756 बोरी खाद जब्त, गोदाम सील… फिर 21 दिन बाद खुल गई दुकान!
जयनगर में 6405 बोरी खाद की कमी पर प्रबंधक पर अपराध दर्ज, द्वारिकापुर में गैर-सरकारी खाद मिलने के बावजूद दुकानदार पर कार्रवाई क्यों? कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, दुकान खोलने की अनुमति और जांच प्रक्रिया को लेकर जवाब का इंतजार

सूरजपुर। ग्राम द्वारिकापुर में 3 जुलाई 2026 को हुई संयुक्त कार्रवाई के बाद अब कृषि विभाग की कार्रवाई को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्रवाई के दौरान 676 बोरी यूरिया और 80 बोरी डीएपी, कुल 756 बोरी खाद जब्त की गई थी और संबंधित गोदाम को सील कर दिया गया था। इसके साथ ही बड़ी मात्रा में धान भी जब्त किया गया था। मामले को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में खाद जब्त होने के बावजूद संबंधित दुकानदार के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की गई?
जानकारी के अनुसार खाद के मामले में संबंधित प्रतिष्ठान पर 21 दिनों का विक्रय प्रतिबंध लगाया गया था। प्रतिबंध की अवधि पूरी होने के बाद दुकान को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई और अब दुकान का संचालन भी किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर 756 बोरी खाद की जब्ती और गोदाम सील किए जाने के बाद कृषि विभाग की कार्रवाई केवल 21 दिन के प्रतिबंध तक ही क्यों सीमित रह गई?
गैर-सरकारी खाद मिली तो कार्रवाई कहां?
मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि कार्रवाई के दौरान दुकान में गैर-सरकारी खाद मिलने की जानकारी सामने आई है। यदि खाद निर्धारित सरकारी आपूर्ति व्यवस्था के बाहर से लाई गई थी तो उसके स्रोत, खरीद-बिक्री, बिल और स्टॉक की जांच किया जाना जरूरी था।
676 बोरी यूरिया और 80 बोरी डीएपी आखिर दुकान तक कैसे पहुंची? इसे किससे खरीदा गया? क्या इसके वैध दस्तावेज मौजूद थे? क्या संबंधित कंपनी अथवा आपूर्तिकर्ता से बिलों का सत्यापन कराया गया? क्या मौके पर मिले स्टॉक का स्टॉक रजिस्टर से मिलान किया गया?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब अब तक सामने नहीं आया है।
जयनगर में कमी मिली तो प्रबंधक पर अपराध, यहां कार्रवाई क्यों नहीं?
खाद से जुड़े मामलों में विभागीय कार्रवाई को लेकर जिले में एक और मामला चर्चा में है। जयनगर आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में 6405 बोरी खाद की कमी और करीब 74.66 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आने के बाद तत्कालीन प्रबंधक के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक मामले में खाद की कमी सामने आने पर जांच के बाद पुलिस कार्रवाई तक मामला पहुंच गया, जबकि द्वारिकापुर में 756 बोरी खाद जब्त होने और गोदाम सील किए जाने के बावजूद संबंधित दुकानदार के खिलाफ आगे की कार्रवाई स्पष्ट क्यों नहीं है?
क्या दोनों मामलों में कार्रवाई का आधार अलग है? यदि हां, तो कृषि विभाग को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
21 दिन बाद दुकान खोलने की अनुमति किस आधार पर?
मामले में यह भी सवाल है कि 21 दिन का प्रतिबंध समाप्त होने के बाद दुकान खोलने की अनुमति किस आधार पर दी गई। दुकान दोबारा खोलने से पहले क्या विभाग ने प्रतिष्ठान का पुनः निरीक्षण किया? क्या जब्त खाद के दस्तावेजों की जांच पूरी हुई? क्या स्टॉक रजिस्टर, खरीद बिल और बिक्री रिकॉर्ड का मिलान किया गया?
यदि जांच में सब कुछ नियमानुसार पाया गया तो विभाग को इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। वहीं यदि जांच में अनियमितता मिली थी तो केवल 21 दिन का प्रतिबंध लगाकर दुकान खोलने की अनुमति क्यों दी गई, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
रजिस्टर संधारण की समझाइश, कार्रवाई की जगह केवल निर्देश?
कृषि विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार दुकान दोबारा संचालित किए जाने की प्रक्रिया के दौरान संबंधित दुकानदार को नियमों का पालन करने तथा स्टॉक रजिस्टर नियमित रूप से संधारित रखने जैसी हिदायत दिए जाने की चर्चा है।
यदि यह जानकारी सही है तो सवाल यह है कि 756 बोरी खाद जब्त किए जाने के बाद विभागीय कार्रवाई का स्तर केवल समझाइश तक क्यों सीमित रहा?
किसी प्रतिष्ठान में बड़ी मात्रा में खाद जब्त होने के बाद उसके स्रोत और दस्तावेजों की जांच प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में केवल रजिस्टर संधारण की हिदायत दिए जाने की चर्चा भी विभागीय कार्रवाई पर सवाल खड़े करती है।
खाद दुकान तक पहुंची कैसे, जांच का केंद्र यही होना चाहिए
पूरे मामले में सबसे अहम जांच इस बात की होनी चाहिए कि जब्त खाद दुकान तक किस माध्यम से पहुंची। खरीद स्रोत क्या था, बिल किस तारीख के हैं, क्या बिल वास्तविक हैं, स्टॉक रजिस्टर में खाद कब दर्ज की गई और मौके पर मिले स्टॉक तथा रिकॉर्ड में कितना अंतर था—इन सभी बिंदुओं की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
विभाग की उप संचालक का पक्ष जानने किया संपर्क
मामले में कृषि विभाग का पक्ष जानने के लिए कृषि विभाग की उप संचालक सुश्री संपदा पैकरा से फोन के माध्यम से संपर्क करने का कई बार प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद वाट्सऐप के माध्यम से भी 756 बोरी खाद की जब्ती, 21 दिन के प्रतिबंध, गैर-सरकारी खाद मिलने तथा प्रतिबंध समाप्त होने के बाद दुकान दोबारा खोले जाने के संबंध में विभाग का पक्ष जानने के लिए संदेश भेजा गया।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक वाट्सऐप संदेश का भी कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इसके कारण मामले में विभाग का पक्ष ज्ञात नहीं हो सका। उप संचालक का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब विभाग से जवाब की दरकार
द्वारिकापुर मामले में अब कृषि विभाग को स्पष्ट करना होगा कि 756 बोरी खाद की जब्ती के बाद संबंधित दुकानदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और 21 दिन बाद दुकान खोलने की अनुमति किस आधार पर दी गई।
एक तरफ जयनगर में खाद की कमी के मामले में जांच के बाद प्रबंधक के खिलाफ अपराध दर्ज हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ द्वारिकापुर में बड़ी मात्रा में खाद जब्त होने के बाद भी आगे की कार्रवाई स्पष्ट नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।
क्या नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग ने इस मामले में दुकानदार को राहत दी? या फिर जांच में वास्तव में कोई अनियमितता नहीं मिली?
सच्चाई विभागीय दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी। फिलहाल 756 बोरी खाद की जब्ती, गोदाम सील होने, 21 दिन के प्रतिबंध और फिर दुकान खुल जाने की पूरी प्रक्रिया कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।



