पंचायतों में सचिवों को अतिरिक्त प्रभार देने का चल रहा है खेल, राजनीतिक दबाव या अफसरों की मेहरबानी, नियम विरुद्ध जैजैपुर जनपद सीईओ कर रही काम, पढ़े पूरी खबर

पंचायतों में सचिवों को अतिरिक्त प्रभार देने का चल रहा है खेल,
राजनीतिक दबाव या अफसरों की मेहरबानी
लाभ दिलाने व राजनीवतिक दबाव के साथ अफसरों की मिलीभगत से एक-एक पंचायत सचिव को अनेको पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार
नियम विरुद्ध जैजैपुर जनपद सीईओ कर रही काम
सक्ती। जिले के जैजैपुर जनपद पंचायत अंतर्गत 78 पंचायतों में कुल 75 पंचायत सचिव नियुक्त हैं। वहीं विभाग के अफसर सचिव की कमी का रोना रोकर पंचायतों में सचिवों को अतिरिक्त प्रभार देकर प्रशासनिक कार्यों के सुचारू संचालन की बात कहते हैं, लेकिन प्रभार वाले पंचायतों की स्थिति और दूरी देखें तो एक पंचायत से दूसरे पंचायत की दूरी 15 से 20 किलोमीटर है। जबकि शासन के नियमानुसार अतिरिक्त प्रभार वाले ग्राम पंचायत मूल ग्राम पंचायत से लगे रहना चाहिए।
पंचायतों में सचिवों को अतिरिक्त प्रभार देने का चल रहा है खेल, राजनीतिक दबाव या अफसरों की मेहरबानी
अतिरिक्त प्रभार का खेल ऐसा कि नजदीक के पंचायत सचिव को प्रभार न देकर दूर पंचायत में पदस्थ सचिव को प्रभार देकर लाभ दिलाने की कोशिश विभाग के अफसर राजनीतिक दबाव में करते रहे हैं।
इसके चलते लगातार कई महीनों तक पंचायत भवन बंद पड़े रहते हैं और कागजों में सरकारी राशि का बंदरबांट हो रहा है। इसकी वजह से आमजनों को जन्म व मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए महीनों इंतज़ार के साथ पंचायत सचिव के समक्ष मिन्नतें करनी पड़ती है
पंचायतों में होने वाले बैठक भी जनप्रतिनिधियों की राय के मुताबिक न होकर सचिवों के हिसाब से होता है। शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन भी समय से नहीं हो पाता है।
कुछ ऐसे सचिवों को हटाने की मांग कलेक्टर से लेकर तमाम अफसरों से की जा चुकी है लेकिन इसके बाद भी अफसर इन्हें इसलिए नहीं हटा पाते हैं क्योंकि सरकारी पैसे में होने वाले बंदरबांट में उन्हें उनका हिस्सा भी मिल जाता होगा या नेताओ को मिलता होगा इसलिए नियम विरुद्ध जैजैपुर की सीईओ अपने नौकरी को दांव में लगाकर कार्य कर रहे है। यही नही
इसमें जिला पंचायत के अफसर भी शामिल हो सकता है। वहीं जब ग्रामीण अफसरों से शिकायत करते हैं तो अधिकारी जांच और फिर दबी जुबान में राजनीतिक दबाव की बात करते हैं। यहां की सीईओ ने राजनीतिक दबाव की वेतन मिलने की बात कही जाती है
जांच के नाम पर सिर्फ कमेटी बनती है।
जनपद जैजैपुर के कई पंचायत सचिव के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता, स्तरहीन निर्माण, पूर्व में स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित शौचालय व अन्य मामलों में ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने शिकायत जनपद व जिला पंचायत में प्रस्तुत की। शिकायतों की जांच के नाम पर टीम भी गठित होती है, लेकिन न जांच और न ही किसी पर कोई कार्यवाही हुई है।
कोटेतरा तत्कालीन सचिव को सीईओ ने मानसिक रूप से कर रहे प्रताड़ित करने का आरोप
आपको बता दे कि विशेष सूत्रों से जानकारी के अनुसार जैजैपुर जनपद की सीईओ राजनीतिक दबाव में आकर राज्य सरकार की नियम से विपरीत या पँचायत राज अधिनियम की अवहेलना करते हुए जिला पंचायत की अधिकारी के आदेश की पालन नही करते हुए जनपद सीईओ ने खुद की आदेश को पालन करने के लिए एक सचिव को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है और जनपद कार्यालय में अटैच कर दिया गया है मामला यह है कि ग्राम पंचायत कचंदा की सचिव को कोटेतरा स्थान्तरण सीईओ जिला पंचायत ने किया था इसकी पालन करते हुए कचंदा सचिव ने कोटेतरा में आकर ज्वांइनिंग कर लिया गया था और मेडिकल छुट्टी पर चले गए लेकिन जनपद सीईओ को रास नही आई और करौवाडीह के पँचायत सचिव को कोटेतरा पँचायत की अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है और कोटेतरा सचिव को जनपद कार्यालय में अटैच कर दिया गया है जबकि जैजैपुर जनपद पंचायत अंतर्गत पांच से सात ग्राम पंचायत में एक ही सचिवों को दो ग्राम पंचायत का अतिरिक्त प्रभार सौपे हुए है जो काम करने वाले सचिव को जनपद पंचायत कार्यालय में अटैच करके रखे है यहां जनपद सीईओ ने नियम की विपरीत हटकर खुद नया नियम लागू कर कार्य कर रही है जो कि अनुचित है ऐसे अधिकारी पर राज्य सरकार को संज्ञान लेने की जरूरत है।



