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नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत – छात्र छात्राओं और अभिभावकों के लियें नई चुनौती और उसके समाधान…

नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही बच्चों के साथ साथ उनके पैरेन्टस की भी व्यस्तता बढ़ जाती है,

इस महत्वपूर्ण समय पर बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, शारीरिक व मानसिक विकास के लिये उनके टीचर्स के साथ साथ पैरेन्टस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हुआ करती है..
नये शैक्षणिक सत्र में बच्चों की सफलता और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिये उनके पैरेन्टस को कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अवश्य ध्यान देना चाहिये..
१. बच्चों के लिये एक स्थिर और सुनियोजित दिनचर्या प्लान करनी चाहिये, इस दिनचर्या में उनके सही व पौष्टिक खानपान के अलावा पढ़ाई, खेल व आराम का सही संतुलन बनाये रखना चाहिये..जिससे बच्चों में अनुशासन और समय प्रबंधन की आदतें विकसित होगी जो कि उन्हें उनके अपने लक्ष्य प्राप्ति में सहायक सिध्द होंगी..
२. ⁠घर पर शॉंत और व्यवस्थित पढ़ाई का माहौल भी सुनिश्चित करना अनिवार्य है, अतः घर पर ही एक कमरा या एक कोना उनके अपने अध्ययन के लिये बनाना चाहिये, जिससे बच्चे बिना किसी व्यवधान के अपना अध्ययन कर सकें, ताकि वे सफलता के मार्ग पर प्रशस्त हों सकें…
३. ⁠टी वी, मोबाईल, और अन्य ध्यान भटकाने वाली वस्तुओं से दूर रखना अनिवार्य है, जिसके लिये अनिवार्य यह है कि बच्चों के अध्ययन के समय उनके पैरेन्टस भी मोबाईल, टी वी और सोशल मीडिया से दूरी बनायें रखें, क्योंकि यदि पैरेन्टस उन समय पर मोबाईल, सोशल मीडिया या टी वी का उपयोग करेंगें तो बच्चों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है…साथ ही पैरेन्टस बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया से होने वाले नुक़सानों से भी अवगत करायें..
४. ⁠घर परिवार का माहौल बेहद सुकून, शॉंत और ख़ुशनुमा बनाये रखना चाहिये जिससे बच्चों में पाजीटिव एनर्जी का संचार हो ताकि वे अपने लक्ष्य की प्राप्ति में सहायक बनें..
५. ⁠घर पर व स्कूल में वैल्यू एजुकेशन पर चर्चा होनी चाहिये और उन्हें समय समय पर इसकी शिक्षा देनी चाहिये ताकि बच्चों में वैल्यू और मोरल एजुकेशन की वृद्धि हो..
६. ⁠बच्चों को समय प्रबंधन सिखाना भी महत्वपूर्ण है ताकि बच्चों को अपना प्रत्येक कार्य समय पर पूर्ण करने की आदत का विकास होगा चाहे वह स्कूल का होमवर्क हो, या खेल का समय हो या शैक्षणिक कार्य…या चाहे घूमने फिरने, खेलने, आराम करने और सोने का समय ही क्यों ना हो..क्योंकि समय प्रबंधन ही व्यक्ति को महान बनाता है…
७. ⁠बच्चों की संगति व उनके दोस्तों पर नज़र रखना अनिवार्य है एवं उन्हें समय समय पर भले बुरे, सही ग़लत की सही जानकारी प्रदान करनी चाहिये ताकि वे सही मार्ग में चल सके और उनमें भटकाव की स्थिति निर्मित ना हो..
८. ⁠समय समय पर घर पर सामान्य ज्ञान पर और देश विदेश की जानकारी और घर परिवार की चर्चा करनी चाहिये एवं सफल व्यक्तियों की चर्चा अवश्य करनी चाहिये जिससे बच्चों में उत्साह का संचार होता है..
९. ⁠बच्चों में पर्सनालिटी डेवलपमेंट के बारे में भी शिक्षा समय समय पर प्रदान करना चाहिये..
१०. ⁠कभी भी बच्चों को एक दूसरे बच्चों से तुलना नहीं करना चाहिये क्योंकि इससे बच्चों में हीनता की भावना उत्पन्न होती है..अतः आवश्यक है कि हम बच्चों से दूसरे सफलतम बच्चों के बारे में बतायें और यह समझाने का प्रयास करें कि आप भी सफलता की ऊँचाई को प्राप्त कर सकते है…
११. ⁠सबसे आवश्यक बात यह है कि पैरेन्टस बच्चों को समझने का प्रयास करें और बच्चों की बातों को नज़रअंदाज़ ना करें वरन् उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुनें समझें और उनकी समस्याओं का शांतिपूर्ण तरीक़े से समाधान करें ताकि बच्चों में भटकाव ना हों…

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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