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गुरु पूर्णिमा पर श्री दूधाधारी मठ में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया गुरु का आशीर्वाद

रायपुर। राजधानी रायपुर स्थित श्री दूधाधारी मठ एवं जैतू साव मठ में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह 9 बजे से प्रारंभ हुए पूजा-अर्चना और गुरु वंदन के कार्यक्रम देर शाम तक निरंतर चलते रहे। प्रदेशभर से पहुंचे शिष्य, संत-महात्मा एवं श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दिनभर मठ परिसर में भक्ति, श्रद्धा और गुरु-शिष्य परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
महामंडलेश्वर राजेश्री महंत रामसुन्दर दास जी महाराज ने सबसे पहले मठ मंदिर के पुजारियों के साथ श्री दूधाधारी मठ के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी बलभद्र दास जी
महाराज की समाधि स्थल पर विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात उन्होंने अपने गुरुदेव राजेश्री महंत वैष्णव दास जी महाराज का पूजन कर उनका आशीर्वाद स्मरण किया और फिर श्रद्धालुओं को दर्शन देने के लिए आसन पर विराजमान हुए।
इसके बाद मठ के पुजारियों, संत-महात्माओं तथा दूर-दराज से पहुंचे शिष्य परिवार के लोगों ने क्रमवार गुरु पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं का यह सिलसिला घंटों तक चलता रहा। इस दौरान अनेक श्रद्धालुओं ने महंत रामसुन्दर दास जी महाराज से दीक्षा ग्रहण कर गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त किया।
इस अवसर पर अपने संदेश में महामंडलेश्वर राजेश्री महंत रामसुन्दर दास जी महाराज ने कहा कि श्री दूधाधारी मठ की स्थापना स्वामी बलभद्र दास जी महाराज ने की थी। उन्होंने आजीवन केवल दूध का आहार ग्रहण किया, इसलिए वे “दूधाधारी महाराज” के नाम से विख्यात हुए। उन्होंने कहा कि यह मठ सिद्ध महात्माओं की तपोभूमि है और वर्षों से यहां शिष्य परिवार की परंपरा निरंतर चली आ रही है। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु यहां पहुंचकर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपने जीवन को धन्य बनाते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।
मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव ने गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भारतीय धर्मशास्त्रों में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। उन्होंने श्रीरामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई—
“गुरु बिन भव निधि तरई न कोई।
जौ बिरंचि संकर सम होई।।”
का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन रूपी भवसागर से पार होने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए गुरु का मार्गदर्शन और दीक्षा अत्यंत आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि इसी अवसर पर जैतू साव मठ में भी गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। यहां पूर्वाचार्यों का स्मरण करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की गई तथा श्रद्धालुओं ने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम में अजय तिवारी, महेंद्र अग्रवाल, रामकृष्ण अग्रवाल, रमेश यदु, विजय पाली, रामकृष्ण पाली, अशोक तिवारी, सुखराम दास, रामछवि दास, सुरेश शर्मा, रत्नेश पाली, यश पांडे, रामप्रिय दास, राम मनोहर दास, राम अवतार दास, राम शिरोमणि दास, रामलोचन दास, कमलेश सिंह, प्रमोद सिंह, हर प्रसाद साहू, बजरंग शर्मा, रेखेंद्र तिवारी, कल्याण सिंह बर्मन, श्लोक शर्मा, हर्ष दुबे, सुशील साहू, तुषार साहू, लवकुश साहू, जितेंद्र वैष्णव, ललित वैष्णव, कामता फेकर, पिकेश जायसवाल, ज्ञानेश शर्मा, रामखिलावन तिवारी, जगदीश यादव, जितेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मुख्य धार्मिक अनुष्ठान दोपहर तक संपन्न हो गए, लेकिन गुरु के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं का आगमन देर शाम तक लगातार जारी रहा। पूरे दिन मठ परिसर भक्तिमय वातावरण, वैदिक मंत्रोच्चार और गुरु वंदना से गुंजायमान रहा।



