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Government Ethics Crackdown: शेयर बाजार नियमों के उल्लंघन में फंसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप; आचार संहिता विभाग ने लगाया जुर्माना

वॉशिंगटन/दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी वित्तीय गतिविधियों और शेयर बाजार में किए गए बड़े निवेशों को लेकर कानूनी व राजनीतिक विवादों में घिर गए हैं। अमेरिकी ऑफिस ऑफ गवर्नमेंट एथिक्स (OGE) द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप पर तय समयसीमा के भीतर अपने शेयर ट्रेडिंग की जानकारी सार्वजनिक न करने के कारण वित्तीय जुर्माना लगाया गया है। इस Stock Trading Violation Row (शेयर ट्रेडिंग उल्लंघन विवाद) के सामने आने के बाद अमेरिकी संसद से लेकर मीडिया तक में वित्तीय शुचिता को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है।

क्या है पूरा मामला और नियम? (Delayed Disclosure Penalty)

अमेरिकी वित्तीय नियमों के अनुसार, सरकार के शीर्ष पदों पर बैठे किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी के लिए 1,000 डॉलर से अधिक मूल्य के किसी भी शेयर लेनदेन (खरीद या बिक्री) की जानकारी 45 दिनों के भीतर सार्वजनिक करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने इसी वर्ष फरवरी में दिग्गज तकनीकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और अमेजन (Amazon) के लगभग 50 लाख से लेकर 2.5 करोड़ डॉलर तक के शेयर बेचे थे। इसके ठीक बाद मार्च में उन्होंने दोबारा इन्हीं कंपनियों के शेयरों में मोटी रकम निवेश की। ट्रंप इस बेहद संवेदनशील और बड़े लेन-देन की जानकारी तय समयसीमा (45 दिन) के भीतर सार्वजनिक करने में पूरी तरह विफल रहे, जिसके कारण उन पर Delayed Disclosure Penalty के तहत जुर्माना ठोंका गया है।

पहली बार नहीं, पहले भी तोड़ चुके हैं नियम (Government Ethics Crackdown)

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दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि नियमों को ताक पर रखने की राष्ट्रपति ट्रंप की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी साल मार्च में और पिछले वर्ष अगस्त के महीने में इसी तरह वित्तीय जानकारियों में देरी करने पर आचार संहिता विभाग उन पर जुर्माना लगा चुका है। हालांकि, जुर्माने की राशि महज 200 डॉलर है, लेकिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा बार-बार नियमों की अनदेखी करना उनके राजनीतिक ग्राफ को नुकसान पहुंचा रहा है।

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एनवीडिया डील से गहराया इनसाइडर ट्रेडिंग का शक (Insider Trading Suspicion)

इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर और हैरान करने वाला मोड़ ‘एनवीडिया’ (Nvidia) कंपनी के शेयरों की खरीद से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने 10 फरवरी को एनवीडिया के शेयर खरीदे थे। इसके ठीक कुछ दिनों बाद, एनवीडिया ने फेसबुक की पैरेंट कंपनी ‘मेटा प्लेटफॉर्म्स’ के साथ एक बहुत बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए मेगा-पार्टनरशिप की घोषणा कर दी।

इस बड़ी डील की खबर आते ही एनवीडिया के शेयरों में 2.5 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया, जिससे ट्रंप को सीधे तौर पर बड़ा वित्तीय फायदा हुआ। अब विरोधी दल और अमेरिकी मीडिया यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या राष्ट्रपति होने के नाते ट्रंप को इस गुप्त व्यावसायिक सौदे की जानकारी पहले से थी?

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पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल (Financial Transparency Debate)

राष्ट्रपति ट्रंप के इस रवैये ने अमेरिकी राजनीति में Financial Transparency Debate को एक बार फिर हवा दे दी है। आलोचकों का कहना है कि जब देश का राष्ट्रपति ही नियमों का पालन नहीं करेगा, तो आम निवेशकों का बाजार पर भरोसा कैसे कायम रहेगा। इस हाई-प्रोफाइल मामले के बाद अब व्हाइट हाउस और ट्रंप के सलाहकारों पर इस मुद्दे पर आधिकारिक सफाई देने का भारी दबाव बन गया है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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