दोहरे हत्याकांड में तीन को फांसी, एक को उम्रकैद
घटना के बाद राज्य सरकार ने सिंगल आदेश से प्रशांत ठाकुर को बनाया था सूरजपुर एसपी, टूटे पुलिस मनोबल के बीच साक्ष्य जुटाकर मजबूत की गई विवेचना

सूरजपुर। जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में गुरुवार को फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की निर्मम हत्या की इस वारदात के बाद जिले में आक्रोश का माहौल था। पुलिस परिवार भी इस जघन्य घटना से भीतर तक प्रभावित था और पुलिस महकमे का मनोबल टूट गया था। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में राज्य सरकार ने तत्काल निर्णय लेते हुए सिंगल आदेश जारी कर प्रशांत कुमार ठाकुर को सूरजपुर पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ किया था।
घटना के बाद जिले की कानून-व्यवस्था के साथ ही आम लोगों का पुलिस पर विश्वास कायम करना बड़ी चुनौती थी। पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार ठाकुर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विवेचना की लगातार जानकारी ली और जांच से जुड़े अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उनका जोर आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ ऐसे ठोस साक्ष्य जुटाने पर रहा, जो न्यायालय में प्रकरण को मजबूती से साबित कर सकें।
घटना के बाद सरकार ने बदला पुलिस नेतृत्व
13 अक्टूबर 2024 की रात हुई इस जघन्य वारदात से पूरा सूरजपुर जिला दहल उठा था। प्रधान आरक्षक की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की धारदार हथियार से हत्या कर शवों को खेत में फेंक दिया गया था। विवेचना के दौरान मामले में दुष्कर्म के तथ्य भी सामने आए थे।
घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश था। पुलिस परिवार के सामने भी यह बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण परिस्थिति थी। ऐसे समय में राज्य सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए सिंगल आदेश जारी कर प्रशांत कुमार ठाकुर को सूरजपुर का पुलिस अधीक्षक बनाया। इसके बाद उन्होंने मामले की विवेचना को प्राथमिकता में रखते हुए पुलिस अधिकारियों से लगातार प्रकरण की प्रगति की जानकारी ली।
साक्ष्य जुटाने पर रहा विशेष जोर
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में विवेचना को केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि घटनाक्रम की प्रत्येक महत्वपूर्ण कड़ी और उपलब्ध साक्ष्य को जुटाने पर जोर दिया गया। तत्कालीन कोतवाली प्रभारी विमलेश दुबे सहित विवेचना से जुड़े पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस टीम ने घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों, परिस्थितिजन्य तथ्यों और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को एकत्र किया। विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों को अभियोजन के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यही साक्ष्य आगे चलकर दोषसिद्धि में महत्वपूर्ण आधार बने।
लगातार लेते रहे विवेचना की जानकारी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार ठाकुर लगातार विवेचना की प्रगति की जानकारी लेते रहे। पुलिस अधिकारियों को जांच के प्रत्येक पहलू को गंभीरता से लेने और साक्ष्यों को मजबूत तरीके से संकलित करने के निर्देश दिए गए।
दोहरे हत्याकांड जैसे जघन्य मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में अपराध को ठोस साक्ष्यों के आधार पर साबित किया जाए। इसी दिशा में पुलिस टीम ने लगातार काम किया। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब न्यायालय का फैसला सामने आया है।
तीन को मृत्युदंड, एक को आजीवन कारावास
फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू और चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके को मृत्युदंड की सजा सुनाई, जबकि आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास से दंडित किया। वहीं सूरज साहू और निलकेश्वर साहू को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया।
28 सितंबर को न्यायालय ने मामले में चार आरोपियों को दोषी करार दिया था और सजा के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रखा था। गुरुवार को न्यायालय ने तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाकर मामले में अपना फैसला सुनाया।
फैसले के बाद पुलिस परिवार और आमजन में संतोष
न्यायालय के फैसले के बाद पुलिस परिवार और आमजन में संतोष का माहौल देखा गया। थाना परिसर के सामने लोगों ने आतिशबाजी कर फैसले का स्वागत किया। जघन्य अपराध में दोषियों को कठोर सजा मिलने को लोगों ने न्याय व्यवस्था में विश्वास मजबूत करने वाला फैसला बताया।
घटना के बाद जिस समय पुलिस महकमे का मनोबल प्रभावित था और आमजन में आक्रोश था, उस दौर में राज्य सरकार द्वारा तत्काल पुलिस नेतृत्व में बदलाव कर प्रशांत कुमार ठाकुर को सूरजपुर की जिम्मेदारी सौंपना और इसके बाद पुलिस टीम द्वारा साक्ष्य आधारित विवेचना को आगे बढ़ाना इस पूरे प्रकरण का महत्वपूर्ण पक्ष रहा।
न्यायालय के फैसले ने यह भी सामने रखा कि गंभीर अपराधों में समयबद्ध, साक्ष्य आधारित और मजबूत विवेचना न्याय तक पहुंचने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार ठाकुर के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा की गई विवेचना अब फैसले के रूप में सामने आई है।



