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चोरी की गाड़ियों पर ‘सशक्त’ वार! IG गर्ग ने दिए शत-प्रतिशत रिकवरी के निर्देश, साइबर ठगी की रकम वापसी का भी बताया MRM फॉर्मूला

जांजगीर-चांपा। बिलासपुर रेंज में वाहन चोरी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और चोरी हुए वाहनों की शत-प्रतिशत बरामदगी सुनिश्चित करने पुलिस अब तकनीक आधारित कार्रवाई को और मजबूत करेगी। पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने शुक्रवार को ‘सशक्त’ (Sashakt) ऐप की रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को चोरी के वाहनों की त्वरित ट्रैकिंग, संदिग्ध वाहनों की जांच और बरामदगी से संबंधित डेटा को शत-प्रतिशत अपडेट रखने के सख्त निर्देश दिए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में रेंज के विभिन्न जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी, थाना प्रभारी तथा हाल ही में पदस्थ प्रशिक्षु उप निरीक्षक (PSI) शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘सशक्त’ ऐप के माध्यम से दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों की चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना तथा चोरी अथवा संदिग्ध वाहनों की पहचान कर उनकी रिकवरी दर बढ़ाना रहा।
 
लंबित डेटा एक सप्ताह में पूरा करने के निर्देश
समीक्षा के दौरान आईजी ने वाहन चोरी के पुराने प्रकरणों में अधूरे डेटा को लेकर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को बैकलॉग पूरा करने के निर्देश दिए। जिन मामलों में वाहन का चेसिस नंबर या इंजन नंबर दर्ज नहीं है, उनमें आवश्यक जानकारी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत तत्काल अपडेट करने कहा गया।
उन्होंने निर्देशित किया कि वाहन चोरी से संबंधित प्रत्येक प्रकरण का डेटा व्यवस्थित और अद्यतन होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी संदिग्ध वाहन की जांच के दौरान पुलिस को तत्काल आवश्यक जानकारी मिल सके।
 
एफआईआर दर्ज होते ही ‘सशक्त’ ऐप पर दर्ज होगा वाहन का विवरण
आईजी ने कहा कि थाने में वाहन चोरी की एफआईआर दर्ज होने के बाद वाहन से संबंधित आवश्यक जानकारी को यथासंभव तत्काल ‘सशक्त’ ऐप पर दर्ज किया जाए। उन्होंने प्रत्येक प्रकरण में इंजन नंबर और चेसिस नंबर स्पष्ट रूप से दर्ज करने पर विशेष जोर दिया।
इससे पुलिस को अलग-अलग थाना क्षेत्रों में चोरी हुए वाहनों की पहचान करने तथा संदिग्ध वाहनों की जांच के दौरान तत्काल मिलान करने में मदद मिलेगी।
 
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और पार्किंग स्थलों पर बढ़ेगी चेकिंग
संदिग्ध एवं चोरी के वाहनों की पहचान के लिए रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, सराफा क्षेत्र और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर विशेष चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिसकर्मी ‘सशक्त’ ऐप के माध्यम से संदिग्ध वाहनों की जांच करेंगे।
पार्किंग ठेकेदारों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों को भी ऐप से जोड़कर चेकिंग व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही गई, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर खड़े वाहनों की निगरानी और सत्यापन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सके।
 
नए पुलिस अधिकारियों को रोजाना 20 संदिग्ध वाहनों की जांच का लक्ष्य
बैठक में हाल ही में पदस्थ डीएसपी, निरीक्षक, उप निरीक्षक एवं अन्य पुलिसकर्मियों का ‘सशक्त’ ऐप पर शत-प्रतिशत पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए। नए यूजर को ऐप के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण देने के साथ ही प्रतिदिन कम से कम 20 संदिग्ध वाहनों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
आईजी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि तकनीक का इस्तेमाल केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि इसका वास्तविक लाभ अपराध नियंत्रण और वाहन बरामदगी में दिखाई देना चाहिए।
 
बरामद वाहनों का बैक-एंड डेटा तत्काल अपडेट करने पर जोर
बैठक में बरामद अथवा रिकवर किए जा चुके वाहनों की जानकारी को तत्काल बैक-एंड सिस्टम में अपडेट करने के निर्देश भी दिए गए। इससे एक ही वाहन की दोबारा जांच, डेटा में दोहराव और वाहन सुपुर्दगी से जुड़ी किसी भी प्रकार की पारदर्शिता संबंधी समस्या को दूर किया जा सकेगा।
आईजी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वाहन चोरी के मामलों में दर्ज प्रकरण, संदिग्ध वाहन की जांच और बरामदगी से लेकर सुपुर्दगी तक की पूरी प्रक्रिया का डेटा व्यवस्थित रूप से अपडेट रखा जाए।
 
साइबर ठगी की रकम वापसी के लिए MRM का लाइव प्रेजेंटेशन
बैठक के दौरान मुंगेली के पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने साइबर अपराध के पीड़ितों को उनकी ठगी गई रकम वापस दिलाने के लिए अपनाए जा रहे मनी रिकवरी मैकेनिज्म (MRM) की विस्तृत जानकारी लाइव प्रेजेंटेशन के माध्यम से दी।
उन्होंने बताया कि साइबर ठगी की शिकायत प्राप्त होते ही साइबर हेल्पलाइन 1930 और संबंधित पोर्टल के माध्यम से त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के बैंक खाते में पहुंची रकम को होल्ड/फ्रीज कराने का प्रयास किया जाता है। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर होल्ड की गई राशि को पीड़ित के बैंक खाते में वापस कराने की कार्रवाई की जाती है।
 
साइबर ठगी में शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण
एसपी भोजराम पटेल ने साइबर फ्रॉड के मामलों में ‘गोल्डन आवर’ के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि ठगी की घटना के बाद शुरुआती 1 से 2 घंटे में शिकायत मिलने पर रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और उसे होल्ड कराने की संभावना अधिक रहती है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ऑनलाइन ठगी होने पर घबराने के बजाय तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और संबंधित बैंक को भी सूचना दें, ताकि ठगी की रकम को सुरक्षित करने के लिए समय रहते कार्रवाई की जा सके।
 
‘तकनीक आधारित पुलिसिंग से जनता को मिले सीधा लाभ’ : आईजी गर्ग
बैठक के समापन पर आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल से पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, तेज और परिणाममूलक बनाया जा सकता है। ‘सशक्त’ ऐप चोरी के वाहनों की पहचान, ट्रैकिंग और बरामदगी के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी माध्यम है।
उन्होंने सभी अधिकारियों को ऐप के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन, लंबित डेटा को समय सीमा में अपडेट करने तथा वाहन चोरी के मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाकर आम जनता को सीधा लाभ पहुंचाना है।
आईजी ने सभी संबंधित अधिकारियों को बैठक में दिए गए निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने की सख्त हिदायत दी।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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