बुरी फंसी सरोज पांडेय! लगा चुनाव याचिका, शपथ पत्र में गलत जानकारी देने का आरोप, जानें पूरा मामला

न्यूज डेस्क : छत्तीसगढ़ में वर्ष 2018 के राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। कांग्रेस के पराजित उम्मीदवार लेखराम साहू की ओर से प्रस्तुत किए गए सभी गवाहों की गवाही बुधवार को समाप्त हो गई। इसके साथ ही यह मामला अब अगले निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ गया है।
अब सरोज पांडेय की ओर से पेश होंगे गवाह
कांग्रेस उम्मीदवार के गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी और तत्कालीन विजेता सरोज पांडेय की ओर से अपने निर्वाचन के समर्थन में गवाह प्रस्तुत किए जाएंगे। इन गवाहों की गवाही और प्रति-परीक्षण की प्रक्रिया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में की जाएगी।
अदालत में दर्ज हुई विधानसभा महासचिव की गवाही
इस मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा के तत्कालीन महासचिव चंद्रशेखर गंगराड़े की गवाही दर्ज की गई। इसके साथ ही लेखराम साहू की ओर से प्रस्तुत किए गए कुल नौ गवाहों की प्रक्रिया पूरी हो गई।
क्या है राज्यसभा चुनाव विवाद का पूरा मामला?
मार्च 2018 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यसभा की एक रिक्त सीट के लिए चुनाव संपन्न हुआ था। इस चुनाव में—
- भाजपा की ओर से सरोज पांडेय
- कांग्रेस की ओर से लेखराम साहू
उम्मीदवार थे। चुनाव परिणाम में सरोज पांडेय विजयी घोषित हुई थीं।
शपथ पत्र में गलत जानकारी देने का आरोप
नामांकन प्रक्रिया के बाद लेखराम साहू ने सरोज पांडेय पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने निर्वाचन शपथ पत्र में—
- गलत जानकारी दी
- कुछ तथ्यों को छिपाया
- एक बैंक खाते की जानकारी नहीं दी
- इन आरोपों को आधार बनाकर चुनाव को चुनौती दी गई।
18 विधायकों के मतदान पर क्यों हुआ था विवाद?
कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि भाजपा के—
- 11 विधायक संसदीय सचिव 7 विधायक निगम-मंडलों में अध्यक्ष/उपाध्यक्ष
थे, जिससे वे लाभ के पद पर आसीन थे। इसी आधार पर इन 18 विधायकों को मतदान से वंचित करने की मांग की गई थी। हालांकि राज्यसभा निर्वाचन अधिकारी ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया था।
चुनाव आयोग तक पहुंचा मामला, फिर भी हुआ मतदान
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्यपाल से भी शिकायत की थी, लेकिन इसके बावजूद सभी 18 विधायकों ने मतदान किया और सरोज पांडेय को विजेता घोषित किया गया।



