छत्तीसगढ़ में पटवारियों पर सरकार की बड़ी सख्ती, अब हलके का बस्ता जमा करना हुआ अनिवार्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर राज्य सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। हड़ताल समाप्त न होने की स्थिति में प्रशासन ने अब कड़ा रुख अपनाते हुए पटवारियों से उनके हलकों का ‘बस्ता’ संबंधित राजस्व निरीक्षक (RI) को अनिवार्य रूप से सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ठप पड़े राजस्व कार्यों और आम नागरिकों की परेशानियों को दूर करना है। शुरुआत में सारंगढ़ तहसील समेत कई जिलों में इस वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था के तहत आरआई को पटवारी हलकों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जाने लगा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के पटवारी गत 13 अक्टूबर 2026 से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में पीवी एप (PV App) की तकनीकी खामियों को दूर करना, वेतन विसंगति को समाप्त करना और राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है। पटवारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और सर्वर डाउन रहने के कारण पीवी एप के जरिए डिजिटल क्रॉप सर्वे व गिरदावरी का काम करना बेहद कठिन हो गया है। इसके बावजूद सरकार मांगों को हल करने के बजाय अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रही है।

प्रशासनिक स्तर पर सख्ती दिखाते हुए अब तक प्रदेशभर में 1,000 से अधिक पटवारियों को काम पर लौटने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिसमें अकेले बिलासपुर संभाग के 259 और सरगुजा संभाग के 819 पटवारी शामिल हैं। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले 150 से अधिक पटवारियों को निलंबित भी किया जा चुका है। हड़ताल के कारण जमीन की खरीदी-बिक्री, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और आय-जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी काम पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता समर्थन मूल्य पर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों को लेकर है, क्योंकि फसल सत्यापन और एग्रीस्टैक के रिकॉर्ड अपडेट न होने से उन्हें खरीदी केंद्रों पर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने सरकार से आग्रह किया है कि वह दंडात्मक कार्रवाई के बजाय बातचीत के माध्यम से इस गतिरोध को समाप्त करे। बहरहाल, सरकार द्वारा बस्ता जमा कराने के आदेश से आंदोलन नया मोड़ ले चुका है, और यह देखना अहम होगा कि धान खरीदी सत्र शुरू होने से पहले राजस्व व्यवस्था कैसे पटरी पर लौटती है।



