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सरस्वती शिशु मंदिरों की तीन दिवसीय वार्षिक कार्ययोजना बैठक का समापन, राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर हुआ मंथन

जांजगीर-चांपा। जिला जांजगीर-चांपा के सरस्वती शिशु मंदिरों के प्राचार्य एवं प्रधानाचार्यों की तीन दिवसीय वार्षिक कार्ययोजना बैठक का समापन समारोह आयोजित किया गया। बैठक में आगामी शैक्षणिक सत्र की कार्ययोजना, विद्यालयीन गतिविधियों, शिक्षा के साथ संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। समारोह में जिले के विभिन्न सरस्वती शिशु मंदिरों के प्राचार्य, प्रधानाचार्य, आचार्य एवं दीदी उपस्थित रहे।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता इंजीनियर रवि पाण्डेय ने कहा कि जिला जांजगीर-चांपा के सरस्वती शिशु मंदिरों के प्राचार्य एवं प्रधानाचार्यों की तीन दिवसीय वार्षिक कार्ययोजना बनाने की बैठक महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके विद्यालयों में निर्मित होता है और विद्यालय की आत्मा उसके शिक्षक एवं प्राचार्य होते हैं।
इंजीनियर पाण्डेय ने कहा कि भारत में शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण और संस्कार निर्माण का सशक्त साधन है। ऐसे में सरस्वती शिशु मंदिरों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा भावना और संस्कारों का समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने प्राचार्यों एवं शिक्षकों से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने का आह्वान किया।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप नागरिक निर्माण पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष रतनलाल चक्रधर ने छत्तीसगढ़ प्रांत में संचालित सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालयों की कार्यप्रणाली एवं उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिरों का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री अथवा प्रमाण पत्र दिलाना नहीं है, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो आत्मनिर्भर, नैतिक, नवाचारी, अनुशासित और राष्ट्र के प्रति समर्पित हों।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल, नैतिक मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा को महत्व दिया गया है। सरस्वती शिशु मंदिर इन मूल्यों को शिक्षा व्यवस्था के साथ जोड़कर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
तीन दिवसीय बैठक में बनाई गई वार्षिक कार्ययोजना
तीन दिवसीय बैठक के दौरान जिले के विभिन्न सरस्वती शिशु मंदिरों के प्राचार्य एवं प्रधानाचार्यों ने विद्यालयों में आगामी वर्ष के लिए शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों की कार्ययोजना तैयार की। इसमें विद्यार्थियों की शिक्षा, संस्कार, अनुशासन, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर चर्चा की गई।
बैठक का उद्देश्य विद्यालयों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक बेहतर एवं व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार करना रहा।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में देव प्रसाद तिवारी, सचिव सरस्वती ग्राम शिक्षा विकास समिति जिला जांजगीर-चांपा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेश सिंह बनाफर, सरपंच प्रतिनिधि ग्राम पंचायत भैंसदा ने की। बैठक का संचालन नवल किशोर तिवारी, जिला समन्वयक जिला जांजगीर-चांपा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य मनीष सिंह बनाफर ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर जिला समिति के अध्यक्ष कोमल सिंह ठाकुर, प्रांतीय समिति के पूर्व कोषाध्यक्ष कमल देवांगन, बद्री प्रसाद केशरवानी, जिला समिति उपाध्यक्ष देव भूषण सिंह, जिला समिति सदस्य रौशनी राठौर, संकुल प्रमुख तीजराम कौशिक, हीराराम सूर्यवंशी सहित जिले के विभिन्न सरस्वती शिशु मंदिरों के आचार्य एवं दीदी मौजूद रहे। बैठक का समापन आगामी शैक्षणिक सत्र में तैयार कार्ययोजना को प्रभावी रूप से लागू करने के संकल्प के साथ हुआ।



