जांजगीर-चांपा जिले में ACB की दो बड़ी कार्रवाई: CSPDCL के 3 अधिकारी 35 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

जांजगीर-चांपा। एसीबी बिलासपुर की टीम ने जांजगीर जिले में बड़ी ट्रैप कार्रवाई करते हुए सीएसपीडीसीएल के तीन अधिकारियों को 35 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों में सहायक अभियंता विजय नोर्गे, उप अभियंता राजेंद्र शुक्ला और सहायक ग्रेड-1 देवेंद्र राठौर शामिल हैं।
डीएसपी एसीबी अजितेश सिंह के अनुसार, जांजगीर निवासी प्रदीप यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ग्राम खोखसा में फ्लाई ऐश ब्रिक्स प्लांट लगाने के लिए ट्रांसफार्मर और मीटर स्थापना के एवज में अधिकारियों द्वारा रिश्वत मांगी जा रही है। सत्यापन के बाद शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई।
योजना के तहत 20 मार्च 2026 को प्रार्थी को सीएसपीडीसीएल कार्यालय भेजा गया, जहां उसने उप अभियंता को 10 हजार रुपये और सहायक अभियंता के कहने पर उनके सहायक को 25 हजार रुपये दिए। जैसे ही राशि का लेन-देन हुआ, पहले से मौजूद एसीबी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को धर दबोचा।
एसीबी ने आरोपियों के पास से 35 हजार रुपये की रिश्वत राशि बरामद कर ली है। सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 12 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
इधर नवागढ़ नगर पंचायत के लेखापाल प्रकाश जायसवाल को एसीबी की टीम ने 8 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि वह बिल भुगतान के चेक जारी कराने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहा था।
दरअसल, नवागढ़ निवासी अब्दुल वहाब ने एसीबी बिलासपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके फर्म द्वारा कराए गए अधोसंरचना और मरम्मत कार्य के करीब 2 लाख 3 हजार रुपए के भुगतान के लिए लेखापाल द्वारा 16 हजार रुपए रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायतकर्ता 6 हजार रुपए पहले ही दे चुका था, जबकि बाकी रकम देने से इनकार करते हुए उसने एसीबी से कार्रवाई की मांग की।
शिकायत का सत्यापन होने के बाद एसीबी ने ट्रैप प्लान तैयार किया। मोलभाव के बाद आरोपी 10 हजार की जगह 8 हजार रुपए लेने पर राजी हुआ। आज तय योजना के तहत जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम ली और उसे अपनी कार में रखा, पहले से घात लगाए एसीबी की टीम ने ग्राम सेमरा के पास शाह क्रशर के नजदीक उसे धर दबोचा।
एसीबी ने आरोपी के कब्जे से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली है और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।



