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छत्तीसगढ़जांजगीर-चाम्पा

राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन को किया जा रहा प्रोत्साहित… श्रमिकों के सम्मान में बोरे-बासी खाकर मनाया जाएगा श्रमिक दिवस…

राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन को किया जा रहा प्रोत्साहित

श्रमिकों के सम्मान में बोरे-बासी खाकर मनाया जाएगा श्रमिक दिवस

कलेक्टर ने सभी जनप्रतिनिधि, समाजिक संगठनों, अधिकारी-कर्मचारी, आमजनों को श्रमिकों के सम्मान में बोरे-बासी खाकर श्रमिक दिवस मनाने की अपील

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के आमजन जीवन में बोरे-बासी लोकप्रिय है। राज्य में बहुतायत रूप से धान की खेती के कारण यहां चावल से बने अनेक व्यंजन प्रचलित है। इनमें बोरे-बासी भी एक है। छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग भी इसे बड़े चाव से खाना पसंद करते हैं। बोरे-बासी यहां के जीवन शैली का अहम हिस्सा हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य की संस्कृति के साथ यहां के खान-पान को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में एक मई मजदूर दिवस के दिन श्रमिकों को सम्मान देने के लिए उनके प्रिय आहार को लेकर पूरे राज्य में बोरे-बासी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी ने बताया कि एक मई श्रम दिवस के अवसर पर बोरे-बासी दिवस मनाया जाएगा। शासन द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले वर्ष एक मई 2022 को अंतराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय भोजन बोरे-बासी खाकर श्रमिक दिवस मनाने की शुरूवात की थी। इस वर्ष भी बोरे-बासी खाकर अंतराष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया जायेगा। कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी ने सभी जनप्रतिनिधि, समाजिक संगठनों, अधिकारी-कर्मचारी, आमजनों को श्रमिकों के सम्मान में बोरे-बासी खाकर श्रमिक दिवस मनाने की अपील की है।

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क्या है बोरे-बासी

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बासी छतीसगढ़ का प्रमुख और प्रचलित व्यंजन है। बासी का मतलब होता है रात के पके चावल को रात को भिगो कर या सुबह भिगो कर खाना या सुबह के पके चावल को दोपहर में खाना। इसमें स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। फिर सब्जी, प्याज, आचार, पापड़, बिजौरी इत्यादि के साथ खाया जाता है। कई बार लोग केवल नमक और प्याज से बासी खाते हैं। बोरे का अर्थ है सुबह के चावल को पानी में भिगोए रखना और बासी का मतलब है रात के बचे चावल को पानी में भिगोकर रात भर रखना उसे कहते हैं बासी इसका अर्थ हो जाता है बोरे- बासी। गर्मी के दिनों में बोरे-बासी शरीर को ठंडा रखता है। पाचन शक्ति बढ़ाता है। त्वचा की कोमलता और वजन संतुलित करने में भी यह रामबाण है। बोरे-बासी में सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
बोरे-बासी यानी बासी चावल जिसका स्वाद चावल से कई गुना बदल जाता है एवं स्वादिष्ट लगने लगता है। बोरे-बासी को तैयार करने के लिए सबसे पहले चावल पकाकर उसे रात को पानी में डालकर छोड़ दिया जाता है तब वह चावल सुबह बासी के रूप में प्राप्त होता है और बासी एक छत्तीसगढ़ की प्रमुख व्यंजन है जिसे गर्मी के समय में पेट पूजा के लिए एवं भोजन का मुख्य व्यंजन है, बोरे -बासी त्वचा को स्वस्थ एवं शरीर में किसी भी बीमारी को दूर करने में सहायता प्रदान करता है एवं विटामिन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है।

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बोरे-बासी खाने से लाभ

बोरे-बासी में पानी की भरपूर मात्रा होती है, जिसके कारण गर्मी के दिनों में शरीर को शीतलता मिलती है। उच्च रक्तचाप नियंत्रित करता है और पाचन क्रिया में मदद मिलती है। गैस या कब्ज की समस्या वाले लोगों के लिए यह फायदेमंद है। बासी का सेवन किया जाए तो पथरी की समस्या होने से भी बचा जा सकता है। चेहरे में ताजगी, शरीर में स्फूर्ति रहती है। बासी के साथ माड़ और पानी से मांसपेशियों को पोषण भी मिलता है। बासी खाने से मोटापा भी दूर भागता है। बासी का सेवन अनिद्रा की बीमारी से भी बचाता है।

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बोरे-बासी में विटामिन भरपूर

बोरे-बासी में कार्बाेहाइड्रेट, आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम, विटामिन्स, मुख्य रूप से विटामिन बी-12, खनिज लवण और जल की बहुतायत होती है। ताजे बने चावल (भात) की अपेक्षा इसमें कैलोरी ज्यादा होती है। बासी के साथ हमेशा भाजी खाया जाता है। पोषक मूल्यों के लिहाज से भाजी में लौह तत्व प्रचुर मात्रा में विद्यमान रहते हैं। इसके अलावा बासी के साथ दही या मही सेवन किया जाता है। दही या मही में भारी मात्रा में कैल्शियम रहता है।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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