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डिजिटल प्लेटफॉर्म पर “अश्लील और हिंसक” सामग्री रोकने, नए कानूनी ढांचे पर विचार कर रहा मंत्रालय…

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर “अश्लील और हिंसक” सामग्री को रोकने के लिए नए कानूनी ढांचे पर विचार कर रहा सूचना और प्रसारण मंत्रालय

मुंबई। सूचना और प्रसारण मंत्रालय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर “अश्लील और हिंसक” सामग्री को नियंत्रित करने के लिए मौजूदा कानूनी प्रावधानों की जांच कर रहा है और एक नए कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर विचार कर रहा है। यह कदम समाज में बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है, जहां “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के संवैधानिक अधिकार का दुरुपयोग कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अश्लील और हिंसक सामग्री प्रदर्शित की जा रही है।

संसदीय पैनल को मंत्रालय का जवाब

मंत्रालय ने संसदीय समिति को दिए अपने जवाब में कहा कि मौजूदा कानूनों के तहत कुछ प्रावधान हैं, लेकिन ऐसी हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त और प्रभावी कानूनी ढांचे की मांग बढ़ रही है। मंत्रालय ने कहा, “इस मंत्रालय ने इन घटनाक्रमों को ध्यान में लिया है और मौजूदा कानूनी प्रावधानों की जांच और एक नए कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर विचार कर रहा है।” संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी समिति, जिसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद निशिकांत दुबे कर रहे हैं, को मंत्रालय ने यह जानकारी दी। समिति की अगली बैठक 25 फरवरी को होनी है, जिसमें मंत्रालय विस्तृत नोट प्रस्तुत करेगा।

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नई तकनीक और मीडिया प्लेटफॉर्म के बीच चुनौती

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समिति ने 13 फरवरी को मंत्रालय से पूछा था कि नई तकनीक और मीडिया प्लेटफॉर्म के उभार के बाद विवादास्पद सामग्री पर अंकुश लगाने के लिए मौजूदा कानूनों में क्या संशोधन की आवश्यकता है। पारंपरिक प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विपरीत, जो विशिष्ट कानूनों के तहत आते हैं, इंटरनेट से चलने वाले नए मीडिया सेवाओं जैसे कि ओटीटी प्लेटफॉर्म या YouTube के लिए कोई विशिष्ट नियामक ढांचा नहीं है। इसके कारण कानूनों में संशोधन की मांग उठ रही है।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रणवीर अल्लाबदिया का मामला यह मुद्दा तब और गर्माया जब सोशल मीडिया प्रभाविता रणवीर अल्लाबदिया के अश्लील टिप्पणियों ने व्यापक निंदा को जन्म दिया। उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, और उनकी माफी ने विवाद को कम करने में बहुत कम मदद की है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की, लेकिन उनकी अश्लील टिप्पणियों पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी भी की।

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नए कानूनी ढांचे की आवश्यकता

मंत्रालय ने कहा कि कई उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट, सांसद और राष्ट्रीय महिला आयोग जैसे वैधानिक निकायों ने इस मुद्दे पर बात की है। हालांकि, कुछ लोगों को चिंता है कि नए प्रावधानों का उपयोग असंबंधित कारणों से सामग्री को सेंसर करने के लिए किया जा सकता है। लेकिन, अल्लाबदिया जैसे मामलों से उत्पन्न लगातार आक्रोश ने मौजूदा कानूनों में संशोधन या नए कानून बनाने की मांग को बढ़ा दिया है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने के लिए एक नए कानूनी ढांचे पर विचार कर रहा है। यह कदम समाज में बढ़ती चिंताओं और नई तकनीक के उभार के बीच उठाया गया है। अब देखना होगा कि मंत्रालय इस दिशा में क्या कदम उठाता है और कैसे संतुलित तरीके से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामग्री के नियमन के बीच संतुलन बनाया जाता है।

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Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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