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Pahalgam Terror Attack : हमले के बाद एक्शन मोड में केंद्र सरकार! भारत-पाकिस्तान के बीच जंग हुई तो कौन-सा देश देगा किसका साथ? जान लीजिए जवाब…

नई दिल्ली। Pahalgam Terror Attack : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले में भारत के 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। हमले के बाद से केंद्र सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में है और साफ कर चुकी है कि इस नापाक हरकत के पीछे जो भी है, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

सरकार ने हमले के बाद कई बड़े कदम उठाए हैं– पाकिस्तान के नागरिकों के भारत में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, सिंधु जल संधि को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, और पाकिस्तानी दूतावास की भूमिका पर भी गंभीर समीक्षा हो रही है। इन फैसलों के बाद पाकिस्तान से भी भड़काऊ प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

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जंग की आशंका: भारत को दो मोर्चों पर करना पड़ सकता है सामना?

अगर हालात और बिगड़े तो भारत को पाकिस्तान के साथ-साथ चीन से भी टकराव की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। चीन, जो लंबे समय से पाकिस्तान का रणनीतिक साझेदार रहा है, युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान का साथ दे सकता है। हालांकि, इतिहास बताता है कि चीन ने 1965 और 1971 की लड़ाइयों में सीधे हस्तक्षेप नहीं किया था। अब स्थिति काफी बदल चुकी है, भारत अब 1962 वाला भारत नहीं रहा– तकनीक, सैन्य शक्ति और वैश्विक कूटनीति में उसने बहुत लंबी छलांग लगाई है।

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कौन-कौन देश आएंगे भारत के साथ?

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भारत आज वैश्विक स्तर पर एक बड़ी ताकत के रूप में उभर चुका है। अमेरिका, रूस और इजरायल जैसे देश भारत के प्रमुख रणनीतिक साझेदार हैं।

अमेरिका: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी बहुत मजबूत हो चुकी है। पाकिस्तान को अमेरिका से ज्यादा समर्थन मिलने की संभावना बेहद कम है, खासकर आतंकवाद के इतिहास को देखते हुए।

रूस: भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा संबंध मजबूत हैं। कारगिल से पहले और बाद के कई मौकों पर रूस ने भारत का साथ दिया है।

इजरायल: कारगिल युद्ध के दौरान इजरायल ने भारत की तकनीकी और सामरिक रूप से मदद की थी, और मौजूदा दौर में भी दोनों देशों के रिश्ते गहरे हैं।

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पाकिस्तान की मुश्किलें: अकेला पड़ सकता है इस्लामाबाद

ऐसे हालात में पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि उसे भारत के खिलाफ समर्थन जुटाना मुश्किल होगा। चीन के अलावा शायद ही कोई देश उसके साथ खड़ा हो। इस्लामिक देशों से मदद की उम्मीद जरूर की जा सकती है, लेकिन भारत के साथ इन देशों के बढ़ते संबंधों को देखते हुए उनकी भूमिका सीमित ही रहेगी।

अगर चीन ने भी तटस्थता अपनाई, तो पाकिस्तान को युद्ध के दौरान भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है– बलूचिस्तान से लेकर पीओके तक भारत की सैन्य पकड़ मजबूत हो सकती है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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