डिजिटल अरेस्ट के नाम पर घबराएं नहीं, थोड़ी सावधानी बचा सकती है बड़ी आर्थिक और मानसिक क्षति
परसाडीह में नालसा साइबर अपराध पीड़ितों की सहायता एवं धोखाधड़ी से गई राशि की रिकवरी योजना के तहत जागरूकता शिविर आयोजित

जांजगीर-चांपा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के आदेशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जांजगीर-चांपा के सह-अध्यक्ष के निर्देश एवं मार्गदर्शन में गुरुवार को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसाडीह में साइबर अपराध से बचाव को लेकर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों तथा साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में अधिकार मित्र लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल ने साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के प्रति लोगों को सचेत करते हुए कहा कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। थोड़ी सी सावधानी लोगों को बड़ी आर्थिक और मानसिक क्षति से बचा सकती है। उन्होंने विशेष रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर की जाने वाली ठगी से नहीं घबराने की अपील की।
उन्होंने बताया कि साइबर ठग स्वयं को पुलिस, सीबीआई, कस्टम अधिकारी या अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी अथवा किसी अन्य अपराध में नाम आने का झूठा आरोप लगाकर डराया जाता है और गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे की मांग की जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय संबंधित विभाग अथवा पुलिस से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना चाहिए और किसी भी कीमत पर ठगों को पैसे नहीं देने चाहिए।
फिशिंग और स्पूफिंग से रहें सावधान
लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल ने फिशिंग एवं स्पूफिंग के माध्यम से होने वाली ठगी के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर ठग बैंक, सरकारी विभाग अथवा नामचीन कंपनियों का प्रतिनिधि बनकर फर्जी ई-मेल, मैसेज और फोन कॉल करते हैं। इसके बाद लिंक पर क्लिक करवाकर या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल कर खाते से रकम निकाल लेते हैं।
उन्होंने लोगों से कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, पासवर्ड, CVV अथवा बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। नौकरी और लॉटरी के नाम पर आने वाले संदिग्ध प्रस्तावों से बचने, क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने तथा भावनात्मक दबाव बनाकर जानकारी हासिल करने वाले लोगों से सतर्क रहने की सलाह दी गई।
फर्जी कस्टमर केयर और APK फाइल से भी सावधान
शिविर में बताया गया कि गूगल सर्च के दौरान मिलने वाले फर्जी कस्टमर केयर नंबरों पर कॉल करना भी भारी पड़ सकता है। साइबर ठग समस्या का समाधान करने के नाम पर मोबाइल में कोई ऐप डाउनलोड करवाकर रिमोट एक्सेस प्राप्त कर लेते हैं और इसके बाद बैंक खाते से राशि निकाल सकते हैं।
इसी तरह कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली फर्जी निवेश योजनाओं, सिम कार्ड की धोखाधड़ी से दूसरे व्यक्ति के नाम जारी होने, APK फाइल डाउनलोड करने तथा डिलीवरी अथवा अन्य बहाने से भेजे जाने वाले संदिग्ध लिंक और फाइलों से भी सावधान रहने की अपील की गई।
मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाने की सलाह
अधिकार मित्र भगवती भारद्वाज ने साइबर फ्रॉड से बचने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP साझा नहीं करना चाहिए और संदिग्ध लिंक, ई-मेल या मैसेज पर क्लिक करने से बचना चाहिए। उन्होंने सभी ऑनलाइन खातों के लिए अलग-अलग और मजबूत पासवर्ड रखने तथा जहां संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का उपयोग करने की सलाह दी।
उन्होंने मोबाइल फोन के सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करने और ऐप्स को केवल आधिकारिक Play Store अथवा App Store से ही डाउनलोड करने की बात कही। सार्वजनिक Wi-Fi का उपयोग करते समय बैंकिंग अथवा अन्य संवेदनशील लेन-देन से बचने तथा अचानक धनवान बनाने, बड़ा इनाम जीतने या आसान कमाई का लालच देने वाले कॉल और मैसेज से सतर्क रहने को कहा गया।
साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें कॉल
शिविर में साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर पीड़ित को बिना देर किए कार्रवाई करने की सलाह दी गई। बताया गया कि ठगी की जानकारी मिलते ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल कॉल करें। इसके साथ ही साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने, संबंधित बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तुरंत सूचित करने तथा नजदीकी पुलिस थाना या साइबर सेल में शिकायत करने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करना और उन्हें ठगी के बाद त्वरित कानूनी एवं सहायता तंत्र से जोड़ना रहा। शिविर में विद्यालय के व्याख्याता धनीराम साहू, लखन लाल, अजय कुमार टंडन, लकेश्वर कुमार बंजारे, सुनीता चंद्रा, राजकमल, द्वास राम कश्यप, वीरेंद्र कुमार निराला, सुमन जांगड़े एवं अशोक चौहान सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



