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CG Breaking News : पूर्व आबकारी आयुक्त और सप्लायरों समेत 18 ठिकानों पर EOW-ACB का छापा…

रायपुर। रविवार सुबह राजधानी समेत कई जिलों में एसीबी–ईओडब्ल्यू की टीमों ने अचानक दबिश देकर पूरे सिस्टम में हड़कंप मचा दिया। शराब घोटाले और डीएमएफ फंड से जुड़े लेनदेन की जांच को लेकर लगभग 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई है। रायपुर के रामा ग्रीन कॉलोनी में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के आवास पर तलाशी जारी है, जहां अधिकारी उनके पुराने फाइल, टेंडर डॉक्यूमेंट और डिजिटल डेटा की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

इधर अमलीडीह स्थित ला-विस्टा कॉलोनी में कारोबारी हरपाल अरोड़ा के घर भी दबिश दी गई है। टीम ने यहां संदिग्ध भुगतान, सप्लाई चेन और आबकारी अनुबंधों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। वहीं बिलासपुर में कारोबारी अशोक टुटेजा के कई ठिकानों पर छापा पड़ा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सैकड़ों पन्नों के पुराने कॉन्ट्रैक्ट, कंप्यूटर हार्डडिस्क और फोन डेटा कब्जे में लिए गए हैं।

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सूत्र बताते हैं कि आज की कार्रवाई केवल रायपुर-बिलासपुर तक सीमित नहीं है। अंबिकापुर, कोंडागांव, जगदलपुर और दुर्ग में भी टीमों ने दबिश दी है। माना जा रहा है कि पिछले कई दिनों से इन स्थानों की निगरानी की जा रही थी और रविवार सुबह इसे सीक्रेट ऑपरेशन की तरह अंजाम दिया गया।

शराब घोटाले की जड़ तक पहुंचने की कोशिश
2019 से 2023 के बीच कांग्रेस शासनकाल में हुए कथित शराब घोटाले को लेकर पहले ही कई बड़े चेहरे गिरफ्तारी झेल चुके हैं। आरोप है कि बदली हुई नीति के जरिए कुछ चुनिंदा सप्लायरों को फायदा पहुंचाया गया, वहीं नोएडा की एक कंपनी से नकली होलोग्राम–सील बनवाकर महंगी शराब सरकार की जानकारी के बिना बेची जाती रही।

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इस कथित खेल से शासन को 2165 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि रकम किस-किस तक पहुंची—इसकी परतें अब भी खुल रही हैं।

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अब तक पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व IAS अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर समेत कई अधिकारी गिरफ्तार हो चुके हैं। इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अफसर भी आरोपी बनाए गए थे, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली।

आज की छापेमारी क्यों अहम?
जांच एजेंसियों को शक है कि पुराने अधिकारियों और सप्लायरों के पास अभी भी महत्वपूर्ण वित्तीय रिकॉर्ड, अनुबंध और डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं, जो नेटवर्क, पैसों के ट्रांसफर और सप्लाई चैन की असल तस्वीर साफ कर सकते हैं। इसी वजह से आज की कार्रवाई को घोटाले की “दूसरी बड़ी फेज़–एक्शन” माना जा रहा है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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