बस्तर : घुटनों के बल सड़क पार कर पानी भरने को मजबूर दिव्यांग महिला! वायरल VIDEO ने खोली योजनाओं की पोल

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से एक बेहद मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। बस्तर ब्लॉक के जामगुड़ा गांव में रहने वाली दिव्यांग महिला दुलमा कश्यप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह घुटनों के बल सड़क पार कर सिर पर पानी का बर्तन लेकर जाती नजर आ रही हैं।
तपती दोपहर, तेज रफ्तार वाहनों से भरी सड़क और शारीरिक असमर्थता के बावजूद दुलमा का यह संघर्ष लोगों को झकझोर रहा है।
पानी के लिए रोज लड़नी पड़ती है जंग
जामगुड़ा गांव में पेयजल संकट इतना गंभीर है कि ग्रामीणों को आज भी हैंडपंप और निजी बोरवेल के भरोसे रहना पड़ रहा है। दुलमा कश्यप हर दिन करीब 200 मीटर दूर स्थित हैंडपंप से पानी लाने के लिए सड़क पार करती हैं।
चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण उन्हें घुटनों के बल यह दूरी तय करनी पड़ती है। सड़क पर लगातार गुजरते वाहनों के बीच यह सफर उनके लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, लेकिन पानी की जरूरत उन्हें मजबूर करती है।
कागजों में योजनाएं, जमीन पर संकट
गांव में वर्षों पहले बनाई गई ओवरहेड पानी टंकी आज भी सूखी खड़ी है। जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए कई नल कनेक्शन बंद पड़े हैं।
ग्रामीणों के अनुसार:
- गांव में कुल सात हैंडपंप हैं
- कई हैंडपंप खराब पड़े हैं
- कुछ से बेहद कम पानी निकलता है
- पाइपलाइन व्यवस्था अधूरी है
ऐसे में पूरे गांव की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
बैटरी वाली ट्राइसाइकिल भी पड़ी खराब
दुलमा कश्यप ने गांव में आठवीं तक पढ़ाई की और आगे की शिक्षा इच्छापुर में पूरी की। उन्हें समाज कल्याण विभाग की ओर से बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल भी दी गई थी, लेकिन वह अब खराब हो चुकी है।
दुलमा का कहना है कि:
- वाहन को ठीक कराने के लिए विभागीय कार्यालय जाने को कहा जाता है
- संसाधन और जानकारी के अभाव में वे ऐसा नहीं कर पा रहीं
- पंचायत स्तर पर भी उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिल रही
वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने प्रशासन और सरकारी योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं का प्रचार तो खूब होता है, लेकिन उनका वास्तविक लाभ गांव तक नहीं पहुंच पाता।
जामगुड़ा की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उन कई दूरदराज इलाकों की हकीकत है जहां आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
विकास के दावों पर सवाल
दुलमा कश्यप की स्थिति ने ‘हर घर जल’ और ‘अंतिम व्यक्ति तक विकास’ जैसे सरकारी नारों की वास्तविकता पर बहस छेड़ दी है।
जब एक दिव्यांग महिला को पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर घुटनों के बल सड़क पार करनी पड़े, तो यह साफ संकेत है कि कई योजनाएं अभी भी जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पाई हैं।
अब लोगों की नजर प्रशासन पर टिकी है कि आखिर इस वायरल वीडियो के बाद जामगुड़ा गांव की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।



