Reg No. CG-06-0026209
IMG-20250604-WA0015-1
IMG-20250604-WA0014-1
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-03).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-02).jpg
Mukesh tiwari janjgir-champa (26 January 2026) (Page-01).jpg
छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पादेश- विदेशराज्य एवं शहररायपुर

मिडिल ईस्ट जंग का असर! भारत में LPG संकट गहराया, गैस सिलेंडर महंगे

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ-साथ भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से एलपीजी सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे देश में गैस संकट की आशंका बढ़ गई है।

होर्मुज बंद होने से सप्लाई चेन बाधित
करीब 48 दिनों से जारी संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया, जो वैश्विक ऊर्जा परिवहन का प्रमुख मार्ग है। इसके कारण एलपीजी और अन्य ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई बाधित हो गई। साथ ही, ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों से उत्पादन भी प्रभावित हुआ है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

See also  पुलिस की पहली प्राथमिकता महिलाओं की सुरक्षा होनी चाहिए : रतन लाल डांगी, महिला सुरक्षा एवं उनके विरुद्ध घटित अपराध के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यशाला का आयोजन....

भारत पर सबसे ज्यादा असर क्यों?
भारत अपनी लगभग 60% LPG जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिसमें से करीब 90% सप्लाई होर्मुज मार्ग से होकर आती है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने का सीधा असर भारत पर पड़ा है और गैस आपूर्ति कमजोर हो गई है।

होर्मुज में फंसे जहाज, बढ़ी चिंता
मौजूदा हालात में करीब 15 जहाज होर्मुज क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे सप्लाई और धीमी हो गई है। तनावपूर्ण स्थिति के चलते इन जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।

गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी
सप्लाई प्रभावित होने का असर कीमतों पर भी पड़ा है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में करीब 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर में लगभग 115 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे आम जनता और व्यवसायों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

Advertisment

कब मिलेगी राहत?
फिलहाल इस संकट के खत्म होने को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि हालात सामान्य होने में 1 महीने से लेकर 1 साल तक का समय लग सकता है, जो युद्ध की स्थिति और सप्लाई चेन की बहाली पर निर्भर करेगा।

See also  सीएचसी नवागढ़ में जुड़वा बच्चों का कराया नॉर्मल प्रसव... डिलवरी के बाद जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ...

सरकार की तैयारी और चुनौती
भारत सरकार इस संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक स्रोतों और सप्लाई चैन को मजबूत करने के प्रयास में जुटी है। हालांकि, वैश्विक हालात पर निर्भरता के कारण यह चुनौती आसान नहीं है

मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति कितनी संवेदनशील है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, जहां आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!