव चड्ढा को अहम भूमिका में बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर अन्य सांसदों को साधने का काम किया। वहीं पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का रुख पहले से तय माना जा रहा था।
कुछ सांसदों के फैसले के पीछे व्यावसायिक कारण भी बताए जा रहे हैं। उद्योग से जुड़े नेताओं के लिए केंद्र सरकार के साथ तालमेल बनाए रखना अहम माना गया।
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर संसद के गणित पर पड़ा है। बीजेपी की राज्यसभा में ताकत बढ़कर 113 तक पहुंच गई है और एनडीए ने पहली बार साधारण बहुमत हासिल कर लिया है। इससे सरकार के लिए बड़े विधेयकों को पारित कराना आसान हो सकता है।
वहीं, आम आदमी पार्टी के पास अब राज्यसभा में सिर्फ तीन सांसद बचे हैं। केजरीवाल ने इसे राजनीतिक धोखा बताया है, जबकि बीजेपी के लिए इसे भविष्य की रणनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है।



