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नगर सेना में कौन चला रहा ‘वसूली राज’? सैनिकों से मासिक रकम लेने के आरोपों ने खड़े किए बड़े सवाल, खनिज, परिवहन सहित अन्य विभागों में ड्यूटी लगाने के बदले कथित वसूली, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज

0 मलाईदार विभागों में पोस्टिंग के नाम पर हर महीने 3 से 5 हजार रुपये की कथित वसूली, महिला नगर सैनिक की शिकायत के बाद खुलने लगे राज!

जांजगीर-चांपा। कलेक्ट्रेट में कार्यरत एक महिला नगर सैनिक की शिकायत ने जिला सेनानी नगर सेना कार्यालय में वर्षों से चल रहे कथित वसूली तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला सैनिक द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर नगर सेना के जवानों की विभिन्न विभागों में ड्यूटी लगाने के नाम पर हर महीने हजारों रुपये की अवैध वसूली कौन कर रहा है और किसके संरक्षण में यह पूरा खेल संचालित हो रहा है।

सूत्रों की मानें तो जिले में खनिज विभाग, परिवहन विभाग, पुलिस थानों, आबकारी विभाग और अन्य प्रशासनिक कार्यालयों में ड्यूटी के लिए तैनात किए जाने वाले नगर सैनिकों से कथित तौर पर तीन हजार से पांच हजार रुपये प्रतिमाह तक की रकम वसूली जाती है। आरोप है कि जो सैनिक इस रकम का भुगतान नहीं करते, उन्हें मलाईदार माने जाने वाले विभागों से हटाकर कम महत्व वाली जगहों पर भेजने की धमकी दी जाती है।

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नगर सेना कार्यालय जांजगीर-चांपा बना ‘पोस्टिंग सेंटर’

चर्चा यह भी है कि जिले के कई विभागों में वर्षों से एक ही सैनिकों की तैनाती बनी हुई है। सवाल यह उठता है कि आखिर किन मापदंडों के आधार पर कुछ सैनिकों को लगातार ऐसे विभागों में रखा जाता है, जहां अतिरिक्त आय की संभावनाएं अधिक मानी जाती हैं, जबकि अन्य सैनिकों को इसका अवसर नहीं मिलता। यदि ड्यूटी आवंटन पूरी तरह पारदर्शी है तो फिर बार-बार उन्हीं नामों का चयन क्यों होता है?

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महिला सैनिक की शिकायत ने बढ़ाई मुश्किलें

हाल ही में कलेक्ट्रेट में कार्यरत एक महिला नगर सैनिक ने जिला प्रशासन को लिखित शिकायत देकर मानसिक प्रताड़ना और अवकाश संबंधी मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत सामने आने के बाद अब नगर सेना कार्यालय के अंदरूनी कामकाज और ड्यूटी आवंटन व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्र बताते हैं कि महिला सैनिक की शिकायत केवल एक प्रकरण नहीं, बल्कि कार्यालय में लंबे समय से चली आ रही कई अनियमितताओं की ओर संकेत कर रही है।

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सबसे बड़ा सवाल: आखिर रकम जाती कहां है?

यदि वास्तव में सैनिकों से मासिक वसूली की जा रही है तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह रकम किसकी जेब में जा रही है? क्या यह सब जिला सेनानी नगर सेना की जानकारी और सहमति से हो रहा है? या फिर कोई मातहत वरिष्ठ कर्मचारी जिला सेनानी के नाम का इस्तेमाल कर सैनिकों से रकम वसूल रहा है? यदि जिला सेनानी को इसकी जानकारी नहीं है तो यह उनकी प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी और यदि जानकारी है तो मामला और भी गंभीर हो जाता है।

जांच हुई तो सामने आ सकते हैं कई चेहरे

नगर सेना कार्यालय से जुड़े सूत्रों का दावा है कि यदि सैनिकों के बयान गोपनीय तरीके से दर्ज किए जाएं और पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न विभागों में की गई तैनातियों की जांच हो तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। यह भी पता चल सकता है कि किन-किन सैनिकों को लगातार लाभप्रद स्थानों पर रखा गया और इसके पीछे क्या कारण रहे।

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मीडिया को जवाब देने से बच रही जिला सेनानी

महिला सैनिक की शिकायत और कथित वसूली के आरोपों के बीच विभागीय पक्ष जानने के लिए जिला सेनानी नगर सेना योग्यता साहू से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। ऐसे में आरोपों को लेकर उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

गंभीर आरोपों को लेकर प्रशासनिक जांच की मांग तेज

अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि सैनिकों से विभागों में ड्यूटी लगाने के नाम पर वास्तव में मासिक वसूली की जा रही है तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि वर्दीधारी कर्मियों के शोषण का भी गंभीर विषय है। महिला सैनिक की शिकायत के बाद अब निगाहें कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकी हैं। यदि निष्पक्ष जांच कराई गई तो नगर सेना कार्यालय में चल रहे कथित वसूली तंत्र की परतें खुल सकती हैं और कई जिम्मेदार चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

Mukesh Tiwari

Editor in Chief- Dabang News Today

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