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बलिदानी मुदस्सिर शेख की मां शमीमा अख्तर को भेजा जा रहा पाकिस्तान, 45 साल बाद उठा नागरिकता का सवाल. शौर्य चक्र से सम्मानित मां का दर्द!

Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के बारामुला में 22 मार्च 2022 को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के तीन खूंखार आतंकियों को ढेर करने वाले शौर्य चक्र विजेता कांस्टेबल मुदस्सिर अहमद शेख की मां शमीमा अख्तर को भारत सरकार पाकिस्तान निर्वासित करने जा रही है.

यह निर्णय शमीमा के गुलाम जम्मू-कश्मीर (PoK) मूल की नागरिकता के आधार पर लिया गया है. भले ही उनकी शादी 45 साल पहले कश्मीर में हुई थी. इस फैसले ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे देश में एक भावनात्मक और नैतिक बहस छेड़ दी है.

45 साल पहले कश्मीर में बसीं

शमीमा अख्तर जो गुलाम जम्मू-कश्मीर से हैं. 1960 में जम्मू-कश्मीर पुलिस के मकसूद अहमद से शादी के बाद कश्मीर में बस गई थीं. उनके चाचा मोहम्मद यूनुस ने बताया ‘शमीमा का परिवार 1947 में PoK चला गया था. लेकिन हमारा खानदान एक ही है. शादी के बाद शमीमा वीजा पर भारत आईं और उनकी नागरिकता को लेकर उच्च न्यायालय में केस जीता गया. जिसके बाद उन्हें स्थायी रूप से कश्मीर में रहने का अधिकार मिला.’ 45 साल तक बिना किसी विवाद के भारत में रहने वाली शमीमा को अब 59 अन्य PoK और पाकिस्तानी नागरिकों के साथ अमृतसर के वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान भेजा जा रहा है.

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मुदस्सिर शेख-बिंदास जिन्होंने देश के लिए दी जान

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मुदस्सिर अहमद शेख जिन्हें उनके दोस्त और अधिकारी बिंदास कहते थे. जम्मू-कश्मीर पुलिस के आतंक-निरोधी दस्ते का हिस्सा थे. 22 मार्च 2022 को बारामुला के कुंजर में जैश-ए-मोहम्मद के पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट के तीन आतंकियों के साथ मुठभेड़ में उन्होंने वीरगति प्राप्त की. उनकी बहादुरी के लिए मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया. जिसे मई 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शमीमा अख्तर को सौंपा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी 5 अक्टूबर 2022 को उनके घर जाकर श्रद्धांजलि दी थी. बारामुला के मुख्य चौराहे का नामकरण बिंदास चौराहा उनके सम्मान में किया गया है.

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60 लोग, अधिकांश पूर्व आतंकियों की पत्नियां

अधिकारियों के अनुसार जिन 60 लोगों को निर्वासित किया जा रहा है. उनमें ज्यादातर गुलाम जम्मू-कश्मीर की वे महिलाएं हैं. जिनकी शादी कश्मीर में हुई. इनमें कुछ 2010 की पुनर्वास नीति के तहत लौटे पूर्व आतंकियों की पत्नियां और बच्चे शामिल हैं. ये लोग श्रीनगर (36), बारामुला (9), कुपवाड़ा (9), बडगाम (4), और शोपियां (2) में रह रहे थे. इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच अमृतसर ले जाया जाएगा. जहां से वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान भेजा जाएगा. श्रीनगर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा शमीमा अख्तर सहित कुछ मामलों में गृह मंत्रालय से संपर्क किया जा रहा है.

परिवार और समाज का आक्रोश ‘यह अन्याय है’

मुदस्सिर के चाचा मोहम्मद यूनुस ने इस फैसले को विडंबनापूर्ण और अन्यायपूर्ण बताया. उन्होंने कहा जिस मां ने शौर्य चक्र विजेता को जन्म दिया. उसे पाकिस्तानी बताकर निर्वासित करना कहां का न्याय है? समाजसेवी बिलाल बशीर ने तर्क दिया. गुलाम जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में इसके लिए 24 सीटें आरक्षित हैं. PoK से शादी करके आई महिलाओं को विदेशी नहीं माना जाना चाहिए. स्थानीय समुदाय और सोशल मीडिया पर इस निर्णय के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है. खासकर तब जब शमीमा का बेटा देश के लिए शहीद हुआ.

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शमीमा अख्तर का मामला भारत की नागरिकता नीतियों और गुलाम जम्मू-कश्मीर के निवासियों के अधिकारों पर सवाल उठाता है. 2010 की पुनर्वास नीति के तहत कई पूर्व आतंकी और उनके परिवार भारत लौटे थे लेकिन उनकी नागरिकता का मुद्दा अब तक अनसुलझा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में मानवीय और राष्ट्रीय योगदान (जैसे मुदस्सिर का बलिदान) को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाना चाहिए. गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार शमीमा के मामले में अंतिम निर्णय से पहले उनकी स्थिति की समीक्षा की जा रही है.

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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