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30 साल बाद सितंबर में बनेगा IPO का नया रिकॉर्ड, आंकड़े कर देंगे हैरान

भारत में करीब 30 साल के बाद आईपीओ लेकर नया रिकॉर्ड बनने बनने वाला है. वास्तव में इस महीने में करीब 25 कंपनियां शेयर बाजार में डेब्यू करने जा रही हैं. इसका मतलब है कि करीब 30 साल के बाद आईपीओ के लिहाज से सितंबर सबसे बिजी महीना होने रहा है. ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित प्राइमडेटाबेस के आंकड़ों के अनुसार, आईपीओ में पिछली बार इतनी तेजी 1997 में देखी गई थी, जब 28 कंपनियों ने बाजार में कदम रखा था. इन कंपनियों द्वारा सामूहिक रूप से 12,000 करोड़ रुपए से अधिक जुटाने की उम्मीद है. आईपीओ की बाढ़ सिर्फ मेन मार्केट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि छोटे एसएमई मार्केट तक भी फैली हुई है. अकेले इस हफ्ते, 28 आईपीओ बाजार में आए, और अगले हफ्ते के पहले दो दिनों में 18 इश्यू खुलने वाले हैं.

इन इश्यूज की डिमांड मिली-जुली है. हालांकि ज़्यादातर आईपीओ बाजार में आने में कामयाब हो रहे हैं, लेकिन सब्सक्रिप्शन संख्या मध्यम बनी हुई है, जो संभवतः बाजार में आईपीओ की भारी संख्या के कारण जेनरेट क्रैश क्राइसिस के कारण है. साल के अंत में आईपीओ की भीड़ कोई नई बात नहीं है. पिछले साल भी, कंपनियों ने साल के अंत में सार्वजनिक बाज़ार में कदम रखा था, हालांकि संख्या कम देखने को मिली थी. कंपनियां आमतौर पर तिमाही समाप्त होने से पहले धन जुटाने का काम पूरा करने का लक्ष्य रखती हैं, क्योंकि अक्टूबर तक डील्स को टालने के लिए ऑडिटेड इनकम के एक और दौर के साथ ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस को अपडेट करने की आवश्यकता होगी.

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विदेशी निवेशक लगा रहे आईपीओ में पैसा
विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत कारोबारी आउटलुक, मजबूत डॉमेस्टिक लिक्विडिटी, तेजी से बढ़ते शेयर बाज़ार और आकर्षक वैल्यूएशन के कांबिनेशन ने कंपनियों के पब्लिक होने के लिए एक आकर्षक स्थिति पैदा की है. डीएएम कैपिटल के सीईओ धर्मेश मेहता के अनुसार विदेशी निवेशकों ने भी भारतीय ऑफर्स में ज्यादा रुचि दिखाई है, जिससे आत्मविश्वास और बढ़ा है. इस साल सेकंडरी मार्केट में लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपए के शुद्ध विक्रेता होने के बावजूद, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने आईपीओ और योग्य संस्थागत प्लेसमेंट में लगभग 42,900 करोड़ रुपए (4.8 अरब डॉलर) का निवेश किया है. विश्लेषकों का कहना है कि यह अंतर इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे विदेशी संस्थागत निवेशक ब्रॉडर मार्केट के बजाय नई इक्विटी शेयरों पर चुनिंदा रूप से दांव लगा रहे हैं. आईपीओ में तेजी सेकंडरी मार्केट में कमज़ोर प्रदर्शन के बावजूद देखी जा रही है, जहां इस साल सेंसेक्स और निफ्टी में मुश्किल से ही कोई उछाल आया है.

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बाजार से जुटा चुके हैं 68,000 करोड़
भारत के दुनिया का सबसे बिजी आईपीओ मार्केट होने की उम्मीद है. 2024 में, कंपनियों ने 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक जुटाए, और 2025 में, यह गति काफी हद तक बनी रहेगी, अगस्त तक 68,000 करोड़ रुपए जुटाए जा चुके हैं. प्राइम डेटाबेस द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि 1.14 लाख करोड़ रुपए के इश्यू को पहले ही रेगुलेटरी मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 1.64 लाख करोड़ रुपए के अन्य इश्यू लंबित हैं. रेगुलेब्री परिवर्तनों ने भी इसमें योगदान दिया है. सेबी अनुमोदनों को तेज करने, समयसीमा को कम करने और जारीकर्ताओं को बाज़ार की खिड़कियों का अधिक कुशलता से उपयोग करने में सक्षम बनाने के लिए एआई-संचालित दस्तावेज़ स्कैनिंग का उपयोग कर रहा है.

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कतार में कई बड़े नाम
आने वाले दिनों में कई बड़ी कंपनियों की लिस्टिंग शेयर बाजार में होने की संभावना है. जिसमें टाटा कैपिटल, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया, एनएसई, हीरो फिनकॉर्प, और ग्रो, फोनपे, मीशो, शैडोफैक्स और वीवर्क इंडिया जैसी कई कंपनियां शामिल हैं.

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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